भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समुद्री खनन को विनियमित करने के लिए वर्ष 1982 में एक स्वायत्त अंतरराष्ट्रीय संगठन के रूप में अंतरराष्ट्रीय समुद्री प्राधिकरण की स्थापना की गई।

  • इसे समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCLOS) के तहत स्थापित किया गया था।
  • यह संगठन गहरे समुद्री क्षेत्रों में खनन कार्य के लिए देशों को क्षेत्रों का आवंटन करता है।
  • मध्य हिंद महासागर बेसिन की भांति प्रशांत महासागर के केंद्रीय भागों में भी इसी प्रकार के पॉलीमेटॉलिक नोड्यूल क्षेत्र की खोज की गई है, जिसे क्लेरियन-क्लिपर्टन जोन (Clarion-Clipperton Zone) के नाम से जाना जाता है।
  • आर्थिक रूप से व्यवहार्य तथा लाभकारी होने के कारण गहरे समुद्री खनन संबंधित गतिविधियों में अनेक देश इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं।
  • इनमें चीन, फ्रांस, जर्मनी, जापान, दक्षिण कोरिया, रूस तथा कुछ छोटे द्वीप जैसे कुक आइलैंड्स, किरिबाती शामिल हैं।

भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र

भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (Indian National Centre for Ocean Information Services-INCOIS) भारतीय सुनामी प्रारंभिक चेतावनी केंद्र (Indian Tsunami Early Warning Centre- ITEWC) की भारत को सुनामी संबंधित सलाह/सूचना देने हेतु नोडल एजेंसी है।

  • भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र की स्थापना वर्ष 1999 में पृथ्वी विज्ञान मंत्रलय के अंतर्गत एक स्वायत्त निकाय के रूप में की गई थी और यह पृथ्वी प्रणाली विज्ञान संगठन की एक इकाई है।
  • INCOIS, UNESCO-IOC द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारी वाले सुनामी सेवा प्रदाताओं के रूप में, हिंद महासागर क्षेत्र (25 देशों) को सुनामी संबंधी सलाह/सूचना भी प्रदान करता है।