दक्षिणी-पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संघ (आसियान)

इसकी स्थापना पांच संस्थापक सदस्यों इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर और थाईलैण्ड द्वारा आसियान घोषणा (बैंकाक घोषणा) पर 8 अगस्त, 1967 को हस्ताक्षर किये जाने के पश्चात हुआ। यह हस्ताक्षर थाईलैण्ड में किया गया था। बाद में 7 जनवरी, 1994 को ब्रुनई, 1995 को वियतनाम, 23 जुलाई, 1997 को लाओस एवं म्यांमार और 30 अप्रैल, 1999 को कंबोडिया आसियान का सदस्य बना। इसका सचिवालय इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में है। इसका आदर्श वाक्य वन विजन, वन आइडेंटिटी, वन कम्युनिटी (One Vision, One Identity, One Community) है।

  • इसके वर्तमान में 10 सदस्य देश इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमार तथा कंबोडिया हैं।
  • इसका उद्देश्य दक्षिण-पूर्व एशिया में आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को तेज करने के लिए किया गया था। इसका घोषित उद्देश्य क्षेत्रीय शांति और स्थायित्व सुनिश्चित करना है।

भारत और आसियानः भारत आसियान सम्बंध की वास्तविक शुरुआत 1991 में आसियान द्वारा भारत को क्षेत्रक वार्ता भागीदार का दर्जा प्रदान किये जाने के पश्चात हुआ है। वर्ष 2002 में कम्बोडिया में आसियान भारत सम्मेलन हुआ, जिसके बाद आसियान-भारत सम्बंध एक नई उच्चता की ओर बढ़ा। उसके बाद से ही भारत आसियान संबंध शिखर वार्ता वार्षिक आधार पर होने लगा।

  • भारत-आसियान रिश्तों की नींव वर्ष 1992 में पड़ी, जब प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने पूर्वी एशियाई और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ आर्थिक और व्यापारिक संबंध को बेहतर करने के उद्देश्य से ‘लुक ईस्ट पॉलिसी’ को अपनाया।
  • Commerce, Culture and Connectivity आसियान के साथ भारत की मजबूत साझेदारी के तीन स्तम्भ हैं। भारत मुख्यतया दो बिन्दुओं, व्यापार तथा समुद्री सुरक्षा। पर आसियान के साथ साझेदारी की चाह रखता है। भारत आसियान के बीच मुफ्रत व्यापार संधि 2009 में हुई।