स्वस्थ पर्यावरण का अधिाकार

पर्यावरण का अधिकार एक ऐसा अधिकार है, जिसके बिना व्यक्ति का विकास और उसकी पूर्ण क्षमता का उपयोग संभव नहीं होगा।

  • तेजी से बढ़ता जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता का नुकसान और व्यापक जहरीला प्रदूषण, प्रतिवर्ष 90 लाख लोगों की मौत का कारण बन रहा है। दुनिया भर में, अरबों लोगों के पास अब भी साफ पानी या पर्याप्त पानी नहीं है।
  • इसी को ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने हाल ही में एक प्रस्ताव पारित किया, जो स्वस्थ पर्यावरण को मानव अधिकार के रूप में मान्यता देता है। इस प्रस्ताव के अनुसार स्वच्छ, स्वस्थ और सतत पर्यावरण का अधिकार मानव अधिकार बन गया है। भारत ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। यह कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है।

भारत में संवैधानिक प्रावधान

  • पर्यावरण संरक्षण के लिए भाग III के अनुच्छेद 21, 14 और 19 का उपयोग किया गया है।
  • अनुच्छेद 21: जीवन का अधिकार (स्वच्छ वातावरण, रोग मुक्त)।
  • अनुच्छेद 48एः पर्यावरण की रक्षा और वनों एवं वन्य जीवों की रक्षा।
  • अनुच्छेद 51-ए(जी): प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार करने का कर्तव्य।

चुनौतियां

  • तीव्र आर्थिक विकास के लिये अंधाधुंध औद्योगीकरण और शहरीकरण, जिसमें पर्यावरणीय गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है।
  • अनियंत्रित उत्खनन और पहाड़ी ढलानों की अवैज्ञानिक तरीके से कटाई।
  • ऊर्जा और बिजली जैसी सेवाओं की सब्सिडी-युक्त प्रकृति उनके अति प्रयोग की ओर ले जाती है और पर्यावरणीय संवहनीयता को कमजोर करती है।
  • बढ़ती हुई जनसंख्या अविकास और पर्यावरणीय क्षरण के बीच के समस्याजनक संबंधों को और मजबूत करती है।
  • निर्धनता के कारण प्रवासन को बढ़ावा, जो शहरी क्षेत्रें को पर्यावरण की दृष्टि से अस्थिर या असंवहनीय बनाता है।