मानव जीनोम एडिटिंगः डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट

जुलाई, 2021 को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा दो रिपोर्ट जारी की गई। इन दोनों रिपोर्टों में मानव जीनोम एडिटिंग के लिए उपयुक्त संस्थागत, राष्ट्रीय, क्षेत्रीय तथा वैश्विक शासन तंत्र की स्थापना से संबन्धित सलाह और सिफारिशें की गई हैं।

  • दिसंबर 2018 में WHO ने मानव जीनोम एडिटिंग (human genome editing) से जुड़ी वैज्ञानिक, नैतिक, सामाजिक और कानूनी चुनौतियों की जांच करने के लिए एक वैश्विक, बहु-विषयक विशेषज्ञ) सलाहकार समिति (the WHO Expert Advisory Committee on Developing Global Standards for Governance and Oversight of Human Genome Editing) का गठन किया था। इसका उद्देश्य मानव जीनोम एडिटिंग के विभिन्न पहलुओं पर उपयुक्त सिफारिशें करना है।

जीनोम एडिटिंग

  • जीनोम, किसी जीव के डीएनए (DNA) का संपूर्ण सेट होता है, जिसमें उसके जीन संबंधी सभी विशेषताएं शामिल होती हैं। जीनोम एडिटिंग अथवा जीन एडिटिंग से तात्पर्य उन विधियों से है, जो वैज्ञानिकों को किसी जीव के डीएनए में बदलाव करने में सक्षम बनाती हैं।
  • जीनोम एडिटिंग के लिए वैज्ञानिकों द्वारा कई तकनीकों को अपनाया जाता है, जिनके माध्यम से विशिष्ट बिंदुओं पर डीएनए को काटकर उन्हें अन्य विशेषताओं वाले डीएनए के खंडों के साथ जोड़ा जाता है अथवा प्रतिस्थापित किया जाता है।
  • मानव जीनोम संपादन के संभावित लाभों में आनुवंशिक विकारों के निदान उपचार बांझपन का इलाज, रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा देने तथा टीके के विकास में मदद आदि शामिल हैं।