न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि की मंजूरी

अक्टूबर 2022 में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने विपणन सीजन 2023-24 के लिए सभी अनिवार्य रबी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि को मंजूरी दी है। यह मंजूरी गेहूं सहित छह रबी फसलों के लिए दी गई है।

  • सरकार कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिशों के आधार पर तथा राज्य सरकारों और संबंधित केंद्रीय मंत्रलयों/विभागों के मतों पर विचार करने के बाद 22 अनिवार्य कृषि फसलों का एमएसपी तय करती है।
  • 22 अनिवार्य फसलों में 14 खरीफ फसलें शामिल हैं - जैसे धान, ज्वार, बाजरा, मक्का, रागी, अरहर (अरहर), मूंग, उड़द, मूंगफली, सोयाबीन (पीला), सूरजमुखी के बीज, तिल, नाइजरसीड, कपास और 6 रबी फसलें जैसे गेहूं, जौ, चना, मसूर (मसूर), रेपसीड और सरसों, कुसुम और 2 व्यावसायिक फसलें जैसे जूट और खोपरा।

अन्य प्रमुख प्रावधान :

रबी फसलों की एमएसपी में बढ़ोतरी केंद्रीय बजट 2018-19 में की गई घोषणा के अनुरूप है, जिसमें कहा गया कि देशभर के औसत उत्पादन को मद्देनजर रखते हुए एमएसपी में कम से कम 1.5 गुणा रखने की घोषणा की गई थी, ताकि किसानों को तर्कसंगत और उचित कीमत मिल सके।

  • वर्तमान MSP पर रिटर्न की अधिकतम दर रेपसीड और सरसों के लिए 104 प्रतिशत है। इसके बाद रिटर्न की अधिकतम दर गेहूं के लिए 100 प्रतिशत और मसूर के लिए 85 प्रतिशत है।
  • सरसों और रेपसीड के MSP में अधिक वृद्धि हुई है। ऐसा होने से अत्याधिक गेहूं की बुवाई वाले कुछ क्षेत्रों में in तिलहनों की खेती को बढ़ावा मिल सकता है।

MSP के विषय में

  • MSP प्रणाली को गेहूं के लिए 1966-67 में आरंभ किया गया था। बाद में इसमें अन्य आवश्यक खाद्य फसलों को शामिल करते हुए इसका विस्तार किया गया।
  • यह एक मूल्य समर्थन तंत्र है। यह किसानों को उनके उत्पादों के लिए गारंटीकृत मूल्य और निश्चित बाजार उपलब्ध कराने के लिए एक सुरक्षा जाल के रूप में कार्य करता है।
  • MSP को कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) द्वारा निर्धारित किया जाता है।
  • इसे CACP की सिफारिशों के आधार पर वर्ष में दो बार तय किया जाता है। इसके बाद आर्थिक मामलों की मंत्रिमडलीय समिति द्वारा स्वीकृत की जाती है।