भूटान पर चीन की निगाह

चीन अपने दक्षिणी पड़ोसी भूटान के साथ संबंधों को औपचारिक रूप देने के लिये उत्सुक है। चीन एकमात्र ऐसा देश है, जिसके साथ भूटान का अभी भी कोई औपचारिक संबंध नहीं है।

  • चीन द्वारा तिब्बत को अपने कब्जे में लेने के कारण भूटान-भारत औपचारिक संबंधों में मजबूती आई।
  • चीन और भूटान के बीच सीमा विवाद भी है। चीन चाहता है कि सीमा विवाद को सुलझाने में भारत की कोई भूमिका न हो, लेकिन भूटान ने साफ कर दिया था कि इस संबंध में जो भी बात होगी, वह भारत की मौजूदगी में होगी।
  • भारत और भूटान के बीच हुई ऐतिहासिक संधि चीन को हमेशा खटकती रही है। चीन और भूटान के बीच पश्चिम तथा उत्तर में करीब 470 किलोमीटर लंबी सीमा है।
  • दूसरी तरफ, भारत और भूटान की सीमा पूर्व पश्चिम तथा दक्षिण में 605 किलोमीटर है। इसमें कोई संदेह नहीं कि भूटान में भारतीय सैनिकों की मौजूदगी रही है और भूटान की सेना को भारत ट्रेनिंग देने के साथ फंड भी मुहैया कराता है।
  • भारत, भूटान की सुरक्षा के साथ-साथ अपनी सुरक्षा भी करता है। चीन के इरादे हमेशा से ही अच्छे नहीं रहे हैं। कुछ साल पहले ऐसा माना जाने लगा था कि 1948 में माओ ने जिस तरह तिब्बत को अपने कब्जे में लिया, चीन उसी तरह भूटान पर भी कब्जा कर लेगा।
  • चीन की सीमा भूटान से लगने के कारण चीन हमेशा भूटान के उपर दबाव डालता है। चीन के साथ 14 देशों की सीमाएँ मिलती हैं। इन 14 देशों में 12 देशों के साथ चीन ने सीमा निर्धारित कर ली है। केवल दो देश भारत और भूटान के साथ सीमा निर्धारित नहीं है, क्योंकि उसका इरादा है कि मौका मिलते ही इन पर दबाव बनाया जा सके।