शारीरिक स्वायत्तता के अधिकार

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार अविवाहित महिलाएं भी 24 सप्ताह की अवधि तक गर्भपात कराने की हकदार हैं तथा मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) अधिनियम के तहत वैवाहिक स्थिति के आधार पर कोई भेद करना असंवैधानिक है। गर्भावस्था समाप्त करने का निर्णय, उस महिला के ‘शारीरिक स्वायत्तता के अधिकार’ में दृढ़ता से निहित है।

  • अविवाहित महिलाओं को प्रजनन स्वायत्तता से वंचित करना अनुच्छेद 14 का उल्लंघन माना जायेगा।
  • सुप्रीम कोर्ट के कहा है की सभी महिलाएं सुरक्षित और कानूनी गर्भपात की हकदार हैं तथा किसी महिला की वैवाहिक स्थिति उसे गर्भपात कराने के अधिकार से वंचित करने का आधार नहीं हो सकती। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट में वर्ष 2021 में किया गया संशोधन विवाहित और अविवाहित महिलाओं के बीच अंतर नहीं करता है।