वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला: भारत का अवसर

COVID-19 महामारी, दुनिया भर में बढ़ते आर्थिक राष्ट्रवाद और महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक बदलावों की पृष्ठभूमि के खिलाफ, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ है।

  • कोरोना महामारी के बाद चीन द्वारा छोड़ी गई आपूर्ति श्रृंखला के निर्वात को भरने में भारत एक स्वाभाविक विकल्प के रूप में उभरा है। भारत के मामले में इसकी मुख्य ताकत इसके विविध व्यावसायिक परिदृश्य, कुशल कार्यबल है।

चुनौतियाँ:

  • वित्त तक पहुँच
  • उद्योगों का अनौपचारिकरण
  • तकनीकी की कम समझ
  • अन्य चुनौतियों में कुशल कार्यबल, ज्ञान और पर्याप्त भौतिक अवसंरचनाओं की कमी तथा भ्रष्ट नौकरशाही शामिल है |

निम्नलिखित कारणों से देश में विदेशी पूंजी का अन्तर्वाह हुआ है-

  • निवेशकों के लिए उदार और आकर्षक नीति व्यवस्था
  • बेहतर व्यापारिक माहौल
  • नियामक ढांचे में कमी

भारत के लिए विभिन्न क्षेत्रों में अवसर:

  • अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता तथा अच्छी गुणवत्ता के कारण सक्षम भारतीय फार्मा कंपनियों ने वैश्विक पहचान बनाई है जिसमें विश्व के 60 प्रतिशत टीके तथा 20 प्रतिशत जेनेरिक दवाएं भारत से आती हैं। वैश्विक व्यापार बाधाओं तथा कोविड संबंधित दवाओं की मांग में कमी के बावजूद सकारात्मक वृद्धि बनाये रखी है।
  • भारत के रासायनिक उद्योग के 2025 तक USD160 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है जो वैश्विक रासायनिक उद्योग का 3-3.5 प्रतिशत हिस्सा है, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
  • भारत स्वयं को विश्व के खाद्य आपूर्तिकर्ता देश के रूप में स्थापित कर सकता है, क्योंकि यहां कृषि योग्य भूमि पर विभिन्न मौसमों में विभिन्न प्रकार के फल तथा सब्जियों का उत्पादन होता है।
  • ऑटोमोटिव मिशन प्लान 2016-26 ऑटोमोटिव उद्योग के लिए 3 गुना वृद्धि का लक्ष्य रखता है और भारत को एक विनिर्माण आधार और एक निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करता है। यह योजना भारत में ऑटो-सेक्टर पारिस्थितिकी तंत्र की उन्नति को रेखांकित करती है।
  • विश्व का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार। विश्व की विभिन्न विदेशी कम्पनियाँ भारत में अपना प्लांट स्थापित कर रही हैं, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए महत्वपूर्ण है।