जस्टिस रोहिणी आयोग 2017: संविधान के अनुच्छेद-340 के तहत केंद्र सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के उप-श्रेणीकरण हेतु इस आयोग का गठन किया था।
मेजर जनरल एस- आर- सिन्हो आयोग 2006: इस आयोग ने 22 जुलाई, 2010 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की तथा सामान्य जातियों के गरीब लोगों को भी सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण देने की सिफारिश की थी। केंद्र सरकार द्वारा अनारक्षित वर्ग के नागरिकों को 10% आरक्षण देने का फैसला सिन्हो आयोग की रिपोर्ट के आधार पर किया गया है।
जस्टिस राम नंदन प्रसाद समिति 1992: इस समिति का गठन ओबीसी के मध्य क्रीमी लेयर की पहचान करने हेतु किया गया था। 1993 में उनकी रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया गया और क्रीमीलेयर व्यवस्था को शुरू किया गया।
सत्तनाथन आयोग 1971: यह आयोग भी क्रीमी लेयर से संबंधित था, जिसने निर्देश दिया था कि “मलाईदार परत (creamy layer)” को सरकारी पदों के आरक्षण (कोटा) से बाहर रखा जाना चाहिए।
कालेलकर आयोग 1953: इसका उद्देश्यः सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग की स्थिति का मूल्यांकन करना।