फ्यूजन एनर्जी ब्रेकथ्रू

दिसंबर 2022 में संयुक्त राज्य अमेरिका के वैज्ञानिकों ने पहली बार परमाणु संलयन प्रतिक्रिया (Nuclear fusion reaction) से शुद्ध ऊर्जा लाभ (Net Energy Gain) हासिल किया है, वैज्ञानिक इसे भविष्य के लिए ऊर्जा का सर्वाधिक भरोसेमंद स्रोत मानते हैं।

  • यह प्रयोग कैलिफोर्निया में लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लेबोरेटरी (Lawrence Livermore National Laboratory) में किया गया।

प्रयोग के संदर्भ में: जड़त्वीय संलयन विधिः वैज्ञानिकों द्वारा व्यापक ऊर्जा तथा तापमान उत्पन्न करने के लिए जड़त्वीय संलयन (Intertial fusion) विधि का उपयोग किया गया। इसके अंतर्गत उच्च-ऊर्जा वाले लेजर बीम (High-energy laser beam) का उपयोग किया जाता है।

चुंबकीय संलयन विधि

  • दक्षिणी फ्रांस में अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जारी इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर (International Thermonuclear Experimental Reactor - ITER) नामक परियोजना (इसमें भारत भी भागीदार है) में समान उद्देश्य के लिए अत्यधिक मजबूत चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग किया गया है। यह परियोजना चुंबकीय संलयन (Magnetic fusion) विधि पर आधारित है।
  • ITER परियोजना द्वारा वर्ष 2035 तथा 2040 के मध्य व्यावसायिक रूप से स्केलेबल परमाणु संलयन रिएक्टर (Scalable Nuclear Fusion Reactor) की व्यवहार्यता प्रदर्शित करने की संभावना है।

चुनौतियां

विशाल ऊर्जा की आवश्यकताः संलयन प्रतिक्रिया केवल अत्यंत उच्च तापमान की स्थिति में ही संपन्न हो सकती है।

  • वैज्ञानिकों के अनुसार इस प्रतिक्रिया को संपन्न कराने के लिए आवश्यक ऊर्जा की मात्र सूर्य के केंद्र में मौजूद तापमान से 10 गुना अधिक होनी चाहिए।
  • प्रयोगशालाओं में इस तरह के चरम वातावरण को निर्मित करने के लिए भारी मात्र में ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
  • उत्पादित ऊर्जा की न्यून मात्र अब तक के प्रयोग बताते हैं कि संलयन प्रतिक्रिया को संपन्न करने के लिए आवश्यक ऊर्जा की मात्र की तुलना में उत्पन्न ऊर्जा की मात्र अपेक्षाकृत कम रही है।

भविष्य की संभावनाएं: वैज्ञानिकों के अनुसार व्यावसायिक स्तर पर बिजली पैदा करने के लिए फ्रयूजन प्रक्रिया का उपयोग अभी भी दो से तीन दशक दूर है।

प्रयोग की सीमाएं

  • वर्तमान में प्रयोगशालाओं में चल रही संलयन प्रतिक्रियाएं मुश्किल से कुछ सेकंड तक चलती हैं।
  • वैज्ञानिकों ने पाया है कि लेजर बीम पर आधारित प्रतिक्रियाएं और भी कम समय तक संचालित होती हैं। ऐसी स्थिति में, फ्रयूजन की प्रक्रिया को लंबे समय तक बनाए रऽना एक मुश्किल कार्य है।