यह कानून भारत की संप्रभुता और एकता को खतरे में डालने वाली गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से बनाया गया था, जिसे वर्ष 2004, 2008 और 2012 में संशोधन किया जा चुका है।
गैर-कानूनी गतिविधियों से तात्पर्य उन कार्यवाहियों से है, जो किसी व्यक्ति/संगठन द्वारा देश की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता को भंग करने वाली गतिविधियों को बढ़ावा देती है।
यह कानून संविधान के अनुछेद-19 द्वारा प्रदत वाक् व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शस्त्रें के बिना एकत्र होने के अधिकार और संघ बनाने के अधिकार पर युक्तियुक्त प्रतिबंध आरोपित करता है।
राष्ट्रीय एकता परिषद द्वारा नियुक्त राष्ट्रीय एकता और क्षेत्रवाद पर समिति ने उपरोक्त मौलिक अधिकारों पर युक्तियुक्त प्रतिबंध लगाने का अनुमोदन किया।