वर्ष 2002 में 86वें संवैधानिक संशोधन से शिक्षा के अधिकार को संविधान के भाग-III में एक मौलिक अधिकार के तहत शामिल किया गया।
इसे अनुच्छेद 21A के अंतर्गत शामिल किया गया, जिसने 6-14 वर्ष के बच्चों के लिये शिक्षा के अधिकार को एक मौलिक अधिकार बना दिया।
यह संशोधन अनुच्छेद 45 के निदेशक सिद्धांत को बदलता है। इसके तहत राज्य सभी को चौदह वर्ष की आयु पूर्ण करने तक निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने के लिए उपबंध करने का प्रयास करेगा। इसमें एक मूल कर्तव्य अनुच्छेद 51क के तहत जोड़ा गया-‘प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह 6 से 14 वर्ष तक के अपने बच्चे को शिक्षा प्रदान कराएगा।