डीप-सी माइनिंग सिस्टम

जनवरी 2022 में, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों द्वारा 5,270 मीटर की गहराई पर डीप-सी माइनिंग सिस्टम का परीक्षण किया गया। यह सीबेड क्रॉलर (seabed crawler) आधारित खनन मशीन का सबसे गहरे पानी में परीक्षण है।

मुख्य बिंदुः अनुसंधान पोत ओआरवी सागर निधि (ORV Sagar Nidhi) पर इस डीप-सी माइनिंग सिस्टम को स्थापित किया गया है।

  • वर्तमान परीक्षण मध्य हिंद महासागर (Central Indian Ocean Basin) में भारतीय तट से लगभग 1,700 समुद्री मील (लगभग 3,000 किमी) की दूरी पर की गई।
  • प्रयोग में लाए गए सीबेड क्रॉलर मशीन का विकास भारत में स्वदेशी रूप से किया गया है तथा इसका वजन 8 टन है।
  • सीबेड क्रॉलर मशीन, वराह गहरे समुद्र में खनन प्रौद्योगिकी (Varaha deep sea mining technology) का मुख्य घटक है।
  • इस समुद्री खनन प्रौद्योगिकी का विकास 6 किमी की गहराई से पॉलीमेटेलिक नोड्यूल के निष्कर्षण के लिए किया गया है। यह भारत सरकार के महत्वाकांक्षी ‘डीप ओशन मिशन’ का हिस्सा है।

महत्वः यह भारत को मध्य हिंद महासागर बेसिन (Central Indian Ocean Basin - CIOB) में संसाधनों का दोहन करने की क्षमता विकसित करने में सक्षम बनाएगी।

  • यह रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके माध्यम से हिंद महासागर में भारत की उपस्थिति को बढ़ेगी।
  • मध्य हिंद महासागर बेसिन क्षेत्र में लोहा, मैंगनीज, निकल और कोबाल्ट जैसी धातुओं के भण्डार पॉलीमेटेलिक नोड्यक्कूल के रूप में पाए जाते हैं।