सहकारी उद्यमिता

अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन (International Cooperative Alliance- ICA), सहकारिता (Cooperative) को "संयुक्त स्वामित्व वाले और लोकतांत्रिक रूप से नियंत्रित उद्यम के माध्यम से अपनी आम आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक जरूरतों एवं आकांक्षाओं को पूरा करने के लिये स्वेच्छा से एकजुट व्यक्तियों के स्वायत्त संघ" के रूप में परिभाषित करता है।

  • यह न तो निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की तरह व्यवसाय का तीसरा क्षेत्र है और न ही प्राइवेट लिमिटेड है और न ही पब्लिक लिमिटेड है , यह किसी विशेष उदेश्य की प्राप्ति हेतु आपसी सहयोग के लिए संगठित व्यक्तियों द्वारा स्थापित , संचालित और प्रबंधित उधमी क्षेत्र है
  • यह सभी के लिए और सभी एक केलिए सिद्धांत पर कार्य करता है

संवैधानिक प्रावधान:

  • संविधान (97वाँ संशोधन) अधिनियम, 2011 द्वारा भारत में काम कर रही सहकारी समितियों के संबंध में भाग IXA (नगरपालिका) के ठीक बाद एक नया भाग IXB जोड़ा गया।
  • संविधान के भाग III के अंतर्गत अनुच्छेद 19(1)(ब) में "संघ और संगठन" के बाद "सहकारिता" शब्द जोड़ा गया था।
  • संविधान के भाग 4 में "सहकारी समितियों के प्रचार" के संबंध में अनुच्छेद 43 में प्रावधान किया गया है |

सरकार द्वारा की गई पहल:

  • सहकारिता क्षेत्र के विकास को नए सिरे से गति प्रदान करने के उद्देश्य से जुलाई 2021 में सहकारिता मंत्रालय का गठन किया गया।
  • बहु-राज्य सहकारी समिति (MSCS) संशोधन विधेयक, 2022 को मंज़ूरी।
  • यह संशोधन व्यवसाय करने में आसानी, अधिक पारदर्शिता और शासन को बढ़ाने का प्रयास करता है।
  • नीति निर्माण और कार्यान्वयन में हितधारकों की सुविधा के लिए देश में सहकारी समितियों के एक प्रामाणिक और अद्यतन डेटा भंडार की सुविधा।
  • सामान्य सेवा केंद्रों (सीएससी) के रूप में पीएसीएस: पीएसीएस की व्यवहार्यता में सुधार करने, ग्रामीण स्तर पर ई-सेवाएं प्रदान करने रोजगार सृजन करने के लिए सीएससी के रूप में कार्य करने में मदद मिल सके।
  • राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम
  • जीईएम पोर्टल पर 'खरीदार' के रूप में सहकारी समितियां
  • सहकारी समितियों पर अधिभार तथा न्यूनतम वैकल्पिक कर में कमी

सहकारिता उद्यमिता में सहायक पहल:

  • सहकारिता से संबंधित कानूनों का सरलीकरण
  • नए स्नातकों को इस बात से जागरूक कराना कि सहकारी उद्यमिता, उनके कैरियर के लिए एक पूर्ण विकल्प उपलब्ध कराता है।
  • विभिन्न संस्थानों द्वारा सहकारी उद्यमिता के लिए प्रशिक्षण कौशल उपलब्ध कराना
  • डिजिटलीकरण तथा तकनीक का उपयोग करना
  • इन्हें समय पर पर्याप्त और किफायती वित्तपोषण और सेवाओं की सुविधा।
  • सहकारी समितियों के लिए उत्पादों और सेवाओं का विपणन में सरकारी सहायता

आगे की राह

  • सहकारिता न केवल व्यवस्था में एकाधिकार के बढ़ते प्रभाव पर रोक लगाती है बल्कि आर्थिक गतिविधियों में सभी की सहभागिता भी सुनिश्चित करती है इसलिए भारत में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम वित् पोषण द्वारा देश में सहकारिता आन्दोलन को बढ़ावा प्रदान कर रहा है