इसकी स्थापना नवंबर 1993 में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त निकाय के रूप में की गई थी।
उद्देश्यः इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय अनन्य आर्थिक क्षेत्र, जो भारत के भूमि क्षेत्र का लगभग दो-तिहाई हिस्सा है, के निर्जीव एवं सजीव संसाधन के उपयोग से संबंधित विभिन्न प्रौद्योगिकी समस्याओं को सुलझाने के लिये विश्वसनीय देशी तकनीक विकसित करना है।