Question : ‘आचार संहिताओं’ और ‘नैतिकता संहिताओं’ के बीच विभेदन कीजिए। अपने उत्तर के पक्ष में तर्क प्रस्तुत कीजिए।
(2015)
Answer : सिविल सेवकों के लिए एक आचार संहिता एवं नैतिक संहिता की आवश्यकता को महसूस करते हुए संघनम समिति ने कहा था कि उसके भौतिक संसाधनों का विकास और सभी वर्गों के जीवन स्तर को बढ़ाना एक वास्तविक आवश्यकता है। इसके साथ ही लोक जीवन के प्रतिमानों की अवनति को दूर करना होगा। ऐसे मार्ग एवं साधन तलाशने होंगे जो युवाओं की महत्वाकांक्षा में आदर्शवाद एवं देशभक्ति को उचित स्थान दिला सके। नैतिक ईमानदारी का अभाव ....
Question : वाल्डो की ‘दि ऐडमिनिस्ट्रेटिव स्टेट’ परंपरागत आधारिकाओं में से कुछ को एक मौलिक चुनौती प्रदान करती है। स्पष्ट कीजिए।
(2015)
Answer : आधुनिक विश्व में राज्य का स्वरूप न्यूनाधिक मात्र में लोकतांत्रिक तथा जनकल्यानकारी है। आज अहस्तक्षेपवादी राज्य की अवधारणा दम तोड़ चुकी है। आज थामस पेन का यह कथन बहुत प्रासंगिक है कि- ‘‘बहुत अच्छा कार्य करते हुए भी सरकार एक आवश्यक बुराई है और खराब स्थिति में तो वह असहनीय है।’’ लेकिन इस बुराई के साथ जीना हम सभी की बाध्यता है। अब सामाजिक डार्विनवाद का युग नहीं है जिसमें यह माना जाता था कि ....
Question : ‘‘फोलेट की कृति विचारों के द्वंद्व को सुलझाने की दिशा में नहीं थी, परन्तु वह तो कामगारों और पूंजीपतियों के बीच के संरचनात्मक द्वंद्वों को सुलझाने की दिशा में थी।’’ इस कथन के प्रकाश में गत्यात्मक प्रशासन के फोलेट के विचार का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
(2015)
Answer : मेरी पार्कर फोलेट का मानना है कि संगठन में व्यक्ति कार्य करते हैं। अतः उनमें संघर्ष मन-मुटाव या मतभेद अवश्य होंगे। फोलेट कहती हैं कि संगठन में द्वन्द स्वाभाविक है किन्तु उसे रचनात्मक भी बनाया जा सकता है। चूंकि मानव की आवश्यकताएं तथा महत्वाकांक्षाएं असीमित तथा भावनाएं संवेदनशील और अस्थिर होती हैं। अतः कहीं न कहीं व्यक्तियों या व्यक्ति एवं संगठन के मध्य द्वन्द्व होता रहता है। फोलेट का मत है कि संसाधनों की सीमित ....
Question : ‘‘अधिकारी-तंत्र का वेबरीय मॉडल जब आधुनिक लोकतांत्रिक प्रशासन पर लागू किया जाता है, तब उसमें भावात्मक प्रामाण्य (इमोशनल वैलिडिटी) की कमी हो जाती है।’’ टिप्पणी कीजिए।
(2015)
Answer : अधिकारीतंत्र से आशय नौकरशाही से है। नौकरशाही अर्थात ब्यूरोक्रेसी एक विश्वव्यापी विशेषता है। मूलतः फ्रांसीसी शब्द ‘‘ब्यूरो’’ से ‘ब्यूरोक्रेसी’ बना है।
यहां ब्यूरो का अर्थ लिखने की मेज या डेस्क से है एवं क्रेसी (Cracy) का अर्थ सशक्त होने से है।
अधिकारी तंत्र का वेवरीय मॉडल जब आधुनिक लोकतांत्रिक प्रशासन पर लागू किया जाता है तो उसमें भावात्मक प्रभाव की कमी हो जाती है क्योंकि वेवरीय मॉडल के अंतर्गत संगठन पर अत्यधिक ध्यान दिया जाता है ....
Question : समकालीन नियेक्ता - कर्मचारी संबंध में व्हिटलेवाद की प्रासंगिकता का विश्लेषण कीजिए।
(2015)
Answer : व्हिटलेवाद नियोक्ता के रूप में राज्य के प्रतिनिधियों तथा लोक कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के बीच समय-समय पर होने वाली वार्ता की पद्धति है। व्हिटले परिषदें, जो आज सिविल सेवकों के विवादों का निपटारा करने के क्षेत्र में बड़ी लोकप्रिय रही है, शुरू में गैर-सरकारी कर्मियों के प्रसंग में स्थापित की गयी थी।
व्हिटले परिषदों की सबसे पहली उपयोगिता यह है कि सेवा योजक तथा कर्मचारियों के लिए सामूहिक रूप से मिलने के लिए ऐसे स्थान की ....
Question : ‘‘प्रशासनिक नैतिकता, व्यक्तिगत और संव्यावसायिक जवाबदेही के अधीन, परिभाषित की जा सकने वाली उचित संगठनात्मक सीमाओं के भीतर, खोजे जा सकने वाले केंद्रस्थ सामाजिक मूल्यों पर आधारित, स्वतंत्र रूप से निर्णय मानकों की मीमांसा करने का एक प्रक्रम है।’’ (डेनहार्ड)। स्पष्ट कीजिए।
(2015)
Answer : लोकतांत्रिक कल्याणकारी राज्य के विकास में एक विरोधाभाष दिखाई देता है। जैसे-जैसे जनता की सेवा करने के लिए राज्य अधिक से अधिक शक्तिशाली होता जाता है, अधिक से अधिक लोग यह अनुभव करने लगते हैं कि सामाजिक कल्याणकारी राज्य ने उनको पृष्ठभूमि में धकेल दिया है।
ज्यों-ज्यों लोक प्रशासन की मशीनरी फैलती है और अधिक जटिल होती जाती है त्यों-त्यों इसको ठीक प्रकार से जवाबदेह बनाने की आवश्यकता अधिक तीव्रता से अनुभव की जा रही है। ....
Question : ‘‘लेनिन की समाजवादी प्रबंधन की संकल्पना से तात्पर्य समाजवादी समाज के संगठनात्मक विकास का निदेशन करना है।’’ स्पष्ट कीजिए।
(2015)
Answer : लेनिन रूस की बोल्टोविक क्रांति के कर्णधार के रूप में प्रसिद्ध है। उसने अपनी अनेक कृतियों के माध्यम से मार्क्सवादी सिद्धांत और व्यवहार के विकास में विशेष योगदान दिया है। यहां तक की सोवियत रूस और जनवादी चीन में साम्यवादी सरकारों की अधिकारिक नीतियों को मार्क्सवाद-लेनिनवाद की संज्ञा दी गई। लेनिन ने रूस में समाजवादी क्रांति लाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की जिसके परिणामस्वरूप रूस में समाजवादी व्यवस्था स्थापित हो पाई। इसके लिए लेनिन ने ....
Question : फैरल हैडी तुलनात्मक प्रशासन में विकास की तीन अवस्थाओं की किस प्रकार बुद्धिसंगत व्याख्या करता है?
(2015)
Answer : तुलनात्मक लोक प्रशासन से आशय दो अथवा दो से अधिक प्रशासनिक इकाइयों की संरचना एवं कार्यात्मकता की तुलना से है। यह स्वरूप तुलना में अन्तरराष्ट्रीय हो सकता है, जैसे- भारत और श्रीलंका में म्यूनिसिपल प्रशासन। यह तुलना अन्तर्देशीय भी हो सकता है, जैसे- राजस्थान एवं पंजाब के म्यूनिसिपल प्रशासन की तुलना। यह तुलना अन्तर्सांस्कृतिक भी हो सकती है, जैसे- भारत और फ्रांस की प्रशिक्षण व्यवस्था की तुलना। यह तुलना संकर सांस्कृतिक भी हो सकती है, ....
Question : क्या पीटर ड्रकर यह कहने में न्यायसंगत हैं कि “प्रबंधन सिद्धांतों को हमको यह नहीं बताना चाहिए कि क्या करो, बल्कि केवल यही बताना चाहिए कि क्या ना करो”? टिप्पणी कीजिए।
(2014)
Answer : पीटर ड्रकर के अनुसार प्रबंधन के सिद्धांत हैं-
प्रबंधन चिंतन के पितामह पीटर ड्रकर ने अपनी पुस्तक ‘‘द प्रैक्टिस ऑफ मैनजमेंट’’ के माध्यम से एम.बी.ओ. दर्शन की ओर लोगों का ध्यान खींचा तथा इसे स्वनियंत्रण के साथ जोड़ते हुये स्पष्ट किया कि, ‘‘किसी भी संगठन के अंदर कार्यरत कार्मिकों द्वारा किए जाने वाले सभी कृत्यों का सीधा संबंध संगठन के व्यावसायिक लक्ष्यों की ....
Question : “प्रशासनिक व सांविधानिक विधि के बीच संकल्पनात्मक विभाजन काफी छिद्रिल है, और यह कि अनेक आयामों की दिशा में प्रशासनिक विधि को स्वभाव में संविधानों से ज्यादा सांविधानिक माना जा सकता है।’’ आप इस कथन को किस प्रकार उचित सिद्ध करेंगे?
(2014)
Answer : प्रशासनिक व सांविधानिक विधि के बीच संकल्पनात्मक विभाजन काफी छिद्रिल है क्योंकि प्रशासनिक कानूनों का प्रमुख स्त्रोत संविधान ही है किंतु संविधान में सभी बातें विस्तापूर्वक वर्णित नहीं होती हैं बल्कि अन्य कई साधनों से कानूनों का विस्तार होता है। प्रशासनिक कानूनों के प्रमुख स्त्रोत निम्नांकित कहे जा सकते हैं-
अतः स्पष्ट है कि प्रशासनिक व ....
Question : “कार्ल मार्क्स की अधिकारीतंत्र की व्याख्या की जड़ें राज्य की प्रकृति के इतिहास में थीं।” मूल्यांकन कीजिए।
(2014)
Answer : नौकरशाही के विश्लेषण के क्रम में मार्क्स का कहना है कि यह 16 वीं शताब्दी के आस-पास प. यूरोप में पूंजीवादी तथा राष्ट्र-राज्य की शुरुआत के साथ पनपी है। बड़े राज्यों का निर्माण होने से राज्य को अधिकारी तंत्र की आवश्यकता महसूस हुई। यदि राष्ट्र-राज्य तथा पूंजीवाद का अस्तित्व समाप्त हो जाए तो नौकरशाही भी नहीं रहेगी।
मार्क्स का कहना है- नौकरशाही, राज्य में अपने आपको सब कुछ समझने लगती है। उसका वास्तविक उद्देश्य से हर ....
Question : ‘‘अनुकूली (एडैप्टिव), समस्या-समाधानी, विविध विशेषज्ञों की अस्थायी प्रणालियां, जो एक जैविक निरंतर परिवर्तन में समन्वयी कार्यपालकों द्वारा एक-दूसरे से जुडे़ हुए हों- यही वह मौलिक रूप है जो धीरे-धीरे अधिकारीतंत्र का स्थान ले लेगा।’’ इस कथन के प्रकाश में ‘अधिकारीतंत्र का अंत’’ अभिधारणा तथा उसकी शक्तियों और परिसीमाओं पर चर्चा कीजिए।
(2014)
Answer : अधिकारी तंत्र जो ब्रिटिश विरासत है स्वभाव से ही परिवर्तन विरोधी है जबकि वर्तमान समाज परिवर्तनशील है। अधिकारी तंत्र स्वयं को बदलते परिवेश में अनुकूलित नहीं कर पा रहा है। अब नियामक रूपी अधिकारी तंत्र की नहीं ऐसे तंत्र की जरूरत है जो, मार्गदर्शक, सहायक, दार्शनिक के रूप में कार्य करे।
बदलते समाज एवं मानसिकता के साथ समस्याओं का रूप भी बदल रहा है। ऐसे में सामान्यज्ञों की नहीं विविध विशेषज्ञों की आवश्यकता है। इसी कारण ....
Question : लोक प्रशासन की ज्ञानमीमांसीय (एपिस्टेमोलॉजिकल) स्थिति से आने वाले उसके विविक्त पक्षों पर उत्तर संरचनावादी परिप्रेक्ष्य के क्या निहितार्थ हैं?
(2014)
Answer : लोक प्रशासन की ज्ञानमीमांसीय स्थिति का आशय जब लोक प्रशासन एक विषय के रूप में स्वयं को स्थापित कर रहा था उस समय इसके विभिन्न पक्षों पर जो विचार थे और जब इसने अपने सिद्धांतों को पूर्ण रूप से विकसित कर लिया और लोक प्रशासन को एक संरचना प्रदान की है। इसके साथ लोक प्रशासन के विकास के तीसरे चरण में इनकी अलोचना का दौर शुरू हुआ।
भविष्यवादियों जैसे पीटर ड्रकर, रॉबर्ट रिच, जॉन नैसबिट और ....
Question : “समकालीन युग में उत्तर-औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं के सन्दर्भ में टेलर के विचारों में आशोधन की आवश्यकता है।” तर्कों के द्वारा इसको सही सिद्ध कीजिए।
(2014)
Answer : टेलर द्वारा वर्णित वैज्ञानिक प्रबंध के सिद्धांतों को विश्व भर में तेजी से विकास एवं प्रसार हुआ क्योंकि इन सिद्धांतों से न केवल परम्परागत प्रबंध की कमियों की पूर्ति हो रही थी बल्कि एक सीमा तक ये सिद्धांत श्रमिक विकास, उद्यमों की कुशलता, मितव्ययिता तथा तार्किकता से ओत-प्रोत थे।
वैज्ञानिक प्रबंधन विचारधारा ने संगठन में विवेकशीलता पूर्वानुमान, क्षमता विशेषीकरण तथा तकनीकी योग्यता पर बल प्रदान किया। परन्तु उत्तर औद्योगिक अर्थव्यवस्था में टेलर के सिद्धांतों को ज्यों ....
Question : मैकग्रेगर के अनुसार, “वास्तविक संव्यावसायिक सहायता सेवार्थी के साथ ईश्वर का अभिनय करने में नहीं है, बल्कि सेवार्थी के अधिकार में संव्यावसायिक ज्ञान और कौशल सामने रख देने से है”।
उपरोक्त के प्रकाश में सही साबित कीजिए कि थियोरी y किस प्रकार सांकेतिक है और ओदशात्मक नहीं है।
(2014)
Answer : मैकग्रेगर ने उपरोक्त कथन अपनी पुस्तक- ‘द “यूमनसाइड ऑफ इंटरप्राइज’ (1960) में दिये हैं। मैकग्रेगर का कथन है कि क्लासिक संगठनों की सबसे केन्द्रीय विषयवस्तु है सत्ता, अर्थात प्रबंधकीय नियंत्रण अत्यावश्यक है। यहां हमें नियंत्रण नहीं प्रभाव को समझना होगा। संव्यावसायिक सहायता में नियंत्रण नहीं प्रभाव होता है। प्रोफेशनल सहायता का अर्थ यह नहीं है कि ग्राहक को भगवान मानकर उसकी पूजा की जाए, उसे खुश रखने का प्रयास किया जाए, दूसरी ओर वह उन ....
Question : ‘‘अनौपचारिक संगठन की धारणा विविध और अव्यवस्थित रूप से फैली हुई अंतर्वस्तुओं की अवशिष्ट या कैफिटेरिया संकल्पना है।’’ गोल्डनर किस प्रकार से ‘औपचारिक’ और ‘अनौपचारिक’ संगठन के बीच अंतरांगुलीयकरणों (इंटरडिजिटेशन्स) को समझने की आवश्यकता स्थापित करता है?
(2014)
Answer : मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। अतः वह प्रशासनिक समुदाय में रहते हुए अथवा किसी औपचारिक संगठन में कार्य करते हुए अपनी इच्छा, शौक एवं दिलों के अनुरूप कुछ छोटे तथा अस्थायी संगठन बना लेता है। इन्हें अनौपचारिक संगठन कहते हैं। गोल्डनर के अनुसार, यह विविध और अव्यवस्थित रूप से फैली हुई अतंर्वस्तुओं का संकलन है।
वास्तव में यह कैफेटेरिया संकल्पना है। औपचारिक तथा अनौपचारिक संगठन एक ही स्थान पर एक साथ प्रवर्तित हो सकते हैं। अनौपचारिक ....
Question : उत्तर-वैश्वीकरण युग के सन्दर्भ में रिग्स की विभेदीकरण की संकल्पना का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
(2014)
Answer : रिग्स की विभेदीकरण की संकल्पना कहती है कि प्रकीर्णित समाज एक विशेषीकृत समाज होता है जिसमें प्रत्येक कार्य के लिए एक विशेषीकृत संस्था होती है जो संख्या में दस होती है। वे विशेषज्ञता को प्रकीर्णित या विकसित समाजों का लक्षण बताते हैं और कहते हैं कि विकास के विभिन्न अवस्थाओं से गुजरकर प्रत्येक समाज इसी अवस्था को प्राप्त करना चाहती है।
लेकिन 1990 के दशक से जब से वैश्वीकरण का शुभारम्भ हुआ रिग्स के विचार इन ....
Question : वाई. ड्रॉअर के अनुसार, “किसी-न-किसी प्रकार काम निकालने का विज्ञान, नीति-निर्माण में जड़त्व-समर्थक और नवाचार-विरोधी विचारों का अनिवार्यतः प्रबलन है।” टिप्पणी कीजिए।
(2014)
Answer : वाई. ड्राअर के अनुसार नीति निर्माण पर ही किसी देश का भविष्य टिका होता है। ऐसे में इसमें लिंडब्लाम का ‘इन्क्रीमेंटल मॉडल एप्रोच’ या किसी न किसी प्रकार का काम निकालने का विज्ञान नीति निर्माण के उद्देश्य को ही खत्म कर देता है। वाई. ड्राअर के अनुसार, नीति का निर्माण राजनीतिक कार्यपालिका द्वारा देश की जनता की भलाई के लिए किया जाता है परन्तु नीति निर्माण का यह एप्रोच राजनीतिक पार्टियों को स्वयं अपने भविष्य ....
Question : ‘‘निर्णय ‘संगठनों’ द्वारा नहीं किए जाते हैं, बल्कि वे संगठनों के सदस्यों के रूप में व्यवहार करते हुए ‘मानवों’ द्वारा किए जाते हैं।’’ अकेले किसी एक कर्मचारी के निर्णयों और संगठनात्मक प्राधिकार के बीच के सम्बन्ध को बर्नार्ड और साइमन किस प्रकार परिकल्पित करते हैं?
(2013)
Answer : निर्णय किसी एक आधार पर आधारित दो या दो से अधिक संभव विकल्पों में चयन प्रक्रिया है। इसके अंतर्गत प्रबंधक किसी दी हुई परिस्थिति में कार्य के संबंध में किसी ठोस प्रक्रिया को निर्धारित करता है। बर्नार्ड के अनुसार निर्णय एक ऐसी प्रविधि है जिसके आधार पर विकल्पों की परिधि को संकुचित किया जाता है। बर्नार्ड के अनुसार निर्णयन प्रायः अग्रलिखित तीन परिस्थितियों में उत्पन्न होते हैं-
Question : ‘‘विभिन्न सार्वजनिक वस्तुएं और सेवाएं प्रदान करने के लिए, भिन्न-भिन्न संगठनात्मक व्यवस्थाओं की विविधता का इस्तेमाल किया जा सकता है।’’ इस प्रस्थापना की तह में सिद्धान्त को और उसके सम्भाव्य योगदान को स्पष्ट कीजिए।
(2013)
Answer : वर्तमान समय में लोक प्रशासन में सरकार की भूमिका कम करने और नौकरशाही के एकाधिकार को तोड़ने पर बल दिया जा रहा है। इसके लिए लोक सेवाएं प्रदान करने का अधिकार अनेक संस्थाओं को देने पर बल दिया जा रहा है, ताकि सेवाएं प्रदान करने में दक्षता एंव मितव्ययिता लाई जा सके।
इसका महत्वपूर्ण समर्थक लोक विकल्प विचारधारा है जिसमें यह तर्क दिया गया है कि लोक सेवाएं प्रदान करने का अधिकार निजी क्षेत्र को दिया ....
Question : ‘‘संगठनात्मक विश्लेषण में, सदैव ही लिंग कहीं न कहीं से बीच में आ जाता है।’’ (गोल्डनर)। तर्क प्रस्तुत कीजिए।
(2013)
Answer : संगठनात्मक सिद्धांत में कार्यविभाजन, कार्यदक्षता में सुधार, पदसोपान इत्यादि सिद्धांत पर बल दिया गया परंतु इसमें कार्य करनेवाले कार्मिक के रूप में सिर्फ पुरुष को ही ध्यान में रखकर सिद्धांत का निर्माण किया गया। सिद्धांत के निर्माण में प्रारंभिक चरण से ही लिंग की संस्कृति पर ध्यान नहीं दिया गया। इसमें कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए अनेक तरीकों को विकसित करने पर बल दिया गया। परंतु इस पर ध्यान नहीं दिया गया कि पुरुष कार्मिक ....
Question : प्रशासनिक संभ्रांत वर्गवाद क्या होता है? यह लोक प्रशासन में किस प्रकार विकसित हो जाता है? ऐतिहासिक उदाहरणों के हवाले के साथ अपनी अनुक्रिया को सविस्तार स्पष्ट कीजिए।
(2013)
Answer : प्रशासनिक संभ्रांत वर्गवाद वह है जो प्रशासन के क्षेत्र में अपने पद और दायित्व के अनुसार संगठन व समाज में एक विशेष स्थिति प्राप्त कर लेता है। प्रशासनिक संभ्रांत वर्गवाद का विकास लोक प्रशासन में अनेक कारणों से विकसित हो जाता है। मुद्रा अर्थव्यवस्था की स्थापना से लोक प्रशासन में इस वर्ग का उदय हो जाता है। यह प्रक्रिया तब शुरू हुई थी जब यूरोप मध्य युग से निकला। जनसंख्या में वृद्धि, जटिल प्रशासनिक समस्याओं ....
Question : ‘‘अधिकांश मामलों में, अफ्रीका, एशिया और लातिनी अमेरिका के राष्ट्रों के नए सिरे से स्वतंत्र हुए राज्य, अपनी भिन्नताओं के बावजूद संक्रमण काल में है।’’ (फैरल हैडी)। उनके प्रशासनिक प्रारूपों (संस्कृतियों) की विशिष्टताओं के सूचक कौन-से साझे अभिलक्षण हैं?
(2013)
Answer : किसी भी समाज के सांस्कृतिक मूल्य अपरिवर्तनीय नहीं होते। संस्कृति परिवर्तनशील है और संस्कृति तथा प्रशासन में निरंतर परस्पर क्रिया होती रहती है। एशिया और अफ्रीका के विकासशील राष्ट्रों में उनका उपनिवेशवादी शासन से मुक्त होना, सर्वव्यापी निर्धनता और निरक्षता से अपने समाजों को बाहर निकालने के लिए तीव्र आर्थिक विकास और आधुनिकीकरण, उनके लोगों की बढ़ती हुई आकांक्षाएं तथा निराशाएं, भौतिक दृढ़ीकरण की विवशताएं आदि ने सामूहिक तौर पर उनकी पारस्परिक संस्कृतियों तथा उनके ....
Question : ‘रिग्स का समाजों का संयोजित, प्रिज्मीय और विवर्तित में वर्गीकरण विभेदीकरण की संकल्पना के इर्दगिर्द निर्मित है।’ विश्लेषण कीजिए।
(2012)
Answer : रिग्स ने न केवल प्रिज्मीय समाजों का, बल्कि विवर्तित समाजों को भी विश्लेषण किया तथा विश्लेषण के लिए दो नये मानकों का चयन कियाः
विवर्तन से तात्पर्य है-नई संरचनाओं का उभरना, जबकि एकीकरण से तात्पर्य है-इन संरचनाओं के कार्यों में समन्वय। अपने इस प्रतिमान में रिग्स ने रेखांकित किया कि सभी प्रिज्मीय समाज एक ही श्रेणी में नहीं रखे जाते और न ही सभी विवर्तित समाज एक ही श्रेणी में रखे जा सकते हैं।
Eo-Prismatic ....
Question : नेतृत्व संगठन के नेमी निदेशों के साथ यांत्रिक अनुपालन के अतिरिक्त ‘प्रभावात्मक वृद्धि’ होता है (काट्ज और काह)। विश्लेषण कीजिए।
(2012)
Answer : काट्ज और कान ने नेतृत्वकारी कार्यों के तीन स्तरों की पहचान की है। इनका प्रभाव संगठन की संरचना पर अलग-अलग होता है। इस मायने में यह आपस में भिन्न हैं। संस्थानिक स्तर पर शीर्षस्थ नेतृत्व का काम समूची संरचना का खाका तैयार करना और उसे बनाकर उसके लिए नीतियों का निर्माण करना होता है। इसके नीचे निरीक्षक और पर्यवेक्षक होते हैं, जो बीच के स्तर पर सामान्य नीतियों के दायरे में अपना काम करते हैं।
विशिष्ट ....
Question : ‘नीति निर्णयनों में वास्तविकता निर्णयन, मूल्य निर्णयन और साधनात्मक निर्णयन शामिल होते हैं’ (जोफ्रे विकर्स)। सविस्तार स्पष्ट कीजिए।
(2012)
Answer : नीति निर्माण का काम क्रियाकलाप का निर्देशन करना, उनमें समन्वय लाना तथा निरंतरता उत्पन्न करना है। इसके लिए नीति-निर्माणकारी निकाय जिम्मेदार होता है। निर्णय-अभिग्रहण का प्रयोजन इस प्रकार से लागू होने वाली नीतियों को प्रभावी बनाना है।
नगरपालिका तथा सरकारी विभाग जैसी संस्थाएं समाज में अनेक प्रकार के संबंधों के नियमन में संलग्न हैं। सड़क का उपयोग करने वालों के लिए सड़कों का विकास व उनकी मरम्मत करनी पड़ती है। विविध वर्ग के छात्रें के लिए ....
Question : टेलर का ‘वैज्ञानिक प्रबंधन’ या चिरसम्मत् अभिप्रेरण थियोरी किन-किन बातों में गुलिक, उर्विक आदि के द्वारा प्रतिपादित चिरसम्मत् संगठनात्मक थियोरी से भिन्न है?
(2012)
Answer : टेलर ने व्यक्तिगत दक्षता लाकर उत्पादकता बढ़ाने पर बल दिया ताकि श्रम, समय व संसाधनों के अपव्यय को रोका जा सके। टेलरवाद की एंटोनियो ग्रामसी की मीमांसा भी इन्हीं लक्ष्यों को प्राप्त करने की चेष्टा करता है और इसके लिये 3 Es पर बल देता है। (Economy, Efficiency, Effectivness)टेलर ने दक्षता बढ़ाने के लिये कई तकनीकें प्रस्तुत की थीं, जिससे कि सामाजिक-मनोवैज्ञानिक परिवर्तन हो सके।
उसी आधार पर सूचना प्रौद्योगिकी ....
Question : टेलरवाद की ऐंटोनियो ग्रामसी की मीमांसा उसके सामाजिक-मनोवैज्ञानिक आधारों पर क्या नया प्रकाश डालती है?
(2012)
Answer : टेलर तत्कालीन औद्योगिक संगठनों में विद्यमान कार्य संस्कृति से सन्तुष्ट नहीं था, अतः उसने वैज्ञानिक प्रबन्धन के रूप में एक नयी कार्य संस्कृति प्रस्तुत की तथा इस कार्य संस्कृति के दर्शन में उन तत्वों को अथवा लक्ष्यों को रेखांकित किया, जिन्हें टेलर प्राप्त करना चाहता था। टेलर के वैज्ञानिक प्रबन्धन की मुख्य विशेषताएं हैं-
Question : ‘परिबद्ध युक्तता’ के साइमन के मूल विचार’ के तीन अभिलक्षण हैं: विकल्पों की खोज, संतोषकता और आकांक्षा अनुकूलन। सविस्तार स्पष्ट कीजिए।
(2012)
Answer : साइमन ने परम्परागत शास्त्रीय चिन्तकों द्वारा प्रदान पूर्ण तार्किकता की अवधारणा का खण्डन किया और इसके स्थान पर ‘सीमित तार्किकता’ की अवधारणा प्रस्तुत की।
साइमन के अनुसार संगठन में वास्तविक परिस्थितियों में पूर्ण तार्किकता के स्थान पर केवल सीमित तार्किकता विद्यमान होती है। साइमन रेखांकित करते हैं कि यद्यपि निर्णयकर्ता निर्णय लेना चाहते हैं, लेकिन अग्रलिखित कारक उसकी तार्किकता सीमित कर देते हैं:
व्यक्तिगत कारकः साइमन के अनुसार निर्णयकर्ता के व्यक्तिगत मूल्य, भावनायें, पूर्वाग्रह, अतीत का अनुभव, ....
Question : ‘आकस्मिकता थियोरी रूपावली का सार यह है कि संगठन की संगठतात्मक प्रभाविता, उसकी संरचना के सदृश संगठन के अभिलक्षणों को ऐसी आकस्मिकताओं के साथ संयोजन कर देने का परिणाम होती है, जो संगठन की परिस्थिति को प्रतिबिंबित करती हैं।’ आप इस कथन पर अपनी प्रतिक्रिया लिखिए।
(2012)
Answer : आकस्मिकता दृष्टिकोण ने रेखांकित किया कि वातावरण अपनी प्रकृति से दो प्रकार के हो सकते हैं-
स्थिर वातावरण वे वातावरण है, जहाँ सूचनाओं का प्रवाह अत्यधिक धीमा होता है। जबकि गतिशील वातावरण वह वातावरण है, जहां सूचनाओं का प्रवाह अपेक्षाकृत अधिक तीव्र होता है। आकस्मिकता उपागम सुझाव देता है कि वातावरण की प्रकृति के अनुरूप सांगठनिक संरचना का विकास होना चाहिये। स्थिर वातावरण के लिये यान्त्रिक नौकरशाही एक उपयोगी संरचना है, जबकि गतिशील ....
Question : ‘राज्य उद्देश्य’ (स्टाट्सराइसन) के इस अमूर्त विचार के संतघोषण में अधिकारी-तंत्र की अपनी स्वय की शक्ति के परिरक्षण की दशाओं की निश्चित मूल-प्रवृत्तियां अभिन्न रूप से ग्रथित रहती है’ (वेबर)। स्पष्ट कीजिए।
(2012)
Answer : वेबर ने सामाजिक परिघटनाओं का विश्लेषण करते हुये देखा कि समाज कुछ लोग आदेश क्यों देते हैं, जबकि अन्य आदेश का पालन क्यों करते हैं, अर्थात् समाजों में सत्ता का प्रतिष्ठान कहाँ होता है। इस प्रश्न का विश्लेषण करते हुये मैक्स बेवर ने तीन संकल्पनाओं को जन्म दिया-शक्ति, प्राधिकार और नौकरशाही।
वेबर के विश्लेषण का मुख्य केन्द्र विधिक-तार्किक प्राधिकार रहा, जिसमें आदेश का पालन र्नित्यक्तिकता व वस्तुनिष्ठता के कारण होता है। वेबर ने इस प्राधिकार को ....
Question : ‘अपेक्षाकृत अधिक सुविज्ञ स्तर पर, सार्वजनिक वरण का सरोकार’ पैरिटो इष्टतमता’ के साथ है, या कम से कम “पैरिटो सुधारों” के साथ है।’ टिप्पणी कीजिए।
(2012)
Answer : सार्वजानिक वरण का सिद्धान्त राज्य की भूमिका सीमिति करने का पक्षधर है। तृतीय विश्व के देशों में आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा भूख, अकाल, गरीबी, निरक्षरता एवं बेरोजगारी से ग्रस्त है और वरण की स्वतन्त्रता इनके लिये अर्थहीन है, लेकिन विकल्प की स्वतन्त्रता उसके लिये अर्थपूर्ण है, जो क्रय शक्ति से पूर्ण व साधन सम्पन्न है।
उदाहरण के लिये, भारत के संदर्भ में देखें, तो लोगों के तीन स्तर स्पष्ट दिखते हैं। ये हैं- इंडिया-उच्च ....
Question : क्या आपके विचार में डाइसी की विधि की संकल्पना में अनसुलझा और अक्सर नजरअंदाज किया जाने वाला तनाव है, यह सोचते हुए कि अंग्रेजी सांविधिक प्रणाली में संसदीय प्रभुसत्ता का अन्य सिद्धांत इसके विरोध में हैं।
(2012)
Answer : डायसी का विश्लेषण कदाचित यथार्थ से परे है। डाइसी को न केवल प्रशासनिक विधि की अपूर्ण जानकारी थी, बल्कि विधि के शासन के संदर्भ में भी उसके विचार अवास्तविक थे। उल्लेखनीय है कि विधि के शासन को पूर्णता में प्राप्त करना अत्याधिक कठिन है। विधि के शासन की मूल मान्यतायें जैसे ‘विधि के समक्ष समानता’ को पूर्णता में प्राप्त करना सम्भव नहीं, क्योंकि प्रत्येक राष्ट्र में उच्च संवैधानिक प्राधिकारियों को उन्मुक्तियाँ प्राप्त होती हैं। (जैसे-भारत ....
Question : क्या कारण है कि ‘ला ड्रीएट एडमिनिस्ट्राटिफ’ को नेपोलियन संहिता के साथ-साथ फ्रांसीसी विधिक विज्ञान की सबसे ज्यादा उल्लेखनीय उपलब्धि माना जाता है?
(2012)
Answer : फ्रांस की प्रशासकीय विधि प्रशासनिक अधिकारियों के अधिकारों एवं कर्तव्यों के वे सिद्धांत हैं, जिनके आधार पर राजसत्ता के प्रतिनिधि के रूप में राज्य के कर्मचारियों और जनता के पारस्परिक व्यवहार का निर्णय एवं नियंत्रण होता है।
फ्रेंच डॉयट एडमिनिस्ट्रेशन फ्रांस की प्रशासकीय विधि थी, जिसमें कर्मचारियों का उत्तरदायित्व सरकार का उत्तरदायित्व माना जाता है। अतः फ्रांस में जब सरकारी अधिकारी अपने उत्तरदायित्वों के निर्वाह में कोई गलती करती है, तो प्रभावित नागरिक द्वारा उनके विरुद्ध ....
Question : क्या आप बैकराख और वराट्ज के साथ सहमत होंगे कि निर्णयों के साथ-साथ अनिर्णय भी नीति का भाग होते हैं? अपने उत्तर के लिए कारण प्रस्तुत कीजिए।
(2012)
Answer : नीति निर्माण किसी भी सरकार द्वारा घोषित कार्य करने का एक तरीका है, जो किसी दिए गये वातावरण में विशिष्ट उद्देश्यों को प्राप्त करने से सम्बन्धित होता है। नीति निर्माण के निर्णय में व अनिर्णय दोनों शामिल हैं।
उदाहरण के लिए जब विभिन्न वर्गों की मांगों को क्रमबद्ध करके महत्वपूर्ण मांग को स्वीकार करने का निर्णय लिया जाता, तब वही कई मांगों पर अनिर्णय की स्थिति होती है, क्योंकि अन्य लोगों को भी निर्णय प्रक्रिया में ....
Question : एम.पी. फॉलेट के अनुसार द्वंद्व समाधान का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। समझाइए कि जटिल संगठनों के संदर्भ में, मैक्ग्रेगर उसके विचारों को किस प्रकार आगे ले गया था?
(2011)
Answer : प्रशासनिक विचारकों में मेरी पार्कर फॉलेट को प्रथम महिला विचारक के रूप में जाना जाता है। इनके द्वारा दिए गए विचारों में द्वंद्व समाधान या विवाद समाधान प्रमुख हैं। उन्होंने किसी भी संगठन में विवाद को अवश्यंभावी बताया। यह विचारों तथा हितों में विभिन्नताओं के कारण उत्पन्न होता है। लेकिन विवाद हमेशा विनाशकारी नहीं होता, यह सृजनात्मक भी हो सकता है, ऐसा होना इस बात पर निर्भर करता है कि द्वंद्व को किस रूप में ....
Question : जबकि डाउन्स का मॉडल अधिकतर मनोवैज्ञानिक अभिप्रेरणा की थ्योरी पर निर्भर करता है, निस्कानन का मॉडल नव-क्लासिकी विचारणा के द्वारा रचित है।
उपर्युक्त कथन के प्रकाश में, निर्णयन के लोक वरण उपागम पर चर्चा कीजिए।
(2011)
Answer : किसी समस्या के संदर्भ में उपलब्ध कई सारे विकल्पों में से किसी एक विकल्प का चयन करना निर्णयन कहलाता है। एक व्यवस्था का प्रमुख कार्य एवं गतिविधि निर्णय निर्माण है। निर्णय के लोकवरण उपागम का मूल उद्देश्य यह है कि निर्णय करते वक्त इस बात का ध्यान रखा जाए कि निर्णय लोगों द्वारा स्वीकार्य हो। निर्णय को अधिकाधिक स्वीकार्य या लोकवरण युक्त बनाने के लिए अनेक विद्वानों ने प्रयास किये हैं। इनमें डाउन्स एवं निष्कासन ....
Question : संगठनात्मक विश्लेषण के लिए तंत्र उपागम आज तक भी प्रासंगिक है। चर्चा कीजिए कि अध्ययन के अपने-अपने क्षेत्रें में इस उपागम को चैस्टर बर्नार्ड और डेविड ईस्टन ने किस प्रकार ग्रहण किया?
(2011)
Answer : चेस्टर बर्नार्ड को मूल रूप से एक व्यवहारवादी माना गया है, क्योंकि उन्होंने प्रबंध के मनोवैज्ञानिक पक्ष पर बल दिया था। इसके साथ ही उन्हें व्यवस्थावादी भी माना जाता है क्योंकि वे संगठन को एक सामाजिक व्यवस्था के रूप में देखते हैं। बर्नार्ड की पुस्तक ‘दी फंक्शन ऑफ दी चीफ एक्सीक्यूलिव’ एवं ‘दी ऑर्गनाइजेशन एंड मैनेजमेंट’ के माध्यम से हमें उनके तंत्र उपागम या व्यवस्थावादी उपागम के सिद्धांत के बारे में जानकारी मिलती है।
इस उपागम ....
Question : न तो एडवर्ड वाइडनर और न ही फ्रैड रिग्स विकास प्रशासन के प्रक्रम का पर्याप्त रूप से वर्णन कर पाए थे। उनके सैद्धांतिक विश्लेषणों में त्रुटियों और दुर्बलताओं को स्पष्ट कीजिए।
(2011)
Answer : 1950 के दशक के बाद विकासशील देशों के लिए विकास प्रशासन के रूप में एक नवीन अवधारणा का जन्म हुआ। एक तरह से इसे विकास का पर्याय माना गया। अन्य विद्वानों के साथ-साथ एडवर्ड वाइडनर एवं फ्रैड रिग्स ने विकास प्रशासन को परिभाषित करने का एक बड़ा प्रयास किया है।
एडवर्ड वाइडनर को विकास प्रशासन का सबसे बड़ा भाष्यकार माना जाता है। वाइडनर के अनुसार विकास प्रशासन एक ऐसी प्रक्रिया है, जो संगठन के प्रगतिशील राजनीतिक, ....
Question : नेहरूवी मॉडल से उदारीकरण मॉडल तक विकास के इतिवृत में, मील के पत्थरों का उल्लेख कीजिए।
(2011)
Answer : स्वतंत्रता के उपरांत भारत की जर्जर अर्थव्यवस्था को सही दिशा देने एवं लोगों के सामाजिक-आर्थिक विकास को ध्यान में रखते हुए योजनाबद्ध नियोजन की प्रणाली को अपनाया गया। बड़े तथा भारी उद्योगों के निर्माण पर बल दिया गया और कहा गया कि इसके द्वारा धीरे-धीरे विकास की ओर बढ़ा जाएगा, इसे ही नेहरूवियन मॉडल की संज्ञा दी गई। परंतु 1990 के दशक तक आते-आते स्थितियों में बड़ा परिवर्तन हुआ और भारत के उदारीकरण का रास्ता ....
Question : ड्रौर का इष्टतम मॉडल, मितव्ययी तर्कसंगत मॉडल का अतिरिक्त तर्कसंगत मॉडल के साथ संलयन है।
(2011)
Answer : लोक नीति जटिल कार्य के संदर्भ में ड्रोर ने बड़ा कार्य किया है, उन्होंने लोक नीति के लिए विभिन्न प्रकार के मॉडल का विकास किया जैसे, विशुद्ध-तार्किकता मॉडल, आर्थिक नजरिए से तार्किक मॉडल, संतुष्टि प्रदायक मॉडल तथा तार्किकेतर प्रक्रिया मॉडल। परंतु इन प्रतिमानों का विश्लेषण करने पर इनके दोष उजागर हो जाते हैं। ऐसे में ड्रोर उस इष्टतम मॉडल का सुझाव देते हैं जो दूसरे मॉडलों के दोष की उपेक्षा करते हुए उन्हें सशक्त बनाए ....
Question : ‘‘मैक्ग्रेगर के विचार में, प्रबंधकीय ब्रह्मांडिकी (कॉस्मोलॉजी) प्रबंधक की समझ और उसके भूमिका बोध के प्रति अर्थपूर्ण तरीके से ध्यान केंद्रित करती है। स्पष्ट कीजिए।
(2010)
Answer : मैकग्रेगर एक ऐसे विचारक रहे हैं, जिन्होंने सिद्धांत एवं ब्रह्माण्डिकी के क्षेत्र में अपने विचारों को सफलतापूर्वक लोगों के सामने रखा है। उनके इन्हीं प्रयासों के चलते सामाजिक घटनाओं के पूर्वानुमान निकाले जा सके, जो किसी व्यक्ति की विश्वदृष्टि एवं विश्वबोध का द्योतक है। उनका मानना था कि किसी प्रबंधक की संगठनात्मक यथार्थ दृष्टि उसके प्रबंधकीय कामों में गहरी छाप छोड़ती है। प्रबंधक की समझ उसके लक्ष्यों व संगठन के लक्ष्यों की उपलब्धि को प्रभावित ....
Question : “सफल प्रबंधन नेता लिकर्ट के संगठनात्मक नेतृत्व के प्रति ‘तंत्र-4’ उपागम में पाए जाते हैं।’’ परीक्षण कीजिए।
(2010)
Answer : संगठनात्मक नेतृत्व के संबंध में लिकर्ट ने चार प्रकार के तंत्र या शैलियां बनाई हैं, जो निम्नलिखित हैं:
रेंसिस लिकर्ट के अनुसार सफल प्रबंधन नेता तंत्र-IV उपागम में पाए जाते हैं। यूं तो निकर्ट के अनुसार, सीधे तंत्र-प्ट में नहीं पहुंचा जा सकता क्योंकि यह एक सतत् प्रक्रिया है, किन्तु नेतृत्व की इस शैली को ही उन्होंने सर्वश्रेष्ठ माना है एवं इसके पीछे निम्नलिखित कारण बताए हैं:
Question : “साइमन द्वारा निर्णयन की लोक प्रशासन के आधारभूत क्षेत्र के तौर पर पहचान, तार्किक रूप से स्वीकार्य प्रतीत होता है परन्तु उसका निर्णयन को प्रत्यक्षवादी मजबूती के साथ प्रस्तुत करना समस्यापूर्ण है।” इस कथन का समालोचनापूर्वक परीक्षण कीजिए?
(2010)
Answer : हरबर्ट ए साइमन अमेरिका के विख्यात राजनीतिक और सामाजिक वैज्ञानिक हैं। प्रशासनिक चिंतन में उनका योगदान उनके लेखों व पुस्तकों के रूप में दृष्टिव्य है, जिनमें प्रमुख हैं- प्रशासकीय व्यवहार (1947), फंडामेंटल रिसर्च इन एडमिनिस्ट्रेशन (1953), आर्गेनाइजेशंस (1958) आदि। निर्णय लेने की प्रक्रिया का विश्लेषण करने सम्बन्धी उनके योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें 1978 में नोबेल पुरस्कार दिया गया। हरबर्ट साइमन ने निर्णयन को प्रशासन का हृदय बताया है तथा संगठन को निर्णायकों (निर्णय ....
Question : “नव लोक प्रशासन-----शब्दों में एक क्रांति या आमूल परिवर्तनवाद है और (अपने अच्छे से अच्छे रूप में) कौशलों या प्रौद्योगिकियों में यथापूर्ण स्थिति है।”
(2009)
Answer : नवलोक प्रशासन लोक-प्रशासन की विषय-विकास यात्र में महत्वपूर्ण चरण रहा है, जो कि अपनी नवीन विशेषताओंके कारण विषय में ‘प्रथम नवप्रवर्तन’ (फर्स्ट रिइन्वेशन) की संज्ञा रखकर विषय विकास में एक प्रतिमानीय परिवर्तन है। वस्तुतः नवलोक प्रशासन 1970 के दशक में सामाजिक सार्थकता, सक्रियता तथा प्रासंगिकतावाद के लिए लोक प्रशासन के युवा विद्वानों द्वारा चलाया गया एक आंदोलन था, जो कि विषय की नई पहचान एवं पुनर्स्थापना से भी जुड़ा था।
विषय विकास के चतुर्थ चरण (1948-70 ....
Question : “टेलर के योगदान कार्य को दक्षतापूर्ण सुव्यवस्थित करने के लिए सामान्य सिद्धांतों का एक सैट नहीं था बल्कि प्रचालन विधियों का ऐसा सैट था, जिसके अनुप्रयोग को निरापद करने के लिए, जिसको प्रत्येक मूर्त स्थितियों में उपयोग में लाया जा सकता है।”
(2009)
Answer : 19वीं सदी के अंत तथा 20वीं सदी के प्रारंभ में अमेरिकी औद्योगिक समस्याओं के निराकरण हेतु वैज्ञानिक प्रबंधन तकनीकों का प्रयोग करने वाले फ्रेडरिक विन्सको टेलर प्रमुख व्यक्ति थे, जिन्होंने वैज्ञानिक प्रबंधन को संगठन के प्रथम क्रमबद्ध सिद्धांत के रूप में स्थापित किया। एक मजदूर से प्रबंधक तक की कैरियर अनुभवों के दौरान किए गए शोध कार्यों में टेलर द्वारा प्रबंधन को विशुद्ध विज्ञान मानते हुए औद्योगिक समस्याओं के निदान हेतु सार्वभौमिक उपयोग के सिद्धांतों ....
Question : “संगठन की बर्नार्ड साइमन थ्योरी आवश्यक रूप से अभिप्रेरण की एक थ्योरी है।”
(2009)
Answer : 1930-40 के दशक में प्रशासकीय अध्ययनों में प्रारंभ हुए अनुभववाद द्वारा संगठन की पूर्व धारणाओंको संशोधित करते हुए मानव व्यवहार के सैद्धांतीकरण के प्रयास किए, जिसमें कि चेस्टर बर्नार्ड तथा हर्बर्ट साइमन जैसे विद्वानों का योगदान सराहनीय है। लोक प्रशासन की क्लासिकल थ्योरी में मानव संबंध विचारधारा द्वारा किए गए सुधारों को आगे बढ़ाते हुए इन्होंने व्यवहारवादी विचार को स्थापित किया, जहां कि समाज तथा मनुष्य को प्रशासकीय अध्ययनों का केंद्र बिन्दु बनाया।
वस्तुतः बर्नार्ड एवं ....
Question : विकास प्रशासन में किस मॉडल (माडलों) के विशेष अभिलक्षण ‘वरणात्मकता,’ ‘प्राप्ति’ और ‘बहुप्रकार्यवाद’ होते हैं। तदनुरूप सैद्धांतिक मूलों एवं विशेष गुणों का वर्णन कीजिए।
(2009)
Answer : विकास प्रशासन की संकल्पना का विकास द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् नवउदित तृतीय विश्व के देशों की विशिष्ट सामाजिक-आर्थिक परिस्तिथयों में तीव्र विकास की आवश्यकता के संदर्भ में हुआ, जो कि इन देशों की स्थानिक परिस्थितियों में पश्चिमी मॉडल आधारित प्रशासनिक व्यवस्था में सुधारवादी आंदोलन था।
विकास प्रशासन शब्द का प्रयोग प्रथम बार 1955 में भारतीय विद्वान यू. एल. गोस्वामी द्वारा लेख ‘स्ट्रक्चर ऑफ डेवलपमेण्टएमडिनिस्ट्रेशन इन इण्डिया’ में किया गया।
परन्तु जार्ज ग्राण्ट विकास प्रशासन के पिता ....
Question : कहा जाता है कि “लोक संस्थाओं और सेवाओं के प्रबंधन की एक परम्परा के साथ, एक शताब्दी से अधिक समय में विकसित लोक प्रशासन के संदर्श को प्रबंधन की नवीनता से एक झटका लगा।”
पारंपरिक लोक प्रशासन के आंतरिक मूल्यों, उपागमों, और अभिगृहीतों को प्रकाश में लाइए और दर्शाइए कि नवलोक प्रबंधन ने उनको किस प्रकार और किस सीमा तक बदलने या सुरक्षित रखने के प्रयास किए हैं।
(2009)
Answer : हालांकि एक गतिविधि के रूप में लोक प्रशासन का अस्तित्व सभ्यता जितना पुराना ही है। परन्तु विषय के रूप में इसका अध्ययन लगभग एक सदी से कुछ अधिक पुराना नही है, इसे राज्य की बढ़ती गतिविधियों तथा सरकारों के सामाजिक संस्थाओं से पृथक होने पर आवश्यक प्रशासनिक पेशेवरों की मांग की पृष्ठभूमि में देखा जा सकता है, जिसके कि प्रारंभिक संकेत कैमरलवादी आंदोलन से मिलते हैं।
विषय के रूप में लोक प्रशासन के अध्ययन की शुरूआत ....
Question : वुडरो विल्सन से हर्बर्ट साइमन तक, लोक प्रशासन पर अधिकतर लेखकों ने दक्षता की प्राप्ति को केंद्रीय उद्देश्य के रूप में लिया है। प्रमुख लेखकों की रचनाओं का हवाले देते हुए इस कथन की सत्यता को साबित कीजिए।
(2009)
Answer : यद्यपि लोक-प्रशासन विषय की अकादमिक शुरुआत एक सदी पुरानी ही है, परंतु इसका क्रियात्मक अस्तित्व मानव के स्थाई जीवन तथा राजनीतिक व्यवस्था के उदय से ही है। पश्चिमी समाज में पैदा हुए लोकतंत्र, जनवाद, बुद्धिवाद तथा उदार नागरिक अधिकारों की पृष्ठभूमि में कल्याणकारी राज्य की अवधारणा का उदय हुआ।
राज्य के बढ़ते कार्य एवं क्षेत्रधिकार के साथ कार्यों की बढ़ती तकनीकियों की पृष्ठभूमि लोक-प्रशासन को पृथक विषय-वस्तु के रूप में देखना प्रारंभ हुआ, जिसका कि प्रारंभ ....
Question : “लोक प्रशासन का क्षेत्र कारोबार का एक क्षेत्र है।” (वुडरो विल्सन)
(2009)
Answer : लोक प्रशासन विषय के अकादमिक विकास की कड़ी में वुडरो विल्सन एक प्रमुख व्यक्ति थे, जिन्होंने विषय विकास तथा उसकी पृथक अस्तित्व की स्थापना हेतु बौद्धिक चिंतन की शुरुआत की। इनके द्वारा 1887 में ‘पालीटिकल साइंस क्वार्टरली’ नामक पत्रिका में लेख ‘द स्टडी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन’ लिखकर लोक प्रशासन के पृथक अस्तित्व के प्रयासों की शुरूआत की। इसी लेख के आधार पर ही विल्सन को ‘लोकप्रशासन के पिता’ की संज्ञा भी दी गयी (वाल्डो द्वारा)।
वस्तुतः यह ....
Question : “नीति निर्माण के मेहेजकेल ड्रोर के मानकीय मॉडलों में निम्नलिखित उपयोगिता के साथ संदर्श में शैक्षणिक होने की प्रवृत्ति रहती है।” टिप्पणी कीजिए।
(2009)
Answer : लोकनीति निर्धारण प्रक्रिया को समझने तथा नीतियों के क्रियान्वयन, मूल्यांकन एवं आकलन के साथ-साथ नीति प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में आने वाली बाधाओं का निराकरण के क्रम में एक विज्ञान के रूप में लोकनीति का अध्ययन करने की दृष्टि से मेहेजकेल ड्रोर का योगदान उल्लेखनीय है। चूंकि लोक नीतियां सार्वभौमिक होती हैं तथा प्रत्येक देश कुछ निश्चित नीतियों को अपनाता है। इसलिए तुलनात्मक अध्ययन की दृष्टि से नीति विज्ञान की प्रासंगिकता बढ़ जाती है।
नीति विज्ञान ....
Question : वुडरो विल्सन को लोक प्रशासन के जन्मदाता की संज्ञा देना, उनसे पूर्व में किए गए उनके बराबर के या उनसे भी ज्यादा लब्धप्रतिष्ठ योगदानों के प्रति अन्याय करना होगा।” टिप्पणी कीजिए।
(2008)
Answer : लोक प्रशासन का एक शास्त्र के रूप में या अध्ययन के विषय के रूप में विकास अमेरिका से माना जाता है। इसका सूत्रपात पोलिटिकल साइंस क्वार्टरली में प्रकाशित वुडरो विल्सन के द्वारा लिखित निबंध ‘दी स्टडी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन’ से हुआ। इस लेख में राजनीति तथा प्रशासन के बीच स्पष्ट भिन्नता दिखाई गई और घोषित किया गया कि प्रशासन को राजनीति से दूर रहना चाहिए।
वुडरो विल्सन के प्रयास लोक प्रशासन को एक विषय के रूप में ....
Question : नेता सही कार्य किया करते हैं, प्रबंधक कार्य को सही ढंग से करते हैं। (बेनिस) टिप्पणी कीजिए।
(2008)
Answer : नेता अर्थात् नेतृत्वकर्ता किसी भी कार्य की आवश्यकता की पहचान करता है। समाज या किसी भी संगठन में उसकी जरूरतों की पहचान करना, योजना बनाना तथा समस्याओं के हल की दिशा में कार्य करना नेता का कार्य है। प्रशासन में नेता की एक महत्वपूर्ण भूमिका है। यह नेता का ही गुण है जो किसी संगठन की सफलता या विफलता निर्धारित करता है।
अधिकतर प्रशासनिक संगठन अन्य किसी कारण की अपेक्षा दुर्बल नेतृत्व के कारण ही असफल ....
Question : मेरी पार्कर फॉलेट अपने समय से कहीं आगे थीं। चर्चा कीजिए।
(2008)
Answer : मेरी पार्कर फॉलेट का लोक प्रशासन के व्यवहारवादी उपागम में विशेष योगदान रहा। द्वितीय महायुद्ध के पश्चात लोक प्रशासन के क्षेत्र में व्यवहारवादी दृष्टिकोण एक महत्वपूर्ण उपागम बना। व्यवहारवादी दृष्टि के प्रणेता लोकप्रशासन में व्यक्तिशः और सामूहिक-प्रशासनिक एवं मानवीय व्यवहार के अध्ययन पर बल देते हैं। वस्तुतः यह उपागम लोक प्रशासन के अध्ययन हेतु प्रयुक्त परंपरागत उपागमों, जैसे ऐतिहासिक व संरचनात्मक के विरूद्ध एक प्रतिक्रिया है। प्रशासन के क्षेत्र में मनोवैज्ञानिक पद्धति का प्रयोग मिस ....
Question : सार्वजनिक जवाबदेही के उपकरण सही मायनों में प्रभावी केवल तभी हो सकते हैं जब लोग और उनकी संस्थाएं उत्तरदायी मीडिया द्वारा समर्पित, दृढ़तापूर्वक अग्रलक्षी हों। टिप्पणी कीजिए।
(2008)
Answer : मीडिया किसी भी समाज या देश की वास्तविक स्थिति का प्रतिबिम्ब होता है। उसकी शक्ति का आकलन उसकी व्यापक पहुंच के मद्देनजर किया जा सकता है।
किंतु इतनी शक्तियां और लगभग स्वतंत्र होने के कारण मीडिया की देश और समाज के प्रति महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी है। लोकमत के निर्माण में मीडिया की भूमिका सर्वाधिक सशक्त और महत्वपूर्ण होती है।
मीडिया द्वारा जनता की बात शासन तक और शासन संबंधी तथ्यों को जनता तक पहुंचाया जाता है। शिक्षा ....
Question : निर्णयन प्रक्रम में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले हर्बर्ट साइमन ने अपनी महत्वपूर्ण कृति ‘एडमिनिस्ट्रैटिव बिहैवियर’ में निर्णयों को लेना संभव है? सरकारी निर्णयों को और अधिक तर्कसंगत किस प्रकार बनाया जा सकता है?
(2008)
Answer : निर्णयन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले हर्बर्ट साइमन ने अपनी महत्वपूर्ण कृति ‘एडमिनिस्ट्रैटिव बिहैवियर’ में निर्णय प्रक्रिया में मूल्य वरीयताओं के संदर्भ में मानव व्यवहार का विश्लेषण किया। साइमन ने प्रशासन को कार्य कराने की कला मानते हुए उन प्रक्रियायों तथा विधियों पर बल दिया, जिनसे कार्यवाही सुनिश्चित हो। उनके अनुसार निर्णय लेना चयन की वह प्रक्रिया है, जिस पर कार्यवाही आधारित होती है। निर्णय से अभिप्राय तथ्यों और मूल्यों का उचित योग होता ....
Question : "मैकग्रेगर की थियोरी X और थियोरी Y का विश्लेषण कीजिये। क्या आप इस विचार से सहमत हैं कि हर गुजरते हुए वर्ष के साथ मैक्ग्रेगर का संदेश अधिक प्रासंगिक एवं अधिक महत्वपूर्ण होता रहा है।" अपने उत्तर को सिद्ध कीजिए?
(2007)
Answer : डगलस मैक्ग्रेगर ने मानव के सम्बन्ध में दो परस्पर विपरीत विचारों को प्रकट किया- प्रथम तो मूल रूप से नकारात्मक अैर निराशावादी है और द्वितीय आधार रूप से सकारात्मक एवं आशावादी है। इन्हें ‘X’ एवं ‘Y’ सिद्धांत के नाम से जाना जाता है। सिद्धांत X मूलतः प्रबन्ध का शास्त्रीय सिद्धान्त ही है।
यह इस विचारधारा पर आश्रित है कि स्वभावतः प्रत्येक मानव की प्रकृति कार्य से बचने की होती है, अस्तु उसे कार्य सम्पादन हेतु नकारात्मक ....
Question : "टेलर के वैज्ञानिक प्रबन्धन ने सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक कारकों को नजर अन्दाज किया था। टिप्पणी कीजिए"।
(2007)
Answer : एफ डब्लू टेलर वैज्ञानिक प्रबन्ध के जनक हैं। उनका कहना है कि-"वैज्ञानिक प्रबन्ध किसी विशिष्ट संगठन या उद्योग में कार्य करने वाले कार्मिक की दृष्टि में एक मानसिक क्रांति है।" मुख्यतः टेलर का यह मानना था कि उद्योगों के मालिकों, श्रमिकों तथा उपभोक्ताओं के हितों में कोई निहित मतभेद नहीं होते हैं बल्कि इनके हित परस्पर जुड़े होते हैं। चूंकि प्रबन्ध का मुख्य लक्ष्य अधिकतम कार्य कुशलता तथा सम्पन्नता का स्तर प्राप्त करना होता है, ....
Question : "लोक उद्यमों में स्वायतत्ता और जवाबदेही साथ-साथ नहीं चल सकते हैं।" स्पष्ट कीजिए।
(2006)
Answer : लोक उपक्रमों की परंपरागत प्रशासनिक संगठनों की नौकरशाही प्रणाली से दूर रखकर पृथक् अस्तित्व प्रदान किया जाता है। तुलनात्मक दृष्टि से इनको अधिक स्वतंत्रता प्राप्त थी संगठन अपने दैनन्दिन आंतरिक प्रशासन को इच्छानुसार संचालित कर सकते हैं। लेकिन यह प्रश्न बार-बार उठाया जाता रहा है कि स्वायत्ता की आड़ में लोक उपक्रम उस धन का दुरूपयोग करते हैं, जो जनता के कठोर परिश्रम के द्वारा एकत्र किया जाता है। स्वायत्ता का आशय उत्तरदायित्वों से मुक्त ....
Question : "लोक प्रशासन को अध्ययन के लिए और लोक प्रशासन संव्यावसायिकता के अमल के लिए साइमन के कार्य के प्रमुख निहितार्थ थे।" टिप्पणी कीजिये।
(2006)
Answer : जेम्स डी. कैरोल का कथन है- सूचना ज्ञान है, ज्ञान शक्ति है, प्रशासन शक्ति है। साइमन ‘प्रशासन’ को निर्णय लेने की प्रक्रिया में इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटरों के मानवी चिंतन की अनुकरणीय भूमिका पर शोध विश्लेषण, सिद्धांत और तार्किक निश्चयात्मकता की प्रणाली पर आधारित प्रशासन की एक नई अवधारणा; पारंपरिक सिद्धांतों और व्यवहार के बीच अंतर का प्रतिपादन; कृत्रिम इंटेलीजेन्स, सीमित तार्किकता से रूबरू कराना; निर्णयों को संतुष्टि की परिभाषा से जोड़ना, स्टाफ के कार्यों की परीक्षा, ....
Question : प्रशासन के क्लासिकीय विज्ञान (Classical Science) का, ड्वाइट वाल्डों और राबर्ट डहल के द्वारा उसकी आलोचना के विशेष हवाले के साथ समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
(2006)
Answer : संगठन की क्लासिकी विचारधारा के अनुसार संगठन किसी योजना की औपचारिक संरचना है, जो सुस्पष्ट सिद्धांतों के अनुरूप बहुत कुछ इमारत की योजना के अनुरूप है। जिस प्रकार मकान की योजना कुछ सिद्धांतों के आधार पर वास्तुकार के द्वारा बनायी जाती है, उसकी प्रकार संगठन का निर्माण भी कुछ सिद्धांतों के अनुरूप किया जाता है।
यह अवधारणा दो विश्वासों पर आधारित है। यथा-सिद्धांतों का एक समूह होता है, जिसके अनुसार निश्चित उद्देश्य तथा कार्य के अनुरूप ....
Question : मेरी पार्कर फोलैट के कार्य की मुख्य समस्या यह है कि उसका आदर्शवाद (Idealism) छुपा नहीं रहता है] स्पष्ट कीजिये।
(2006)
Answer : मौलिक विचारों को सहजता और सरलता से प्रस्तुत करने के मामले में फोलेट दुर्लभ क्षमता वाली प्रतिभाशाली लेखिका थीं। उनका लेखन व्यावहारिक बुद्धिमानी, गहरी आत्मदृष्टि, समग्र सोंच और बहुआयामी लोकतांत्रिक चेतना से परिपूर्ण है।
उनकी स्थापनायें- प्रतिवादी सामूहिक मनोविज्ञान व सामाजिक मनोविज्ञान के द्वारा व्यक्ति और समाज के बीच दूरी को हटाने का विचार, कोई हमें लोकतंत्र दे नहीं सकता बल्कि हमें सीखना है कि लोकतंत्र क्या है और इसके लिए सामूहिक मनोविज्ञान की जरूरत, सामूहिक ....