समुद्रयान मिशन

समुद्रयान भारत का प्रथम मानवयुक्त महासागर मिशन है, जिसका उद्देश्य उप-समुद्री गतिविधियों को कार्यान्वित करने हेतु उच्च स्तरीय प्रौद्योगिकी एवं वाहनों के द्वारा महासागर पारिस्थितिकी को बेहतर ढंग से समझने के उद्देश्य से प्रारंभ किया गया है।

सामयिकता की रक्षाः समुद्रयान मिशन की अनुमानित समयावधि 2020-2021 से 2025-2026 की अवधि के लिए पांच वर्ष है।

महत्वः मानवयुक्त निमज्जनीय वैज्ञानिक कर्मियों को प्रत्यक्ष अंतःक्षेप द्वारा अनन्वेषित गहरे समुद्र के क्षेत्रों को देखने एवं समझने की अनुमति प्रदान करेगा।

  • इसके अतिरिक्त, यह गहरे समुद्र में मानव अनुमत वाहन विकास की क्षमता को बढ़ाएगा।

मूल मिशनः समुद्र मिशन को 6,000 करोड़ रुपये के डीप ओशन मिशन के हिस्से के रूप में लागू किया जा रहा है।

राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी/एनआईओटी), जो एमओईएस के तहत एक स्वायत्त संस्थान है, को समुद्रयान मिशन से संबंधित विभिन्न तकनीकों को विकसित करने का उत्तरदायित्व सौंपा गया है।

प्रौद्योगिकी का विकासः राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईओटी) ने गहरे समुद्र की खोज के लिए 6,000 मीटर गहराई से रेटेड रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (आरओवी) एवं महासागरों के नीचे विभिन्न उपकरण विकसित किए हैं, जैसे-

  • स्वायत्त कोरिंग सिस्टम (ऑटोनॉमस कोरिंग सिस्टम/ACS),
  • स्वायत्त जलमग्न वाहन (ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल/एयूवी) एवं गहन समुद्र खनन प्रणाली (डीप सी माइनिंग सिस्टम/DSM)।