वन अधिाकार और वन संरक्षण के बीच संघर्ष

पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों (ESZ) के निर्माण के कारण केरल और अन्य राज्यों के ऐसे क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं।

पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESZ)

  • इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा घोषित संरक्षित क्षेत्रों के आसपास का एक संवेदनशील क्षेत्र है।
  • संरक्षित क्षेत्र वे क्षेत्र हैं, जो वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (Wildlife (Protection) Act, 1972) के तहत अधिसूचित किये जाते हैं।
  • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत वर्णित संरक्षित क्षेत्रें में अभयारण्य, राष्ट्रीय उद्यान, टाइगर रिजर्व, संरक्षण रिजर्व और सामुदायिक रिजर्व शामिल होते हैं।

वन (संरक्षण) नियम, 2022 के प्रावधान

  • समितियों के गठन का प्रावधान।
  • क्षतिपूरक वनीकरण का प्रावधान।
  • निजी वृक्षारोपण की अनुमति।
  • वन भूमि के परिवर्तन हेतु ग्राम सभा की लिखित सहमति की आवश्यकता नहीं।
  • वनों में निर्माण कार्य की अनुमति।

वन अधिकार अधिनियम (Forest Rights Act (FRA)

  • अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006, जिसे वन अधिकार अधिनियम (FRA) के रूप में भी जाना जाता है, वन संसाधनों पर निर्भर रहने वाले आदिवासी समुदायों के प्रथागत और पारंपरिक अधिकारों को मान्यता प्रदान करता है।
  • इसके अंतर्गत ग्राम सभाओं को गाँव की सीमाओं के भीतर वनों, वन्य जीवन और जैव विविधता के संरक्षण, सुरक्षा और प्रबंधन के लिए अधिकृत वैधानिक प्राधिकरण बनाया गया है।