सुपरमैसिव ब्लैक होल की खोज

मुंबई विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा एक दुर्लभ सुपरमैसिव ब्लैक होल (supermassive black hole) देखा गया है। यह ब्लैक होल पृथ्वी से लगभग एक अरब प्रकाश वर्ष दूर है।

प्रमुख बिंदुः यह सुपरमैसिव ब्लैक होल RAD 12 आकाशगंगा के केंद्र में स्थित है, जो दीर्घ वृत्ताकार (elliptical) या अंडे के आकार (egg-shaped) का है।

  • सुपरमैसिव ब्लैक होल का पता पुणे के पास स्थित जाइंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप (Giant Meterwave Radio Telescope) तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय रेडियो और ऑप्टिकल दूरबीनों की सहायता से लगाया गया है।
  • अगले एक अरब वर्षों में ये दोनों आकाशगंगा एक-दूसरे में विलीन हो जाएंगे। विलय के पश्चात वृहद पैमाने पर गुरुत्वाकर्षण तरंगें निकलने की संभावना है।
  • सुपरमैसिव ब्लैक होल आकाशगंगाओं के केंद्र में स्थित होते हैं तथा इनसे विकिरण और कणों के शक्तिशाली जेट निकलते हैं।
  • आमतौर पर ब्लैक होल विकिरण (radiation) और कणों (particles) को विपरीत दिशा में उत्सर्जित करते हैं, मगर नया खोजा गया सुपरमैसिव ब्लैक होल से एक ही दिशा में विकिरण और कण उत्सर्जित हो रहे हैं।

ब्लैक होल

  • ब्लैक होल ऐसा खगोलीय पिंड होता है, जिसका गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र इतना शक्तिशाली होता है कि प्रकाश सहित कुछ भी बाहर नहीं आ सकता है।
  • ब्लैक होल अपने ऊपर पड़ने वाले सारे प्रकाश को अवशोषित कर लेता है और कुछ भी प्रतिबिंबित नहीं करता है।
  • विलय होने की घटना विशालकाय ब्लैक होल का पता लगाने के लिए आदर्श स्थिति का निर्माण करती है। पहला वास्तविक ब्लैक होल 1971 में खगोलविदों द्वारा खोजा गया था।