महिला श्रम बल भागीदारी

भारत में महिला श्रम बल भागीदारी दर पहले से ही अत्यंत निम्न है। कोविड-19 जनित लॉकडाउन के कारण इसमें और भी गिरावट आई है। उत्पादक आयु वर्ग (15-59 वर्ष) के लिए महिला श्रम शक्ति भागीदारी दर 2011-12 से 2021-22 के बीच 13.9 प्रतिशत घट गई और 33.1 प्रतिशत से घटकर 19.2 प्रतिशत हो गई।

प्रवृति

  • महिला श्रम बल की भागीदारी दर शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक है।
  • कोविड अवधि के दौरान, पुरुषों के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रवास के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के कार्यबल में भी गिरावट आई है।
  • भारत में लगभग 70 प्रतिशत कामकाजी महिलाओं ने अपनी नौकरी छोड़ दी है या छोड़ने पर विचार किया
  • ग्रामीण-शहरी अंतराल की तुलना की जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों के कुल रोज़गार में अनौपचारिक क्षेत्र का हिस्सा 96 प्रतिशत है। इसमें से 98 प्रतिशत पुरुष अनौपचारिक रोजगार की तुलना में महिला अनौपचारिक रोजगार 95 प्रतिशत था।
  • शहरी भारत की कुल महिला श्रमिकों में से 82 प्रतिशत और कुल पुरुष श्रमिकों में से 78 प्रतिशत अनौपचारिक क्षेत्र के रोजगार में संलग्न थे।
  • यह खराब प्रदर्शन काफी हद तक कार्यबल में भारतीय महिलाओं की बहुत कम भागीदारी के कारण है।

कम श्रम बल भागीदारी का प्रमुख कारण: कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ भेदभाव और सुरक्षा का आभाव है।

  • अनौपचारिक एवं असंगठित क्षेत्र में महिला सुरक्षा का अत्यंत अभाव आँकड़ों के विश्लेषण से यह ज्ञात होता है कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिला श्रमिकों के अनौपचारिक क्षेत्र में संलग्न होने की संभावना अधिक है।

सुझाव

  • महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनयम, 2013’, ‘दंड विधि संशोधन अधिनियम, 2013’ और ‘घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, 2005’ जैसे कानूनों को पूर्ण प्रतिबद्धता से लागू करने की आवश्यकता है।
  • अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों को लिंग आधारित हिंसा के प्रति संवेदनशील बनाना
  • कानूनों के बारे में उन्हें सरल भाषा में जानकारी देना।
  • स्थानीय शिकायत समितियों को अधिक कार्यात्मक बनाना।
  • कार्यस्थलों पर ऐसे मामलों से निपटने के लिये स्थानीय श्रम ठेकेदारों को संवेदनशील बनाना।
  • इन उपायों को स्थानीय महिला अधिकार संगठनों के तकनीकी सहयोग से लागू किया जा सकता है। सरकार को वर्तमान कानूनों के कार्यान्वयन में सुधार करने और कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा के लिये बजटीय प्रावधानों को बढ़ाने की भी आवश्यकता है।