केंद्र राज्य वित्तीय संबंधों से संबंधित संवैधानिक प्रावधान
भारतीय संविधान के भाग 12 में अनुच्छेद 268 से 293 तक केंद्र- राज्य वित्तीय संबंधों की चर्चा की गई है।
संविधान का अनुच्छेद 275 संसद को इस बात का अधिकार प्रदान करता है कि वह ऐसे राज्यों को उपयुक्त सहायक अनुदान देने का उपबंध कर सकती है जिन्हें संसद की दृष्टि में सहायता की आवश्यकता है।
अनुच्छेद 286, 287, 288 तथा 289 में केंद्र तथा राज्य सरकारों को एक-दूसरे द्वारा कुछ वस्तुओं पर कर लगाने से मना किया गया है और उन्हें कुछ करों से भी मुक्ति प्रदान की गई है।
संविधान के अनुच्छेद 292 तथा 293 क्रमशः संघ तथा राज्य सरकारों को शरण लेने का अधिकार भी प्रदान करते हैं।
संविधान का अनुच्छेद 265 यह प्रबंध करता है कि विधि के प्राधिकार के बिना कोई कर शपथ या संग्रहीत नहीं किया जा सकता।
अनुच्छेद 266 में संचित निधि एवं अनुच्छेद 267 में आकस्मिक निधि का प्रावधान है। अनुच्छेद 280 में वित्त आयोग का प्रबंध किया गया है।
अनुच्छेद 274 यह अपेक्षा करता है कि ऐसे कराधान पर प्रभाव डालने वाले विधेयकों, जिनसे राज्य का हित जुड़ा हो, के बारे में राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश आवश्यक होगी।