कानून और व्यवस्था के उल्लंघन की संभावित आशंका और निवारक निरोध

हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने ‘बांका स्नेहाशीला बनाम तेलंगाना राज्य’ वाद में यह निर्णय दिया है कि कानून और व्यवस्था के उल्लंघन की संभावित आशंका, निवारक निरोध (Preventive Detention) का आधार नहीं हो सकती है ।

  • ‘कानून और व्यवस्था’ के उल्लंघन की संभावित आशंका के आधार पर निवारक निरोध के उपबंध को लागू नहीं किया जा सकता है।
  • एक निवारक निरोध आदेश केवल तभी पारित किया जा सकता है, जब बंदी के कारण सार्वजनिक व्यवस्था के रख-रखाव पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना हो।
  • ‘लोक व्यवस्था के उल्लंघन’ और इसे प्रभावित करने वाले मामले, बहुसंख्यक जनता को प्रभावित करते हैं, जबकि इसके विपरीत ‘कानून और व्यवस्था के उल्लंघन में कम गंभीर प्रकृति वाले मामले शामिल होते हैं।

निवारक निरोध अनुच्छेद 21 (विधि की सम्यक प्रक्रिया (Due process of law)) के दायरे अंतर्गत होना चाहिए तथा यह अनुच्छेद 22 (मनमाने ढंग से गिरफ्रतारी और निरोध के विरुद्ध सुरक्षा) के साथ सुसंगत होना चाहिए।