राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण बनाम भारत संघ

वर्ष 2014 में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) बनाम भारत संघ के मामले में एक ऐतिहासिक फैसला देते हुए सर्वाेच्च न्यायालय ने ट्रांसजेंडर व्यत्तिफ़यों के अधिकारों और उनकी लैंगिक पहचान के बारे में निर्णय लेने के उनके अधिकार को मान्यता दी।

  • इस निर्णय ने नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में ट्रांसजेंडरों के लिये आरक्षण की सिफारिश की तथा सेक्स रिअसाइनमेंट सर्जरी (Sex Ressaignment Surgery) के बिना स्वयं के कथित लिंग की पहचान का अधिकार प्रदान किया।
  • न्यायालय ने इस बात को मान्यता दी कि ट्रांसजेंडर व्यत्तिफ़यों को पुरुष, महिला या तीसरे लिंग के रूप में स्वयं को पहचान करने का अधिकार है।
  • इसके अतिरित्तफ़ न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि वे ट्रांसजेंडर व्यत्तिफ़यों को कानूनी मान्यता प्रदान करें, सामाजिक लांछन और भेदभाव जैसी समस्याओं का हल करें और उनके सामाजिक कल्याण के लिए योजनाएं तैयार करें।
  • ‘राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण’ (NALSA) का निर्णय अनुच्छेद-14, 15 और 21 के तहत ट्रांसपर्सन को संवैधानिक संरक्षण प्रदान करते हुए राज्यों को उनके कानूनी और सामाजिक-आर्थिक अधिकारों पर नीतियां बनाने का निर्देश देता है।