सुप्रीम कोर्ट की 5 न्यायाधीशों की संविधान पीठ सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लिए 10% आरक्षण का प्रावधान करने वाले 103वें संविधान संशोधन अधिनियम को वैध माना है।
आरोपः याचिकाकर्ताओं ने इस संशोधन को इस आधार पर भी चुनौती दी है कि यह इंद्रा साहनी मामले में सुप्रीम कोर्ट के 1992 के फैसले का उल्लंघन करता है। इंद्रा साहनी मामले में अदालत ने मंडल रिपोर्ट को बरकरार रखते हुए आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत निर्धारित की थी।
वैधता के पक्षः आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को दस प्रतिशत आरक्षण दिए जाने संबंधी कानून भेदभावपूर्ण नहीं है तथा यह कानून बुनियादी ढांचे या समानता के सिद्धांत का उल्लंघन नहीं करता है साथ ही, इस प्रावधान से 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण देने की सीमा का उल्लघंन नहीं हो रहा है, क्योंकि क्रीमी लेयेर की सीमा भी आर्थिक आधार पर तय की गई है।
103वें संविधान संशोधन के तहत किये गए प्रावधान
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