निवारक निरोध का प्रयोग

सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार निवारक निरोध का प्रयोग केवल असाधारण परिस्थितियों में किया जाना चाहिए, क्योंकि यह राज्य को प्राप्त एक असाधारण शक्ति है तथा यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्रभावित करती है, इसलिए इसका संयमित प्रयोग किया जाना चाहिए।

  • राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की भारत में अपराध रिपोर्ट 2021 के अनुसार भारत मे 1.1 लाख से अधिक लोगों को प्रिवेंटिव डिटेंनशन के तहत हिरासत में में रखा गया था, जो 2017 के बाद सबसे अधिक है।
  • सीआरपीसी की धारा 151 के अनुसार, यदि पुलिस को लगता है कि किसी संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए निवारक निरोध के तहत गिरफ्रतारी करना आवश्यक है, तो उसे ऐसा करने का अधिकार है। 2018-2020 तक राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत सभी डिटेंशन ऑर्डर्स में से 78.33% गलत पाए जाते हैं।