ट्रांसजेंडर व्यक्ति से संबंधित अन्य परिभाषा

सर्वाेच्च न्यायालय ने फैसला दिया था कि अपने लिंग की स्वयं पहचान करने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा और स्वायत्तता के अधिकार का ही एक हिस्सा है; लेकिन अगर किसी व्यत्तिफ़ की हकदारी की पात्रता साबित करनी है तो उस व्यत्तिफ़ के लिंग को निर्धारित करने के लिए वस्तुनिष्ठ मानदंड की जरूरत पड़ सकती है।

  • सुप्रीम कोर्ट (2014): ऐसे व्यत्तिफ़ जिनकी लिंग पहचान उनके बायोलॉजिकल सेक्स से मेल नहीं खाती।
  • एक्सपर्ट कमिटी (2014): ऐसे व्यत्तिफ़ जिनकी लिंग अनुभूति जन्म के समय नियत लिंग से मेल नहीं खाती। वे अपने लिंग को विभिन्न शब्दों और नामों से अभिव्यत्तफ़ करते हैं।
  • प्राइवेट मेंबर बिल (2014): ऐसे व्यत्तिफ़ जिनकी लिंग अनुभूति जन्म के समय नियत लिंग से मेल नहीं खाती। इसमें ट्रांस मेन, ट्रांस विमेन, लिंग विलक्षणताओं वाले व्यत्तिफ़ और सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान वाले व्यत्तिफ़ शामिल हैं।
  • सरकार का बिल (2016): ऐसे व्यत्तिफ़ जो कि (i) न तो पूरी तरह से महिला है और न ही पुरुष, (ii) महिला और पुरुष, दोनों का संयोजन हैं, या (iii) न तो महिला है और न ही पुरुष और जिनकी लिंग अनुभूति जन्म के समय नियत लिंग से मेल नहीं खाती। इसमें ट्रांस मेन, ट्रांस विमेन, इंटरसेक्स भिन्नताओं और लिंग विलक्षणताओं वाले व्यत्तिफ़ शामिल हैं।