नेपाल का एक नया राजनीतिक नक्शाः नवंबर 2019 में नेपाल ने एक नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था, जो कि उत्तराखंड के कालापानी, लिंपियाधुरा और लिपुलेख को नेपाल के हिस्से के रूप में प्रस्तुत करता है। नए नक्शे में ‘सुस्ता’ (पश्चिम चंपारण जिला, बिहार) को भी नेपाल के क्षेत्र के रूप में दिखाया गया है।
कालापानी विवादः कालापानी सीमा मुद्दा दोनों देशों के मध्य लम्बे समय से बना हुआ है। इन सीमाओं को वर्ष 1816 में अंग्रेजों द्वारा तय किया गया था और भारत को वे क्षेत्र विरासत में मिले थे, जिन पर अंग्रेजों ने वर्ष 1947 में क्षेत्रीय नियंत्रण का प्रयोग किया था। भारत-नेपाल सीमा का 98» सीमांकन किया गया था, दो क्षेत्र, सुस्ता और कालापानी का निर्णय अधर में था।
‘मधेशी’ मुद्दाः वर्ष 2015 में बनकर तैयार हुआ नेपाली संविधान में मधेसी मूल के लोगों के अधिकारों के हनन का मुद्दा चर्चित रहा। इस संविधान के प्रावधानों में मधेसियों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व एवं नागरिकता संबंधी भेदभाव सम्मिलित था।
ये मधेसी भारतीय मूल के हैं, अतः भारत ने इनके अधिकारों के संदर्भ में संविधान संशोधन के लिये नेपाल सरकार पर दबाव बनाया, जिसका परिणाम दोनों देशों के संबंधों में अति तनाव की स्थिति के रूप में देखने को मिला। भारत-नेपाल के संबंधों को निम्नतम स्थिति तक पहुँचा दिया था।
बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI): चीन, नेपाल को अपने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) में एक प्रमुख भागीदार मानता है और वैश्विक व्यापार को बढ़ावा देने की अपनी योजनाओं के हिस्से के रूप में नेपाल की बुनियादी अवसंरचना में निवेश करना चाहता है।
नेपाल और चीन का बढ़ता सहयोग भारत तथा चीन के बीच नेपाल की ‘बफर स्टेट’ की स्थिति को कमजोर कर सकता है। चीन, नेपाल में रहने वाले तिब्बतियों के बीच किसी भी चीन विरोधी भावना को रोकना चाहता है।