सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार अगर बिना मर्जी के बने संबंधों के चलते कोई विवाहित महिला गर्भवतीहोती है तो इसे मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट यानि MTP के तहत बालात्कारमाना जाएग|
प्रभाव
"मैरिटल रेप" :इसका आशय पत्नी की सहमति के बगैर उसे यौन संबंध बनाने के लिये विवश करने से है।नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के NHFS-5 के अनुसार 35% महिलाओं ने उनके पतियों द्वारा स्वयं पर होने वाली शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक हिंसा को स्वीकार किया है।
कानूनी प्रावधान
धारा 375: बलात्कार की परिभाषा में वैवाहिक बलात्कार को एक आपराधिक अपराध के रूप में शामिल नहीं किया गया है।
इंडिपेडेंट थॉट बनाम यूनियन ऑफ इंडिया 2018 ;- माननीय सुप्रीम कोर्ट ने पत्नी की आयु 18 वर्ष मानी है |
पॉक्सो अधिनियम: वैवाहिक बलात्कार एक प्रकार की घरेलू हिंसा है। इस कानून के तहत कोई महिला अदालत में वैवाहिक बलात्कार के लिए अपने पति से न्यायिक अलगाव की मांग कर सकती है।
आईपीसी की धारा 376-A : इसके तहत न्यायिक रूप से अलग हुई पत्नी के साथ बलात्कार को अपराध घोषित किया गया था।
घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम 2005 - यौन दुर्व्यवहार के आधार पर मजिस्ट्रेट के समक्ष पिटीशन फाइल कर सकती है, परंतु पति को प्रोटेक्शन ऑर्डर के उलंघन पर ही होगी।
न्यायमूर्ति वर्मा समिति : निर्भया गैंगरेप मामले में गठित और 2013 में महिलाओं के खिलाफ भेदभाव के उन्मूलन पर संयुक्त राष्ट्र समिति (सीईडीएडब्ल्यू) ने भी सिफारिश की थी कि भारत सरकार को वैवाहिक बलात्कार का अपराधीकरण करना चाहिए।
पक्ष में तर्क
चुनौतियाँ
आगे की राह