देश में बाघों को विलुप्त होने से बचाने के लिए भारत सरकार ने 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर आरंभ किया था। इसी प्रयास के तहत टाइगर रिजर्व बनाए गए। 1973-74 में जहां केवल 9 टाइगर रिजर्व थे, अब इनकी संख्या बढ़कर 50 हो गई है। पर्यावरण मंत्रलय ने 2005 में नेशनल टाइगर कन्जर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) का गठन किया, जिसको प्रोजेक्ट टाइगर के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई।
जैव विविधाता विजन-2050 जैव विविधता के लिए विजन-2050 के अंतर्गत चार दीर्घकालिक लक्ष्यों को निर्धारित किया गया है, जो निम्नलिखित हैं- लक्ष्य A: सभी पारिस्थितिक तंत्रें की अखंडता को बढ़ाना, इनके क्षेत्र में कम से कम 15 प्रतिशत की वृद्धि करना, विभिन्न पारिस्थितिक तंत्रें के मध्य कनेक्टिविटी तथा अखंडता को सुनिश्चित करना, प्रजातियों के विलुप्त होने की दर में कम से कम 10 गुना कमी करना, जंगली और पालतू प्रजातियों की आनुवंशिक विविधता की रक्षा करना तथा सभी प्रजातियों के भीतर कम से कम 90 प्रतिशत आनुवंशिक विविधता को बनाए रखना। लक्ष्य B: प्रकृति द्वारा लोगों को प्रदान किए जाने वाले लाभों का मूल्यांकन करने के साथ इन लाभों को बढ़ाने अथवा सामान स्तर पर बनाए रखना। संपूर्ण मानवता के लिए वैश्विक विकास एजेंडे का समर्थन करते हुए संसाधनों के संरक्षण और टिकाऊ उपयोग को बढ़ावा देना। लक्ष्य C: जैव विविधता के संरक्षण और सतत उपयोग के साथ साझा किए गए मौद्रिक और गैर-मौद्रिक दोनों लाभों में पर्याप्त वृद्धि करना। आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से होने वाले लाभों को निष्पक्ष और समान रूप से साझा करना। लक्ष्य D: विजन 2050 को प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है कि उपलब्ध वित्तीय साधनों के मध्य व्याप्त अंतरों को कम किया जाए। |