सर्वाेच्च न्यायालय ने फैसला दिया था कि अपने लिंग की स्वयं पहचान करने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा और स्वायत्तता के अधिकार का ही एक हिस्सा है; लेकिन अगर किसी व्यत्तिफ़ की हकदारी की पात्रता साबित करनी है तो उस व्यत्तिफ़ के लिंग को निर्धारित करने के लिए वस्तुनिष्ठ मानदंड की जरूरत पड़ सकती है।