भारत एवं पड़ोसी राष्ट्रों के मध्य सीमा

सीमा

सीमा से लगे राज्य

अन्य सम्बंधित तथ्य

भारत- बांग्लादेश

पश्चिम बंगाल (2,216.7 किमी.), असम (263 किमी.), मेघालय (443 किमी.), त्रिपुरा (856 किमी.) और मिजोरम (318 किमी.)

कुल सीमा = 4,096.7 किमी.

  • जल विवादः तीस्ता नदी जल का बंटवारा, बराक नदी पर भारत द्वारा बांध का निर्माण आदि।
  • अवैध प्रवासनः 1971 के स्वतंत्रता के युद्ध, जिसके कारण बांग्लादेश राज्य का सृजन हुआ, के पश्चात् लाखों बांग्लादेशी प्रवासी (जिनमें से अधिकांश अवैध थे) भारत आये।
  • बाड़ लगानाः सीमा पार से होने वाले घुसपैठ, तस्करी और अन्य राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से सरकार ने इस सीमा पर बाड़ लगाने का कार्य शुरू किया है।
  • सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमावर्ती राज्यों के साथ सीमा संरक्षण ग्रिड (BPG) की स्थापना की घोषणा की है। इसमें भौतिक अवरोध, गैर-भौतिक अवरोध, निगरानी प्रणाली, खुफिया एजेंसियां, राज्य पुलिस, BSF शामिल हैं। यह समग्र सीमा सुरक्षा में राज्यों के लिए अधिक सहायता सुनिश्चित करने हेतु राज्यों को भी भूमिका प्रदान की जाएगी।

भारत- पाकिस्तान

गुजरात, राजस्थान, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, एवं लद्दाख

कुल सीमा = 3,323

  • सर क्रीक और कश्मीर में सीमा विवाद।
  • सिंधु नदी जल बंटवारे का मुद्दा।
  • भारत को अस्थिर करने के उद्देश्य से घुसपैठ और सीमा पार आतंकवाद।
  • अन्य मुद्दों में ड्रग तस्करी, नकली मुद्रा, हथियार तस्करी आदि सम्मिलित हैं।
  • पठानकोट आतंकवादी हमले के बाद, गृह मंत्रलय ने व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली (CIBMS) के कार्यान्वयन को अनुमोदन प्रदान किया है। इसका उद्देश्य सामान्य परिस्थितियों के साथ-साथ प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों में भी समग्र सुरक्षा प्रदान करने हेतु सीमाओं पर एक एकीकृत सुरक्षा प्रणाली की स्थापना करना है।

भारत- चीन

हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश एवं लद्दाख

कुल सीमा = 3,488 किमी.

  • जम्मू-कश्मीर में अक्साई चिन के साथ-साथ अरुणाचल प्रदेश में छिट-पुट आक्रामकता के साथ सीमा विवाद।
  • जल की साझेदारी का मुद्दा, क्योंकि चीन अपनी ओर बांध का निर्माण कर रहा है, जिससे भारत की ओर जल का प्रवाह कम हो रहा है।
  • अवसंरचना का निर्माणः भारत सैन्यदल के आवागमन का समय कम करने हेतु कुछ महत्वपूर्ण पुलों का निर्माण कर रहा है। उदाहरण, ढोला-सादिया पुल।

भारत- नेपाल

उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम

कुल सीमा = 1,751 किमी.

  • सुस्ता क्षेत्र विवादः उत्तर प्रदेश तथा बिहार राज्यों की सीमा पर पश्चिमी चंपारण जिलों के पास अवस्थित ‘सुस्ता क्षेत्र’ को भी नेपाल द्वारा अपने नवीन मानचित्र में शामिल किया गया है।
  • कालापानी विवादः नेपाल द्वारा आधिकारिक रूप से नेपाल का नवीन मानचित्र जारी किया गया, जो उत्तराखंड के कालापानी लिंपियाधुरा (Limpiyadhura) और लिपुलेख (Lipulekh) को अपने संप्रभु क्षेत्र का हिस्सा मानता है, जबकि 2 नवंबर, 2019 को भारत ने एक नवीन मानचित्र प्रकाशित किया था; यह जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश के रूप में दर्शाता है। इसी मानचित्र में कालापानी को भी भारतीय क्षेत्र के रूप में दर्शाया गया है।
  • नेपाल के विदेश मंत्रलय के अनुसार, सुगौली संधि (वर्ष 1816) के तहत काली (महाकाली) नदी के पूर्व के सभी क्षेत्र, जिनमें लिम्पियाधुरा (Limpiyadhura), कालापानी (Kalapani) और लिपुलेख (Lipulekh) शामिल हैं, नेपाल का अभिन्न अंग हैं। भारत के अनुसार, यह क्षेत्र उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले का हिस्सा है, जबकि नेपाल इस क्षेत्र को धारचूला जिले का हिस्सा मानता है।

भारत- भूटान

असम, पश्चिम बंगाल, अरुणाचल प्रदेश एवं सिक्किम

कुल सीमा = 699 किमी.

  • सीमा विवाद जैसे कि हाल में उठा डोकलाम मुद्दा जिसकी चिकन नेक से निकटता खतरे को बढ़ाती है।
  • उग्रवाद- बोडो, ULFA आदि विभिन्न समूह शरण के लिए भूटान में छिप जाते हैं। हालांकि भूटान की सेना द्वारा उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाती है।
  • भूटानी भांग (कैनाविस), शराब और वन उत्पादों जैसी वस्तुओं की तस्करी।

भारत- म्यांमार

अरुणाचल प्रदेश (520 किमी.), नागालैंड (215 किमी.), मणिपुर (398 किमी.) और मिजोरम (510 किमी.)

कुल सीमा = 1,643

  • मुक्त आवागमन व्यवस्था (FMR): उग्रवादियों द्वारा म्यांमार से आवागमन तथा प्रशिक्षण एवं हथियार प्राप्त करने के लिए FMR का दुरुपयोग किया जाता है।
  • स्वर्ण त्रिभुज (golden triangle) के निकट होने के कारण मादक पदार्थों की तस्करी।
  • कमजोर सीमाएं, क्योंकि कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए सीमा के साथ बाड़ या सीमा चौकियों एवं सड़कों के रूप में व्यावहारिक रूप से कोई भौतिक अवरोध नहीं है।
  • मोरेह और जोखावतर, जो कि सामान्य व्यापार और सीमा व्यापार के लिए दो निर्दिष्ट बिंदु हैं, में निम्नस्तरीय अवसंरचनात्मक सुविधाएं।