तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति

हाल ही में, सर्वोच्च न्यायालय ने सहमति व्यक्त की है कि ‘उच्च न्यायालयों में लंबित मामलों को निपटाने हेतु तदर्थ आधार पर सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को नियुक्त करने की योजना’, नियमित न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया को रोकने या इसे आगे बढ़ाने का बहाना नहीं बनना चाहिए। किसी राज्य के उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश किसी भी समय, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से, उसी उच्च न्यायालय अथवा किसी अन्य उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में कार्य कर चुके किसी व्यक्ति से राज्य के उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में कार्य करने का अनुरोध कर सकता है।

  • इस प्रकार नियुक्त किये गए न्यायाधीश को राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित भत्ते प्रदान किये जाएंगे। उसके लिए उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के सभी अधिकारिता, शक्तियां और विशेषाधिकार प्राप्त होंगे, किंतु उसके लिए उस उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नहीं माना जाएगा। 224A के अंतर्गत तहत संविधान में तदर्थ न्यायाधीशों (ad-hoc-judges) की नियुक्ति संबंधी प्रावधान किये गए हैं।