संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय मिलेट क्रॉप वर्ष घोषित किया है। संयुक्त राष्ट्र की ओर से यह कदम भारत सरकार की पहल के बाद उठाया गया है।
बाजरे(मिलेट) का महत्त्व
बाजरे (Millets) को चावल और गेहूं जैसे अत्यधिक उपभोग वाले अनाजों की तुलना में एक सुपरफूड (पोषण तत्त्वों से भरपूर अनाज) के रूप में देखा जाता है तथा इसका उत्पादन टिकाऊ कृषि एवं विश्व स्वास्थ्य के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए किया जाता है।
बाजरा ग्लूटेन मुक्त होते हैं और इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे मोटापा और मधुमेह जैसी स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में मदद मिलता है।
इसकी फसल तैयार होने में लगने वाली समयावधि एवं फसल लागत दोनों ही कम हैं तथा इसे सूखे, कम उपजाऊ, पहाड़ी, आदिवासी और वर्षा आश्रित क्षेत्रों में भी उगाया जा सकता है।
बाजरे में कार्बन और वाटर फुटप्रिंट कम होता है
भारत में बाजरा(मिलेट)
भारत में उपलब्ध कुछ सामान्य फसलों में बाजरा रागी (फिंगर मिलेट), ज्वार (सोरघम), समा (छोटा बाजरा), बाजरा (मोती बाजरा) और वरिगा (प्रोसो मिलेट) शामिल हैं।
विश्व में भारत बाजरा का सबसे बड़ा उत्पादक है। यह वैश्विक उत्पादन का 20% और एशिया में उत्पादन का 80% हिस्सा है।
भारत में बाजरा उत्पादक प्रमुख राज्यों में राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक शामिल हैं।
चुनौतियाँ
हरित क्रांति के समय खाद्य सुरक्षा के लिये गेहूँ और चावल जैसी अधिक उपज वाली किस्मों पर ध्यान देना ।
अन्य फसलों पर उपलब्ध MSP भी बाजरे के फसल उत्पादन को हतोत्साहित करता है ।
‘अल्ट्रा-प्रोसेस्ड’ और ‘रेडी-टू-ईट’ उत्पादों के मांग में वृद्धि ।
सरकार द्वारा पहल
सरकार द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बाजरे को शामिल करना ।
सरकार द्वारा किसानों को बीज किट (Seed Kits) और बाज़ार क्षमता को विकसित करना ।
वर्ष 2018 में इसे पौष्टिक अनाज के रूप में अधिसूचित किया और पोषण मिशन अभियान में भी शामिल किया तथा इसे 2018 में "बाजरा का राष्ट्रीय वर्ष" घोषित किया।
पोषक अनाज की आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं को दूर करने के लिए न्यूट्री अनाज निर्यात संवर्धन फोरम बनाया ।