हिन्द महासागर क्षेत्र

हिंद महासागर दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा महासागर तथा पृथ्वी की सतह पर उपस्थित जल का लगभग 20 प्रतिशत भाग को समाहित करता है। इसके उत्तर में भारतीय उपमहाद्वीप से, पश्चिम में पूर्व अफ्रीका, पूर्व में चीन, सुंडा द्वीप समूह और ऑस्ट्रेलिया तथा दक्षिण में दक्षिण ध्रुवीय महासागर है। यह भारत को दक्षिण-एशिया, दक्षिण पूर्व एशिया, अफ्रीका, पश्चिम एशिया और ओशिनिया तक पहुंच प्रदान करता है।

  • यह क्षेत्र विश्व के कुल अपतटीय तेल उत्पादन का 40% से अधिक का उत्पादन करता है तथा यह क्षेत्र मत्स्य उत्पादन का लगभग 15% का योगदान करता है। विश्व का 80% से अधिक समुद्र मार्ग से होने वाला व्यापार हिन्द महासागर से किया जाता है। यह क्षेत्र होर्मुज, मलक्का तथा वाव अल मंदेब जैसे जल संधियों का क्षेत्र है, जो सामरिक और व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स की नीति में शामिल बंदरगाहः हिन्द महासागर का क्षेत्र वर्तमान समय में वैश्विक रूप से सबसे ज्यादा सामरिक महत्व का क्षेत्र बन चुका है। चीन की इस क्षेत्र में बढ़ती सक्रियता तथा भारत को स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स की नीति से इस क्षेत्र में घेरने की कोशिश ने प्राकृतिक संसाधनों और सामरिक रूप से समृद्ध इस क्षेत्र की महत्ता को और बढ़ा दिया है। ‘विश्व का सर्वाधिक सामरिक व सशस्त्र संघर्ष वाला क्षेत्र हिंद महासागर ही है।

  • चीन ने इस नीति के तहत पाकिस्तान (ग्वादर), श्रीलंका (हंबनटोटा और कोलंबो), बांग्लादेश (चटगांव) और बर्मा (सितवे और क्यौकप्यू) में बंदरगाह का निर्माण किया है।