Question : ‘‘ई-शासन नागरिक और राज्य के बीच एक सीधा संबंध उत्पन्न करता है।’’ इस संदर्भ में, निर्वाचित प्रतिनिधियों की परिवर्तनशील भूमिका स्पष्ट कीजिए।
(2015)
Answer : ई-शासन से आशय इलेक्ट्रानिक प्रशासन से है। सूचना प्रौद्योगिकी से संचालित शासन ई-प्रशासन कहा जाता है। ई-प्रशासन को ऑन-लाइन प्रशासन भी कहते हैं। ई-प्रशासन से तात्पर्य SMART गवर्नमेंट से है, अर्थात एस से सिंपल, एम से मॉडल, ए से एकाउंटेबल, आर से रिस्पांसिबल तथा टी से ट्रांसपेरेंट होता है।
तात्पर्य यह है कि सूचना तकनीकि के प्रयोग से सरकार SMART हो जाएगी। ई-प्रशासन के वस्तुतः दो रूप हैं। एक रूप है सरकार ....
Question : ‘‘मिस (MIS), पर्ट (PERT) और सी.पी.एम. (CPM) ने संगठन एवं पद्धति (O & M) के पुनआर्विष्कार के प्रक्रम में तेजी ला दी है।’’ उपर्युक्त कथन के संदर्भ में, प्रबंधकीय तकनीकियों में हाल की प्रगतियों को स्पष्ट कीजिए।
(2015)
Answer : तंत्र विश्लेषण की प्रमुख तकनीक मिस (M.I.S.), पर्ट (PERT) तथा सी.पी.एम. (C.P.M.) हैं। यहां तंत्र से तात्पर्य गतिविधियों की उस श्रृंखला से है, जो किसी संगठन या उद्योग के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु उत्पादन या सेवा के रूप में सामने आती है। वस्तुतः मिस (M.I.S.), पर्ट (PERT) तथा सी.पी.एम. (C.P.M.) तकनीकों का प्रयोग उन बड़े कार्यों तथा परियोजनाओं में किया जाता है जो नई होती हैं तथा जिनमें बार-बार की जाने वाली गतिविधियां प्रायः नहीं ....
Question : “शासन-प्रणाली के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण बात सरकार के निर्गतों (आउटपुट्स) के बजाय परिणाम होती है।” ई-सरकार और ई-शासन के संबध में विश्लेषण कीजिए।
(2014)
Answer : यदि हम कुछ दशक पहले की बात करें तो सरकारी संगठन सेवा की गुणवत्ता और ग्राहकों की प्रतिक्रिया पर ज्यादा ध्यान नहीं देते थे लेकिन लोक प्रशासन के विकास के चरण में सरकार की यह प्रवृत्ति बदली और 1990 के दशक में नव लोक प्रबंध की धारणा के साथ सरकार में बाजारवाद की प्रक्रिया का आरंभ हुआ। यह वास्तव में एक क्रांति थी। ऐसी ही दूसरी क्रांति का जन्म हुआ ई-शासन के आगमन के साथ।
आज-कल ....
Question : “ई-सरकार की तकनीकी और बहु-शास्त्रीय प्रकृति ने सरकार के भीतर नीति-निर्माताओं, कार्यक्रम प्रशासकों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच एक अन्योन्याश्रित सम्बन्ध पैदा कर दिया है।” सामान्यज्ञ-विशेषज्ञ संबंध के संदर्भ में विश्लेषण कीजिए।
(2014)
Answer : वर्तमान युग सूचना प्रोद्योगिकी का युग है। ऐसे में कोई भी सरकार, या यूं कहें कल्याणकारी सरकार यह नहीं चाहेगी कि इसके नागरिक किसी एक कार्य के लिए पूरे दिन ऑफिस में एक टेबल से दूसरे टेबल के चक्कर काटें।
अब ‘टेबल-टू-टेबल’ गवर्नमेंट की जगह ‘ऑल गवर्नमेंट ऑन ए सिंगल टेबल’ का समय है जिसे हम ‘एकल खिड़की एप्रोच’ भी कहते हैं, यह विकास का नया मूल मंत्र है। इस उच्चाक्रम ने लोक प्रशासन में सामान्यज्ञ-विशेषज्ञ ....
Question : “अनेक एशियाई और अफ्रीकी देशों ने सिविल सेवा के एक विशेषाधिकार प्राप्त सम्भ्रान्त वर्ग के रूप में होने के औपनिवेशिक विचार को विरासत में पाया है। अतएव, सिविल सेवा की सामाजिक प्रस्थिति, परिवर्तन के लिए अधिकारीतंत्र की अनुपयुक्तता (अन्सुटेबिलिटी) का एक महत्वपूर्ण पक्ष है।” टिप्पणी कीजिए।
(2014)
Answer : ब्रिटेन जो पारंपरिक रूप से लोक सेवा की ‘संरक्षण प्रणाली’ का घर रहा है उसने औपनिवेशिक देशों में भी इसे लागू किया जो अधिकतर एशियाई और अफ्रीकी देश थे।
सिविल सेवा के ये सदस्य उच्च प्रतिष्ठित घरानों से आते थे और आम जनता को हेय दृष्टि से देखते थे। उनमें जातीय अहं की भावना थी और इस स्थिति को बनाए रखता चाहते थे।
परिणामस्वरूप वे इसमें किसी भी परिवर्तन का विरोध करते थे। ऐसी ही लोक सेवा ....
Question : संगठनात्मक प्रबंधन द्वारा प्राधिकार के माध्यम से और कर्मचारियों द्वारा उपरिमुखी प्रभाव के प्रयास के माध्यम से, अनुसरण किए जा रहे मनोवैज्ञानिक संविदा की क्या प्रकृति होती है?
(2013)
Answer : प्राधिकार एक ऐसा अधिकार है जिसके अंतर्गत कोई वरीय अधिकारी अपने अधीनस्थों के लिए सीधे आज्ञाएं जारी करता है। प्राधिकार वैध शक्ति है।
प्राधिकार एक संसाधन के रुप में संगठन द्वारा अनुमोदित होती है। यह वरीय अधिकारी को अपने अधीनस्थों से जोड़ता है। साइमन ने कहा कि जब प्राधिकार को मान लिया जाता है तब अधीनस्थों के विकल्पों के बीच चयन की अपनी क्षमता प्रसुप्त हो जाती है। उनके अनुसार प्राधिकार की सीमा व्यवहार में स्वीकृत ....
Question : अधिकतर विकासशील देशों में ई-सरकार परियोजनाओं की सफलता दर कुछ निम्न ही कही जाती है। कारण का आकलन कीजिए।
(2013)
Answer : ई-शासन एक आधुनिक अवधारणा है जिसका आशय शासन में इलेक्ट्रॉनिक सुविधाओं का प्रयोग जिससे शासन के प्रत्येक क्रियाकलाप तक आम-नागरिकों की पहुंच हो जाए। इसके साथ ही सरकार की पहुंच भी जनता तक आसानी से रहे जिससे विभिन्न शिकायतों का समाधान शीघ्रता एवं सहजता से हो सके। ई-शासन से आम जन को उसके कामकाज संबंधी सूचनाएं एवं प्रक्रियाएं ऑनलाइन मिलने लगी है। इससे समय तथा व्यय में बचत होती है। रेल रिजर्वेशन, राशन कार्ड, ड्राइविंग ....
Question : ‘समाज के मुख्य आयोजनिक सिद्धांतों के रूप में ई-सरकार और ई-कारोबार के आभासी निधन ने भल्म से ई-शासन के उदय के लिए परिस्थितियां पैदा कर दी हैं- उपरोक्त कथन के संदर्भ में ई-सरकार और ई-शासन के बीच के विभेदन को दर्शाइए।
(2012)
Answer : संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा दी गई परिभाषा का अनुसरण करते हुए, ई-गवर्नमेंट को सरकारी अभिकरणों द्वारा सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग के रूप में पारिभाषित किया जा सकता है, जिसका उद्देश्य सरकार की दक्षता, प्रभावकारिता, पारदर्शिता और जवाबदेही में वृद्धि करना है।
इस परिभाषा में प्रौद्योगिकी साधन है और दक्षता, पारदार्शिता आदि परिणाम हैं, जिनके सूचना एवं प्रौद्योगिकी के उपयोग से प्राप्त होने की संभावना है। इसके विपरीत ई-गवर्नेंस का अर्थ किसी संगठन चाहे ....
Question : ‘पर्ट’ की पृष्ठभूमि एवं विकास की रूपरेखा प्रस्तुत कीजिए और ‘पर्ट’ के अनुप्रयोग में शामिल सोपानों को गिनाइए।
(2012)
Answer : पर्ट (Programme Evaluation and Review Technique) CPM का अधिक उन्नत प्रारूप है। इसका विकास अमेरिका की रक्षा परियोजनाओं के संदर्भ में पहली बार हुआ। पर्ट एक सांख्यिक प्रविधि है, जिसके द्वारा प्रत्येक गतिविधि में लगने वाले समय को अनुमानित किया जाता है। यह ब्च्ड के विपरीत लगने वाले एक समय के स्थान पर तीन प्रकार के समयों का निर्धारण करता है।
आर्दश ....
Question : सरकारी रिकार्डों तक मुक्त पहुंच - लोकतांत्रिक सरकार का प्रामाणिकता चिह्न होता है, परंतु सरकारें अन्वेषणों को रोकने और इसके साथ-साथ जवाबदेही को सामान्यतः कमजोर कर देने के प्रयोजन से, बहुत जानबूझकर रिकार्डों को नष्ट कर देने में नहीं हिचकिचाती हैं। क्या आपके विचार में, इस स्थिति में सूचना का अधिकार सरकारी रिकार्डों के संपूर्ण निर्वर्गीकरण और निअर्भिलेखाकरण की सीमा तक मांग कर सकता है? तर्क-वितर्क कीजिए।
(2012)
Answer : जनता का सूचना का अधिकार एक स्वस्थ और कार्यरत लोकतंत्र की आधारशिला है। लोकतांत्रिक समाजों के निर्माण में आधारभूत तत्व, जिससे सर्वसत्तावादी शासक सर्वाधिक भयभीत होते हैं और उसका दमन करते हैं-एक शिक्षित और सक्रिय नागरिक वर्ग है। अनुभव हमें बताता है कि नागरिक जितनी अधिक जानकारी रखते हैं, वे उन निर्णयों में प्रभावकारी रूप से भागीदारी करने की दृष्टि से उतना ही अधिक बेहतर रूप से तैयार और अधिक अभिप्रेरित होते हैं, जो उनके ....
Question : ई-शासन मैक्स वेबर के तर्क संगतता का लौह पिंजरा का अंतिम आगमन है। चर्चा कीजिए।
(2011)
Answer : साधारण अर्थ में हाल के वर्षों में इलेक्ट्रॉनिकी के क्षेत्र में विकसित हुई युक्तियों का प्रशासन ही ई-शासन है। परंतु वास्तव में ई-शासन एक व्यापक अवधारणा है, जिसके राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, तकनीकी सभी पक्ष हैं।
मेक्स वेबर ने अपने नौकरशाही के सिद्धांत के द्वारा वैधानिक-तार्किक नौकरशाही का मॉडल प्रस्तुत किया था, जिसकी निम्नलिखित विशेषता होती हैः
Question : क्या आपके विचार में, ई-शसन और सु-शासन के बीच एक प्रकार का विराधाभास है? इस बात को पूरी तरह से समझाइए।
(2010)
Answer : ई-शासन से तात्पर्य है एक वैकल्पिक एवं ऐसा शासन जो कहीं भी किसी भी समय उपलब्ध हो। यह सक्षम सरकार, सर्वश्रेष्ठ सरकार एवं प्रभावी सरकार है। यह सूचना-प्रौद्योगिकी से संचालित प्रशासन है। अर्थात् ऑनलाइन-प्रशासन है। स्व- देवांग मेहता के अनुसार ई-प्रशासन का तात्पर्य है ‘स्मार्ट गवर्नेंस’ जहां SMART में:
S : सिंपल
M : मॉडल
A : एकाउन्टेबल
R : रिस्पोन्सिबल
T : ट्रान्स्पेरेन्ट
ई-शासन के दो रूप ....
Question : ‘पर्ट’ एवं ‘सीपीएम’ जैसी तकनीकें प्रभावी कार्यालय प्रबंधन में सहायक होते हैं। विस्तार से स्पष्ट कीजिए।
(2009)
Answer : पर्ट (परफोर्मेंस इवोल्यूशन एंड रिव्यू टेकनीक) तथा सीपीएम (क्रिटिकल पथ मैथड) नामक पद्धतियां संगठन में तंत्र विश्लेषण (सिस्टम एनालाइसिस) की तकनीकें हैं, जोकि उन बड़े कार्यों एवं परियोजनाओं में प्रयुक्त की जाती हैं, जहां कि बार-बार प्रयुक्त होने वाली गतिविधियां नहीं होती।
यह तकनीकें परियोजना के कुल समय तथा लागत के संबंध में सहायक होती हैं, क्योंकि इन सभी वृहद परियोजनाओं में अनेक चरण होते हैं तथा कार्य कई प्रकार के उपकार्यों व गतिविधियों में बंटा ....
Question : नीचे दिए कथनों पर विचार कीजिएः
(i)“तकनीकी रूप से अधिकारी तंत्र बौद्धिक युक्तिसंगत प्राधिकार के शुद्धतम प्रकार को निरूपित करता है।”
(ii)“अधिकारी तंत्र केवल एक ही प्रकार के विधिक प्राधिकार का निरूपण नहीं करता है।”
सैद्धांतिक संदर्भ की पहचान कीजिए और उपरोक्त कथनों का विश्लेषण कीजिए।
(2009)
Answer : अधिकारी तंत्र, जैसे संगठनों की उपस्थिति स्थायी राजनीतिक व्यवस्था की स्थापना से ही देखी जा सकती है।
परन्तु 18वीं सदी के प्रारंभ से ही राज्य के बढ़ते कार्य क्षेत्र (सकारात्मक राज्य की संकल्पना) तथा प्रशासनिक कार्यों में बढ़ती विशिष्टता की पृष्ठभूमि में अधिकारी तंत्र/नौकरशाही का अध्ययन बढ़ा (हालांकि कौटिल्य जैसे विद्वानों द्वारा यह शुरूआत 2000 वर्ष पूर्व ही कर दी गयी थी) जिसके अंग्रेजी सूत्रधारों में विसेण्ट डीगोर्ने, राबर्ट मिशेल, गीरानों मोस्का कार्ल मार्क्स तथा सर्वप्रमुख ....
Question : ई-शासन में दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही के सर्वाधिक प्रभावी उपकरण के रूप में उभरने की संभाव्यता है। टिप्पणी कीजिए।
(2008)
Answer : ई-शासन एक आधुनिक अवधारणा है, जिसका आशय शासन में इलेक्ट्रानिक सुविधाओं का प्रयोग, जिससे शासन के प्रत्येक क्रियाकलाप तक आम नागरिकों की पहुंच हो जाए। इसके साथ ही सरकार की पहुंच भी जनता तक आसानी से रहे, जिससे विभिन्न शिकायतों का समाधान शीघ्रता एवं सहजता से हो सके।
यह ऐसा शासन है, जो कहीं भी किसी भी समय उपलब्ध है, ई-शासन या ई-गवर्नेंस सक्षम सरकार, सर्वश्रेष्ठ सरकार और प्रभावी सरकार है। ई-शासन से तात्पर्य स्मार्ट गवर्नेंस ....
Question : "सूचना का अधिकार प्रत्येक लोक प्राधिकरण के कार्यचालन में पारदर्शिता एवं जबावदेही को बढ़ावा देता है।" स्पष्ट कीजिए।
(2007)
Answer : वीरप्पा मोइली समिति ने अपनी प्राथमिक दृष्टि में ही सुशासन के निमित्त सूचना के अधिकार की प्रासंगिकता को उपादेय माना था। प्रशासन में पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व की भावना के संचरण के निमित्त सूचना के अधिकार को ब्रह्मास्त्र माना गया। सूचना का अधिकार मौलिक अधिकार की तरह ही व्यक्ति का प्राकृतिक अधिकार माना जा सकता है। इसके माध्यम से प्रशासन में विसंगतियों एवं लालफीताशाही पर नकेल डाली जा सकती है।
बिना सूचना का अधिकार दिये हुए सुशासन ....
Question : प्रशासन में दक्षता सुधार के लिए, भारत में अपनाए जाने वाले संगठन एवं विधि (ओ एण्ड एम) के बीच विभिन्न तकनीकों पर प्रकाश डालिए।
(2007)
Answer : लोक प्रशासन का सम्बन्ध उन गतिशील संगठनों से है जो सरकार के दायित्वों की पूर्ति हेतु जनसाधारण के लिए सेवाएं संचालित करते हैं। प्रशासनिक संगठन अनेक प्रकार से कानूनों नियमों तथा प्रक्रियाओं का पालन करते हैं तथा इन संगठनों की संरचना भी तदानुसार निर्धारित होती है। प्रशासनिक संस्थाएं प्रत्येक युग में किसी न किसी रूप में राज्य के साथ अवश्य संलग्न रही है तथा समय की मांग के साथ इन संस्थाओं में यथोचित संशोधन भी ....
Question : "सूचना प्रौद्योगिकी का उदय ऐतिहासिक अशक्तताओं पर काबू पाने का एक अवसर है।" स्पष्ट कीजिए।
(2006)
Answer : औद्योगिक क्रांति का मुख्य आधार मशीनीकरण ही रहा है, जिसमें मानव श्रम के स्थान पर मशीनों को बढ़ावा मिला। प्रबंध तथा लोक प्रशासन के क्षेत्र में भी स्वचालित मशीनों तथा उपकरणों का महत्व निरंतर बढ़ा है। इससे न केवल सूचनाओं का आदान-प्रदान तेज होता है, बल्कि संगठनों में पारदर्शिता को बढ़ावा मिला है। निर्णय और लोकनीतियां भागीदारीपूर्ण होती हैं। E-governance के बहुत से नये अवसर उत्पन्न होते हैं। संगठन सेवाओं के ....
Question : उत्तम शासन के सन्दर्भ में, प्रभावी सरकार-नागरिक अन्योन्यक्रिया में, सूचना प्रौद्योगिकी किन तरीकों से और किस प्रकार एक निर्णायक भूमिका अदा कर सकती है?
(2005)
Answer : किसी राष्ट्र एवं राज्य के लोगों को शान्तिपूर्वक व्यवस्थित, तार्किक, समूह तथा सहभागी जीवन प्रदान करने के लिए शासन की कार्य प्रणाली ही सुशासन है।
सुशासित राज्य वह है, जिसके नियम भले ही कम हो, लेकिन उन पर अमल कठोरता से किया जाता है व इसमें राजनीतिक जवाबदेयता, पारदर्शिता पूर्वक सूचनाएं प्रभावी एवं कुशल प्रशासन और सरकार एवं लोगों के मध्य सहयोगी की भावना परिलक्षित होती है।
उत्तम शासन में जन साधारण के हितों की उचित समय ....
Question : सूचना प्रौद्योगिकी किसको कहते हैं? लोक प्रशासन पर उसके प्रभाव का वर्णन कीजिए।
(2004)
Answer : मानव के सामाजिक प्राणी बनने में सूचना ने स्नायु तन्त्र की भूमिका अदा की है। सूचनाओं के ही द्वारा मानव ने अपने जीवन को सुरक्षित व उद्देश्यपूर्ण बनाया है। सूचना के क्षेत्र में नई क्रान्ति का सूत्रपात 19वीं शताब्दी में टेलीग्र्राफ के अविष्कार के साथ हो गया था। सूचना प्रौद्योगिकी से तात्पर्य है कि ऐसी वस्तुएं, जिनका उपयोग निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक अर्थपूर्ण बनाने या इसकी मदद से तथ्यों को रूप एवं आकार ....
Question : केन्द्रीय और राज्य प्रशासनिक अधिकरणों की प्रभावित और उपयोगिता।
(2000)
Answer : प्रशासनिक न्यायाधिकरण साधारण न्यायिक प्रणाली के बाहर स्थित एक ऐसी सत्ता है, जो उस समय विधियों की व्याख्या करते हैं और उन्हें लागू करते हैं। जब लोक प्रशासन के कार्यों पर औपचारिक मुकदमों या अन्य स्थापित रीतियों द्वारा आक्रमण होता है। प्रशासनिक न्यायाधिकरणों के गठन का उद्देश्य यह है कि वादकारियों को त्वरित न्याय प्राप्त हो। केन्द्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण अनेक बाधाओं के बावजूद यह कार्य काफी हद तक पूरा कर सका है। मामलों को निपटाने ....
Question : संगठन और विधि (ओ. और एम.) के महत्व पर प्रकाश डालिये। क्या आप समझते हैं कि अलग से ओ- और एम- संगठन होना चाहिये।
(1997)
Answer : ‘संगठन और प्रबन्ध’ या ओ. तथा एम. का प्रशासन में वही महत्व है जो धर्म में परमेश्वर का होता है। प्रायः इसे दो अर्थों में प्रयुक्त किया जाता है- संगठन तथा प्रबन्ध एवं संगठन तथा पद्धतियां। इसके अंतर्गत प्रबन्ध की समस्त क्रियाएं यथा-योजना निर्माण, संगठन समन्वय, उत्प्रेरणा, संचालन आदि समाहित हेाती हैं। अपने सीमित अर्थ में इसको संगठन एवं पद्धतियां कहा जाता है, जिसके अन्तर्गत मात्र लोक निकायों तथा निजी संस्थानों के संगठन तथा उनकी ....
Question : प्रशासनिक सुधार को मशीनरी में, यथार्थ और वांछनीयता के बीच की खाई को पाटने के लिये किये जाने वाले प्रेरित परिवर्तन हैं।
(1997)
Answer : प्रशासनिक सुधारों का तात्पर्य उस प्रक्रिया से है, जिसमें प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यकुशलता एवं गुणवत्ता में उत्तमता लाने का प्रयास होता है। यद्यपि प्रशासनिक सुधार सार्वजनिक एवं निजी दोनों क्षेत्रें में किये जाते हैं तथापि यहां प्रशासनिक सुधार का आशय शासकीय तंत्र में संरचनात्मक, कार्यात्मक, प्रक्रियात्मक, व्यावहारिक, संगठनात्मक एवं विधिक सुधारों से है। प्रशासनिक सुधारों का उद्देश्य प्रशासन को लोकमित्र बनाना एवं उत्तरदायी बनाना, पारदर्शिता सुनिश्चित करना, सूचना के अधिकार को सुनिश्चित करना तथा शासन ....