विजय मदनलाल चौधारी बनाम भारत संघ वाद

इस वाद में उच्चतम न्यायालय द्वारा की गई प्रमुख टिप्पणियां निम्नलिखित हैं-

  • धन-शोधन जघन्य अपराधों में से एक है। यह न केवल राष्ट्र के सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने को प्रभावित करता है, बल्कि अन्य जघन्य अपराधों को भी बढ़ावा देता है।
  • PMLA अधिनियम के तहत जमानत की कठोर शर्तें वैध हैं और ये मनमानी शर्तें नहीं हैं। जमानत हेतु PMLA की धारा 45 में ‘दोहरी शर्तें’ निर्धारित की गई हैं।
  • न्यायालय ने पूर्व में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय को नजरअंदाज कर दिया। पूर्व निर्णय में जमानत हेतु दोहरी शर्तों को यह मानते हुए अवैध घोषित कर दिया गया था कि वे संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन हैं।
  • ED के अधिकारी जो PMLA अधिनियम के अनुसार धन-शोधन से संबंधित मामलों की जांच करते हैं, वे फ्पुलिस अधिकारीय् नहीं हैं। इसलिए, म्क् के अधिकारियों द्वारा PMLA अधिनियम की धारा 50 के तहत, अपराध के अभियोग की जांच करते समय जो बयान दर्ज किया जाता है, वह संविधान के अनुच्छेद 20(3) (आत्म-दोषारोपण के खिलाफ अधिकार) से प्रभावित नहीं होता है।
  • उच्चतम न्यायालय ने PMLA की धारा 5 को उचित ठहराया है, जो संपत्ति की अनंतिम कुर्की से संबंधित है।
  • उच्चतम न्यायालय ने PMLA की धारा 5 को उचित ठहराया है, जो संपत्ति की अनंतिम कुर्की से संबंधित है।