नवतेज सिंह जौहर बनाम भारत संघ (2018)

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 377 के कुछ हिस्सों को हटाकर समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था। इनमें वे प्रावधान शामिल थे, जिन्हें LGBTIQ समुदाय के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन माना जाता था।इस वाद में सर्वाेच्च न्यायालय ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 14 LGBTIQ+ समुदाय को कानून के समक्ष समानता की गारंटी प्रदान करता है।