Question : ‘‘समसामयिक संगठनात्मक थियोरी, संगठनात्मक पारिस्थितिकी के मुकाबले चैस्टर बर्नार्ड की फंक्शन्स ऑफ द ऐग्जिक्यूटिव से ज्यादा दूर स्थित प्रतीत होती है।’’ बर्नार्ड के विचारों में, पारिस्थितिकीय तत्वों के प्रकाश में, इस कथन का परीक्षण कीजिए।
(2015)
Answer : व्यवस्था उपागम एक व्यापक उपागम है, जिसमें संकुचित परिपेक्ष्य में चीजों को देखने की आम कमी नहीं रहती। असफल जोर समूचे व्यक्ति और कुल संगठन पर रहता है। व्यवस्था सिद्धान्त किसी संगठन का विभिन्न भागों में अलग-अलग अध्ययन करने के बजाय प्रबंधकों को ऐसा दृष्टिकोण प्रदान करता है कि वे संगठन को समूचे रूप में और बड़े तथा बाहरी वातावरण के भाग के रूप में देखें।
व्यवस्था सिद्धान्त से यह भी पता चलता है कि किसी ....
Question : ‘‘स्वैच्छिक संगठन सरकारी अभिकरणों के संवेदीकरण के औजार बन गये हैं।’’ टिप्पणी कीजिए।
(2014)
Answer : स्वैच्छिक संगठन व्यक्तियों का एक ऐसा संगठन है जो किसी निश्चित उद्देश्य की पूर्ति हेतु स्वैच्छिक रूप से कोई समझौता करता है जैसे- वाणिज्य संगठन, मजदूर संघ या पर्यावरण संगठन आदि। इसकी सदस्यता आवश्यक रूप से स्वैच्छिक नहीं होती है क्योंकि यह समान हित वाले लोगों का एक संगठन होता है जो किसी पूर्व निर्धारित हितों/उद्देश्यों के लिए एकजुट होकर कार्य करते हैं। अलग-अलग उद्देश्य के आधार पर गठित स्वैच्छिक संगठन किसी भी समाज के ....
Question : संगठनात्मक डिजाइन की ‘रणनीति आकस्मिकता थियोरी’ उप-इकाई केन्द्रीयता और अ-प्रतिस्थापनीयता (नॉन सब्सिटट्यूटेनबिलिटी) से पैदा होने वाली समस्याओं से किस प्रकार निपटती है?
(2014)
Answer : संगठनात्मक डिजाइन की रणनीतिक आकस्मिकता थ्योरी कहती है कि संगठन परस्पर निर्भर उप इकाईयों का एक संगठन है, जिसमें शक्ति का विभाजन कार्य के आधार पर होता है। इसमें शक्ति के व्यक्तिगत उर्ध्वाधर वितरण की जगह, शक्ति का हस्तांतरण उप इकाईयों का होता है जो अपने आप में विश्लेषण की इकाइयां होती हैं। यहां समस्या उठती है कि इन उपइकाई केंद्रीयता और अ-प्रतिस्थापनीयता से जो समस्या उठती है उसका समाधान इसमें किस प्रकार होता है? ....
Question : मान लीजिए कि भारत सरकार जंगलों से घिरी हुई और नृजातीय समुदायों से बसी हुई एक पर्वत घाटी में एक बांध का निर्माण करने पर विचार कर रही है। सम्भाव्य अनिश्चितताओं और अप्रत्याशित आकस्मिकताओं का सामना करने के लिए, उसको नीति विश्लेषण के किन तर्कसंगत तकनीकों का आश्रय लेना चाहिए?
(2013)
Answer : यहां नीति विश्लेषण के तर्कसंगत प्रतिमानों को अपनाया जाना चाहिए। यह प्रतिमान नीति निर्माण में आर्थिक मानव की सोच को लाता है जो अग्रलिखित मान्यताओं पर आधारित है - (i) समस्या को पूर्णता में पहचानना (ii) समस्या के संभावित विकल्पों को तलाशना व उनकी लागत लाभ के आधार पर तुलना करना, (iii) अंततः ऐसे विकल्प को चुनना जो लाभ का अधिकतमीकरण करे। लोक नीति निर्माण का यह प्रतिमान व्यवहारिक स्थितियों में कम ही मिल पाता ....
Question : निम्नलिखित उदाहरणों को ध्यानपूर्वक पढि़ए और फिर सुझाइए कि अभिप्रेरण के संगठनात्मक मनोविज्ञान के कौन-से विशिष्ट संदर्श, संबंधित संगठन को, निम्नलिखित चार व्यक्तियों की आवश्यकताओं के संगठन की आवश्यकताओं के साथ ताल-मेल बैठाने में मदद करेंगेः
(2013)
Answer : अब्राहम मौस्लों ने मानव प्रेरणा का व्यवस्थित अवधारणात्मक मॉडल आवश्यकताओं का उच्चानीचक्रम दिया जिसमें उन्होंने कहा कि बढ़ते क्रम में व्यवस्थित मानवीय आवश्यकताओं के पांच स्तर होते हैं -
(1) शारीरिक आवश्यकताएं (2) सुरक्षा आवश्यकताएं (3) सामाजिक आवश्यकताएं (4) सम्मान आवश्यकताएं (5) आत्म वास्तवीकरण आवश्यकताएं। मौस्लों के अनुसार मानव आमतौर पर पहले अपनी शारीरिक आवश्यकताओं को पूरा करने का प्रयास करती हैं। जब ये आवश्यकताएं पूरी हो जाती है तो वे मानव व्यवहार को प्रेरित नहीं ....
Question : ‘‘सहभागिता के लिए जो लोग सुभाषित ‘साझी शक्ति’ का इस्तेमाल करते हैं, उनके मार्गदर्शन के लिए उपयुक्त साहित्य व्यावहारिक राजनीति है, न कि संगठन और प्रबंधन।’’
‘‘परस्पर प्रबलनकारी और अनुपोषक के रूप में, सहभागी लोकतंत्र और अनुक्रियात्मक सरकार दोनों का विकास करने के लिए, मज़बूत राज्य और मजबूत नागरिक समाज की आवश्यकता होती है।’’
लोक सहभागिता के साथ जुड़े हुए मिथकों और वास्तविकताओं को उजागर कीजिए।
(2013)
Answer : नागरिक समाज एवं राज्य के मध्य संबंध एक महत्वपूर्ण पहलू है। जनभागीदारी का कार्य इतना विशाल है कि अकेली सरकार गरीबी, बेरोजगारी जैसी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकती। नागरिक समाज के द्वारा काम करने के तरीके तथा दृष्टिकोण निश्चित रूप से सरकार द्वारा काम करने की प्रक्रियाओं से भिन्न होते हैं तथापि दोनों के लक्ष्य समान ही होते है।
जहां तक सरकार का संबंध है, आधारभूत संरचनाओं का विकास इसकी पूर्व आवश्यकता है, जबकि नागर ....
Question : ‘‘भौतिक संरचना का डिज़ाइन करने में, संगठन की शरीर रचना सबसे पहले आई, और वस्तुतः यह प्रमुख विचारणीय बात थी।’’
‘‘संगठन सहभागियों के परस्पर संबद्ध सामाजिक व्यवहारों का एक तंत्र होता है।’’
इन कथनों का विश्लेषण कीजिए और प्रशासन सिद्धान्त के लिए उनके अपने-अपने उपागमों के योगदानों का मूल्यांकन कीजिए।
(2013)
Answer : संगठन की शास्त्रीय विचारधारा में प्रशासकीय पद्धति के महत्वपूर्ण तत्वों तथा सभी प्रशासकीय संरचनाओं में सामान्य तत्वों को स्वीकार किया गया है। इसका उद्देश्य संगठन के निश्चित सिद्धांतों को विकास करना है। शास्त्रीय विचारकों का महत्वपूर्ण लक्ष्य संगठन के संरचना का विकास करना है।
संगठन की इस विचारधारा के अनुसार संगठन किसी योजना की औपचारिक संरचना है, जो सुस्पष्ट सिद्धांतों के अनुरूप बहुत कुछ एक इमारत की योजना के अनुरुप हैं। शास्त्रीय विचारकों में उन आधारों ....
Question : ‘संगठनात्मक अक्षमता’ के सिद्धान्त के दो अलग- अलग और सुस्पष्ट चेहरे हैं। इस बात पर क्रिस आर्गाइरिस के विचारों का परीक्षण कीजिए।
(2013)
Answer : व्यवहारवादी चिंतक क्रिस आर्गाइरिस ने आधुनिक संगठनों की संरचना, सिद्धांतों तथा कार्यप्रणाली के प्रति असंतोष प्रकट करते हुए परिस्थितियों के अनुसार संगठनात्मक संरचनाओं को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
उनके अनुसार औपचारिक संगठनों की संरचना इस प्रकार निर्धारित की जाती है ताकि सांगठनिक लक्ष्यों की प्राप्ति हो सके। इस यांत्रिक प्रक्रिया में कार्मिक की पहल क्षमता तथा अभिप्रेरणा कम होती जाती है या कार्मिक अपरिपक्व बना रहता है।
उनके अनुसार इसके समाधान के लिए चार प्रकार ....
Question : एक ही संगठन के विभिन्न उपभागों में मनुष्य के अभिप्रेरण अलग-अलग हो सकते हैं (ऐडगर शाइन)। चर्चा कीजिए।
(2012)
Answer : व्यक्ति मात्र में कुछ निश्चित आवश्यकताएं होती हैं। एक निश्चित समय पर व्यक्ति एक निश्चित आवश्यकता से प्रेरित होता है।
नये कर्मचारियों में शारीरिक आवश्यकतायें महत्वपूर्ण होती हैं, अतः कर्मचारियों को कार्य दशायें, आवास-सुविधा इत्यादि प्रदान करके इस आवश्यकता को पूरा किया जाना चाहिये।
संगठन में वरिष्ठ कर्मचारियों में सुरक्षा आवश्यकता महत्वपूर्ण होती है। इस दृष्टि से वरिष्ठ कर्मचारियों के लिये समूह बीमा योजना, स्वास्थ्य बीमा प्रदान करके, आवास ऋणों की उपलब्धता इत्यादि करके इस आवश्यकता की ....
Question : संगठन तथा पद्धति कार्यालय के मुख्य प्रकार्य क्या होते हैं?
(2011)
Answer : भारत एवं ब्रिटेन में ओ एंड एम का अभिप्राय संगठन एवं पद्धति है, जबकि अमेरिका में संगठन एवं प्रबंध है। इस तरह की व्यवस्था की शुरूआत कार्यालयों और संगठनों की कार्य प्रक्रियाओं में सुधार हेतु सुझाव देने एवं अधिकारियों और कर्मचारियों को उनकी त्रुटियों की ओर ध्यान दिलाने हेतु एक स्थायी निकाय की आवश्यकता को देखते हुए की गई। निम्नलिखित बिंदुओं के द्वारा हम इसके कार्यों को समझ सकते हैं:
Question : “गैर-पश्चिमी राज्यों में अक्सर, यदि सदैव न हो तो, असंतुलित राज्य-व्यवस्थाएं हैं, लेकिन ये आवश्यक रूप से अधिकारीतंत्रीय राज्य व्यवस्था नहीं है।” चर्चा कीजिए।
(2009)
Answer : द्वितीय महायुद्ध के पश्चात नव स्वतंत्र विकासमान तीसरी दुनिया के देशों के प्रशासनों का अध्ययन बड़े व्यापक स्तर पर किया गया। इन अध्ययनों से यह पता लगा है कि विकासशील देशों की प्रशासन व्यवस्था स्वदेशी न होकर पाश्चात्य देशों की नकल मात्र है, इन देशों की नौकरशाही में विकास कार्यक्रमों को पूरा करने वाली दक्ष मानव शक्ति का अभाव है; इन देशों की नौकरशाही औपचारिकता और लालफीताशाही को अनावश्यक महत्व देती है, इनके प्रशासकों में ....
Question : “इनमें कोई संदेह नहीं है कि विभागीकरण जटिलताओं से परिपूर्ण है। ये आंशिक रूप से तकनीकी, आंशिक रूप से राजनीतिक होता है।” चर्चा कीजिए।
(2009)
Answer : विभाग प्रशासन की मूलभूत तथा मूल संगठनात्मक इकाई है, जोकि प्रशासनिक क्रियाओं के संपादन हेतु सरकार हेतु निर्धारित उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु करती है।
अर्थात् विभाग एक लाइन प्रकार की संस्था होती है। इसी पृष्ठभूमि में सरकारी ढांचे को विभागों में बांटने की प्रक्रिया विभागीकरण कहलाती है। डिमाक तथा कोइंग के शब्दों में- ‘प्रशासन में श्रम-विभाजन की आवश्यकता विभागीय प्रणाली के जन्म का स्वाभाविक कारण है।’ अर्थात् प्रशासन में किए जाने वाले भांति-भांति प्रकार के कार्यों ....
Question : दावा करना कि संगठन का कंपनी या निगम रूप संगठन के विभागीय रूप की अपेक्षा अधिक प्रभावी होता है, एक अनाधुनिक विचार है। मजबूत संरचना का वास्तविक मापदंड तो इष्टतम जवाबदेही के साथ निर्णयी स्वायत्तता और संक्रियात्मक नम्यता का संतुलन बैठाने में उसकी सक्षमता है। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
(2008)
Answer : सूत्र इकाइयों के अनेक प्रकार के संगठन होते हैं यथा विभाग, निगम, कंपनी, स्वतंत्र नियामकीय आयोग आदि। विभाग प्रशासन की मूल संगठनात्मक इकाई है, जिस पर प्रशासनिक क्रियाओं के संपादन का दायित्व रहता है। विभाग उन उद्देश्यों को पूरा करने के लिए अपने कार्य संपन्न करते हैं, जिनके लिए सरकार बनती है। वे संगठन की बड़ी इकाइयां होती हैं, जो कि प्रशासन के पृथक-पृथक क्षेत्रें में कार्य करती हैं। प्रशासनिक पद सोपान में विभाग का ....
Question : ‘सोपानिक नियंत्रण’ जिसमें अनुदेश सीढ़ी दर सीढ़ी नीचे पहुंचते हैं, नियंत्रण का मात्र आयाम नहीं है।
(2005)
Answer : अधिकारी तंत्र में कार्य संबंधी क्रियाएं विशेषीकरण के आधार पर विशिष्ट पदों को प्रत्यापिर्त कर दी जाती हैं। उच्चता से प्रारंभ होकर शक्ति व शासन का हस्तांतरण निम्नता की ओर प्रत्येक निरीक्षक से उसके अधीनस्थ कर्मचारियों को सौंप दी जाती है। प्रत्येक पद का एक अपना विशिष्ट सीमांकन होता है। यहां कार्य, योग्यता, सत्ता, उत्तरदायित्व तथा पद के अन्य भागों का स्पष्ट सीमांकन होता है। न्यूनस्तर के पदों को एक समूह में लाकर के एक ....
Question : ‘संगठन दो या अधिक व्यक्तियों के सचेतन रूप से समन्वित क्रियाकलापों या बलों का एक तन्त्र होता है। टिप्पणी कीजिए।
(2005)
Answer : प्रबन्ध प्रक्रिया का अत्यन्त महत्वपूर्ण चरण एवं कार्य संगठन है, क्योंकि संगठन ही व्यक्तियों अथवा समूहों के द्वारा किए जाने वाले कार्यों की एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके द्वारा उपलब्ध साधनों के प्रयोग के लिए सुव्यवस्थित, रचनात्मक और समन्वयपूर्ण क्रियाक्षेत्र तैयार करने का प्रयत्न किया जाता है। किसी भी कार्य को सुचारू रूप से करने के लिए संगठन नितान्त आवश्यक है। कार्य सफलता अथवा असफलता इस बात पर निर्भर करती है कि संगठन कितना सुव्यवस्थित ....
Question : फ्प्रतीत होता है कि आज संगठन सूचना एवं तन्त्रें में निवेश कर रहे हैं, लेकिन अक्सर उनके निवेश समझदारी पूर्ण नहीं प्रतीत होते हैं। टिप्पणी कीजिए।
(2003)
Answer : वर्तमान युग में प्रशासनिक संगठन में सूचना के महत्व में वृद्धि हो रही है क्योंकि सूचनाओं के अभाव में संगठन प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएगा। यदि किसी संगठन के लोग एक दूसरे की भावनाओं को जान समझ लें तो निस्संदेह उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। संगठन में आपसी विचार-विमर्श बहुत अधिक महत्व रखता है।
आज सूचना क्रांति के विविध रूपों, जैसे फैक्स, ई-मेल, इंटरनेट आदि किसी संगठन में अधिकाधिक उपयोग किए जाते हैं, आज कम्प्यूटरीकरण को संगठन ....
Question : सरकार के प्रशासनिक संगठन का समुचित विश्लेषण तभी संभव है जब हम ‘अधिकार तंत्र’ को ढांचा और प्रशासन को ‘कार्य संपादन’ मान लें। चर्चा कीजिए।
(2001)
Answer : सरकार के प्रशासनिक संगठन का विश्लेषण प्रशासनिक तंत्र के ढांचे तथा उसके द्वारा किये जाने वाले कार्यों में विभाजित करके समझा जा सकता है, क्योंकि बिना किसी संरचना तथा कार्य विशेषीकरण के संगठन का अस्तिव संभव नहीं है। प्राचीन काल से ही समाज में संगठन विद्यमान हैं। समस्याएं संगठन का निर्माण करती हैं। प्रत्येक व्यक्ति किन्हीं ऐसे ध्ययों की पूर्ति करना चाहता है जिन्हें वह अकेले पूरा नहीं कर सकता। इस कारण समाज में संगठन ....
Question : सभी प्रशासनिक संगठन ‘पदसोपान’ को एक महिमा मंडित ‘तकनीक’ क्यों मानते हैं? विवेचना कीजिए।
(2001)
Answer : प्रशासन के ढांचे का निर्माण पदसोपान प्रणाली के आधार पर होता है। वस्तुतः इस संगठन में कार्यरत कर्मचारियों के मध्य संगठन के कार्य एवं सत्ता का विभाजन है। इस विभाजन के फलस्वरूप सत्ता पर आधारित एक ऐसे प्रशासनिक ढांचे का निर्माण होता है, जिसमें उच्च अधिकारियों और निम्न अधिकारियों के बीच सम्बन्धों को दिखाया जाता है। पदसोपान उच्च एवं अधीनस्थ कर्मचारियों के मध्य स्पष्ट विभेद है।
पदसोपान का अर्थ श्रेणीबद्ध प्रशासन से ही है। इससे तात्पर्य ....
Question : संगठन के आयोग रूप में सरकार की ‘शीर्षहीन चतुर्थ शाखा’ होने की प्रवृत्ति रहेगी।
(1999)
Answer : लोक प्रशासन की दृष्टि में विश्व में कोई भी प्रशासनिक प्रणाली पूर्णतः एकीकृत नहीं होती है और न तो पूर्णतः विशंखलित वास्तव में राज्य की कुछ एकीकृत की उदाहरण होती हैं एवं कुछ सेवाएं वि शृंखलित प्रणाली का भी उदाहरण होती हैं। अमेरिका में ऐसे अनेक सम्बधित विभाग ब्यूरो मंडल, आयोग तथा निकाय आदि हैं, जो राष्ट्रपति के सम्पूर्ण कार्यपालिका शक्ति से स्वचछन्द होते हैं। ये वि शृंखलन के उदाहरण हैं, इसके विपरीत भारत में ....
Question : राजनीतिक और स्थायी कार्यकारियों के बीच सम्बन्ध में बुनियादी प्रश्न प्रकार्योत्मक स्तर पर तथ्यों और मूल्यों का पृथ्क्करण है।
(1999)
Answer : किसी शासन प्रणाली में मुख्यतः कार्यकारिणी शाखा के दो भाग होते हैं- राजनीतिक किन्तु अस्थाई व प्रशासनिक किन्तु स्थाई। अगर संसदीय शासन प्रणाली का उदाहरण लें तो प्रधानमंत्री, मंत्रीमंडल के सदस्य मंत्री, राज्यमंत्री तथा उपमंत्री आदि राजनीतिक कार्यपालिका के अन्तर्गत आते हैं। इनको मंत्री पद इसलिए प्राप्त होता है क्योंकि ये चुनावों में चुने गए हैं और उनकी पार्टी ने संसद में बहुमत प्राप्त किया है। इनकी पदावधि तब तक है जब तक इनको संसद ....
Question : ‘उदारवादी और निजीकरण के परिणाम स्वरूप लोक उद्यमों को उचित व्यवहार नहीं प्राप्त हुआ’।
(1999)
Answer : लोक उद्यमों ने स्वतन्त्रता के पश्चात भारतीय अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण में विशेष योगदान दिया। देश में बहुत से लघु एवं सहायक उद्योगों की स्थापना सार्वजनिक उपक्रमों के निर्देशन एक सहायता से की गई है। इनकी स्थापना होने से देश में रोजगार अवसरों में वृद्धि हुई एवं बेरोजगारी की समस्या पर कुछ हद तक नियंत्रण रहा, चूंकि इन उपक्रमों को मुख्यतः अविकसित एवं पिछड़े क्षेत्रें में स्थापित किया गया इसलिए विकास की किरण से दूर प्रदेशों ....
Question : समन्वय के प्रबंधकीय और प्रकार्यात्मक पक्षों के बीच विभेदन कीजिए। समन्वय कैसे प्राप्त किया जाता है?
(1998)
Answer : समन्वय संगठन का निर्धारक सिद्धांत है। यह वह रूप है, जो अन्य अनेक सिद्धांतों को समाहित करता है एवं सभी संगठित प्रयासों का आरंभ तथा अंत करता है। समन्वय को प्रबंधक का एक कार्य भी माना गया है। समन्वय करने का प्रमुख अर्थ है कि एक संगठन की क्रियाओं में समरूपता लाना जिससे की उनका कार्य सरल हो जाए और वह सफलता प्राप्त कर सके। समन्वय स्वयं में साध्य नहीं है, बल्कि संगठन को लक्ष्यों ....
Question : संचार संगठन को बांधे रखता है।
(1998)
Answer : संचार शब्द में विचारों का आदान-प्रदान, विचारों की साझेदारी तथा भाग लेने की भावना सम्मिलित है। न्यूमैन एवं समर के अनुसार संचार दो या दो से अधिक व्यक्तियों के तथ्यों विचारों, सम्मतियों अथवा भावनाओं का पारस्परिक आदान-प्रदान है।
संचार को प्रशासन का प्रथम सिद्धांत माना जाता है। संगठन के उद्देश्यों की सफलता के लिए एक प्रभावशाली संचार व्यवस्था आवश्यक होती है। प्रशासन द्विमार्गीय यातायात के सामान है व प्रभावी संचार को आवश्यकता का अनुभव करता है। ....
Question : ‘सिद्धांत रूप से, बोर्ड प्रशासन, सरकार और राजनीति के बीच के भेद को नष्ट कर देता है, क्योंकि इसके द्वारा राजनीति प्रशासन में प्रवेश कर जाती है।‘
(1997)
Answer : मण्डल अथवा बोर्ड प्रणाली में विभाग ने निर्देशन एवं पर्यवेक्षण को दायित्व का व्यतिकरण कर दिया जाता है। भारत में इसके उदाहरण रेलवे बोर्ड, केंद्रीय उत्पाद शुल्क तथा सीमा शुल्क बोर्ड एवं केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड है। रेलों के प्रशासन, परिचालन-प्रबंध और संचालन हेतु मात्र रेलमंत्री द्वारा सम्पादित न होकर उनके नीचे बहुसदस्यों वाले रेलवे बोर्ड द्वारा किया जाता है। यही स्थिति अन्य विभागों के बोर्डों में भी होती है।
राज्यों में इसी प्रकार राजस्व, बिजली, ....
Question : यह कहना कहां तक सही होगा कि प्रत्यायोजित विधि निर्माण आज की आवश्यकता बन गई है और यह आगे भी ऐसा ही चलने वाला है, यह अपरिहार्य भी है और अनिवार्य भी?
(1997)
Answer : विधि निर्माण विधान मण्डल का अग्रगण्य कार्य है। कार्याधिक्य होने के कारण विधान मण्डल के लिये सभी विषयों पर विधि निर्माण कल्पना कुसुम मात्र है। विधानमण्डल जब विधि निर्माण की अपनी शक्ति प्रशासनिक अधिकारियों के हाथों में स्थानान्तरित कर देता है, तो उसे ही प्रदत्त विधायन या प्रतिनिहित विधान की संज्ञा दी जाती है। इसका महत्व विधानमण्डल द्वारा निर्मित विधि के सदृश ही होता है। विधायिका द्वारा प्रदत्त विधिक सत्ता के अनुरूप अधीनस्थ पदाधिकारियों एवं ....
Question : केंद्रीयकरण का झुकाव शक्ति और प्रभुत्व की ओर रहता है। इसके दूसरी ओर, विकेंद्रीयकरण का झुकाव स्पर्धा और आत्म-निर्णय की ओर होता है। चर्चा कीजिए।
(1997)
Answer : प्रशासकीय संगठन को विकेन्द्रीकृत रखा जाए या केन्द्रित यह विवाद का विषय है। इस विवाद का सम्बन्ध इस तथ्य से है कि संगठन के अंतर्गत अधिकारी वर्ग का अपने अधीनस्थों तथा केंद्रीय कार्यालयों का क्षेत्रीय कार्यालयों के साथ कैसा सम्बन्ध हो, इन दोनों के मध्य विकेन्द्रीकृत आधार पर सम्बन्ध हो या केन्द्रीकृत आधार पर। केन्द्रीय संगठन में समस्त महत्वपूर्ण मामलों का निर्णय करने वाली सत्ता, केन्द्रीय कार्यालय के नियंत्रणाधीन होती है। इस व्यवस्था में क्रमिक ....
Question : ‘फ्रेडरिक हर्जबर्ग का द्विकारक सिद्धांत कमोवेश रूप से अब्राहम मैस्लो के अभिप्रेरण सिद्धांत का विस्तार है।‘ समझाइए
(1997)
Answer : सन् 1943 में प्रकाशित अपने निबंध फ्मानव अभिप्रेरण का एक सिद्धांतय् में अब्राहम मैस्लो ने आवश्यकता सोपान सिद्धांत की प्रथमतः प्रस्तुति की। यह अभिप्रेरणा का लोकप्रिय सिद्धांत बना। मैस्लो ने मानवीय आवश्यकताओं को दृष्टिगत् रखते हुए संगठन तथा व्यक्तियों के संबंध का अवलोकन कर विश्लेषण किया। संगठन का सदस्य बनने के लिए व्यक्ति की आवश्यकताओं की पूर्ति की भावना केंद्र में होती है। ये व्यक्ति की आवश्यकताएं भिन्न-भिन्न क्षेत्रें से संदर्भित होती हैं। इन आवश्यकताओं ....