Question : भारत में बाढ़ों की बढ़ती हुई बारंबारता एवं तीव्रता का कारण बताइए और चिरकालिक बाढ़ प्रवण क्षेत्रें की ओर इशारा करते हुए अल्प और दीर्घ अवधि के उपचारात्मक उपाय सुझाइए
(2015)
Answer : बाढ़ से तात्पर्य जलमग्नता की स्थिति से है। यह जलीय चक्र में व्यवधान होने से उत्पन्न होता है। इससे कृषि योग्य भूमि, अधिवासीय क्षेत्र, अधिसंरचना जल प्लावित हो जाते हैं। यह आर्थिक एवं सामाजिक जीवन को प्रभावित करता है।
बाढ़ मुख्यतः प्राकृतिक कारणों जैसे अत्यधिक वर्षा, बादलों का फटना, वृहत नदी जलग्रहण क्षेत्र, अपर्याप्त अपवाह तंत्र के कारण उत्पन्न होता है। हाल के वर्षों में मानवीय क्रियाकलापों ने इसमें उत्प्रेरक का कार्य किया है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश, ....
Question : जलवायु परिवर्तन भारत की मरुस्थलीकरण प्रक्रिया को किस प्रकार प्रभावित करता है
(2015)
Answer : शुष्क क्षेत्रें में मृदा की उर्वरता में निरंतर कमी, उनमें नमी धारण करने की क्षमता में कमी आना तथा मृदा का आधारणीय उपयोग मरूस्थलीकरण कहलाता है। तीव्र गति से वाष्पीकरण एवं उच्च तापमान के कारण ह्यूमस की मात्र काफी कम हो जाती है।
भारत में वर्षा का वितरण असमान है। जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा वितरण में ज्यादा विषमता को देखा जा सकता है। भारत में वार्षिक वर्षा का 80 प्रतिशत मॉनसूनी काल में प्राप्त होता ....
Question : कृष्णा नदी से संबंधित नदी जल-विवाद का तर्कसंगत विवरण दीजिए
(2015)
Answer : भारत की ज्यादातर नदियाँ एक से अधिक राज्यों से होकर गुजरती है। नदी बेसिन का प्रत्येक राज्य नदी से अधिकतम मात्र में जल प्राप्त करना चाहता है। इससे देश में कई नदी जल-विवाद पैदा हुए हैं।
इनमें से एक कृष्णा नदी जल-विवाद है। यह विवाद महाराष्ट्र, कर्नाटक एवं अविभाजित आंध्रप्रदेश के बीच है। कृष्णा का अपवाह बेसिन महाराष्ट्र में 68,800 किमी.2, कर्नाटक में 112,600 किमी.2 एवं आंध्रप्रदेश में 75,600 किमी.2 है। विवाद के कारणों में, वर्षा ....
Question : भारत सरकार की पश्चिमी घाटों के संरक्षण की रणनीतियों की रूपरेखा प्रस्तुत कीजिए
(2015)
Answer : सरकार ने पश्चिमी घाट के प्राकृतिक दृश्यों और उनकी विलक्षण जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में कई कदम उठाये हैं। पश्चिमी घाट केवल जैव विविधता को ही आश्रय नहीं देते बल्कि करीब पांच करोड़ लोगों की आबादी का भी भरण पोषण करते हैं। इस क्षेत्र के संरक्षण हेतु माधव गाडगिल व के. केस्तुरीरंगन की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई। गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के पश्चिमी घाटों के पारिस्थितिकीय रूप से ....
Question : भारत में निर्माण करो संकल्पना की व्याख्या कीजिए एवं उसकी सफलता के लिए अत्यावश्यक तत्वों इनपुटों को इंगित कीजिए
(2015)
Answer : ‘भारत में निर्माण करो’ संकल्पना का उद्देश्य विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देना तथा देश के आर्थिक विकास तथा प्रगति के साथ रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 25 सितंबर, 2014 को इसकी शुरुआत राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर की।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विश्व स्तर पर भारत को निवेश स्थल के रूप में बढ़ावा देना है। कौशल विकास को बढ़ावा देना तथा विस्तृत करना और बौद्धिक समृद्धि अधिकार को संरक्षित ....
Question : भूकंप की तीव्रता और उसके परिमाण में विभेदन कीजिए और भारत के विभिन्न भागों में इसके भिन्न भिन्न प्रभाव को स्पष्ट कीजिए
(2014)
Answer : एक व्यक्तिनिष्ठ भूकम्प कम्पन का सबसे ज्यादा प्रभाव मूल्यांकन संशोधित तीव्रता मापक द्वारा होता है। इसे भूकम्पीय तीव्रता कहते हैं जबकि परिमाप रिक्टर स्केल द्वारा मापा जाता है।
जो यह बताता है कि किसी भूकम्प द्वारा कितनी अधिक भूकम्पीय ऊर्जा विमुक्त हुई। इसे रिक्टर स्केल पर 0-9 के बीच मापा जाता है।
भूकम्प का परिणाम भूकम्प के ड्डोत द्वारा विमुक्त हुई ऊर्जा को मापता है जबकि भूकम्पीय तीव्रता किसी विशेष अवस्थिति में भूकम्पीय कम्पनों की प्रगाढ़ता का ....
Question : भूकम्प-प्रवण क्षेत्रें को चिह्नित करें और उनके प्रबंधन हेतु रणनीति का सुझाव दें
(2013)
Answer : भूकंम्प की आवृत्ति एवं तीव्रता को आधार मानकर भारत को तीन भूकंपीय क्षेत्रें में बांटा जा सकता है।
Question : भारत में समावेशी विकास कार्यक्रम के लिए व्यवहार्य गांव इकाई के निर्माण में विजन 2020 के उद्देश्यों की विवेचना करें
(2013)
Answer : भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने भारत को सन् 2020 तक विकसित राष्ट्रों की कोटि में लाने के उद्देश्य से इंडिया विजन-2020 नामक योजना का प्रस्ताव रखा था। विजन-2020 के लक्ष्य निम्नलिखित हैं।
Question : भारत की खाद्य सुरक्षा नीति में कमियां।
(2013)
Answer : भारत की खाद्य सुरक्षा नीति के माध्यम से सरकार का 612.3 लाख टन अनाज जुटाने का लक्ष्य है और इसके माध्यम से भारत की 67% जनसंख्या को खाद्य सुरक्षा मुहैया करायी जायेगी।
इस योजना के माध्यम से केन्द्र सरकार प्रत्येक व्यक्ति को प्रत्येक महीने 3 रुपया प्रति किलो की दर से 5 किलो चावल 2रु/किलो. की दर से 5 किलो गेहूं और 1 रु./किलो की दर से 5 किलो मोटे अनाज देगी।
भारत सरकार की इस योजना ....
Question : मध्य गंगा मैदान में बाढ़ विभीषिका के कारणों, परिणामों तथा उपचारी उपायों को स्पष्ट कीजिए आपकी उत्तर पुसि्तका में एक रेखाचित्र पर मध्यगंगा मैदान के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रें को प्रदार्शित कीजिए
(2012)
Answer : बाढ़ पृथ्वी के प्राकृतिक जल चक्र का ही एक अंग है, परन्तु विकास एवं बढ़ती जनसंख्या के फलस्वरूप जैसे-जैसे प्रकृति के साथ छेड़डाड़ बढ़ी है, बाढ़ का प्रकोप भी बढ़ता गया है। मध्य गंगा मैदान का अधिकाश भाग समतल मैदान में है। इस प्रदेश में गंगा व उसकी सहायक नदियों का विस्तृत जाल बिछा हुआ है। मध्य गंगा मैदान में सोन, गोमती, घाघरा, गण्डक, कोसी इत्यादि गंगा की प्रमुख सहायक नदियां हैं, जिनमें अधिकांश काफी ....
Question : अभिज्ञान प्रसार को प्रभावित करने वाले कारक
(2012)
Answer : उत्पादन कार्य में नए प्रकार के संसाधनों का अथवा पुराने संसाधनों का ही नए रूप से ऐसा उपयोग, जिससे उत्पादन बढ़ जाए एवं उत्पादन संवृद्धि की दर तीव्र हो जाए नवाचार कहलाती है।
नवाचारों का प्रसार अर्थव्यवस्था के विकास को तीव्र करने, उत्पादन की संवृद्धि तीव्र करने के साथ भविष्य में लागत मूल्य भी कम करने में सहायक होती है। गुणावत्ता एवं कुशलता के उच्च मानक हेतु भी नवाचारों को आत्मसात् करने हेतु प्रेरित करते हैं।
नवाचारों ....
Question : गंगा कावेरी सम्पर्क नगर के विशेष सन्दर्भ में भारत में नदी गठजोड़ की प्रासंगिकता का परीक्षण कीजिए
(2012)
Answer : नदी जोड़ो परियोजना के अर्न्तगत कुल 30 नदी जोड़ प्रस्तावित है, जिनमें 14 हिमालयी भाग के और 16 मैदानी भाग के हैं। इस योजना के दो मुख्य अंग हैं। पहले हिस्से में गंगा ब्रह्मपुत्र घाटी की बहुत सी नदियों को जोड़ने की बात है। योजना के दूसरे हिस्से में प्रायद्वीपीय नदियों को जोड़ने प्रस्ताव है। इन नदियों को 50-100 मीटर चौड़ी और 6 मीटर गहरी नहरों के माध्यम से जोड़ा जाएगा, जिनकी कुल लम्बाई 12500 ....
Question : जानपदिक रोग Epidemic की परिभाषा कीजिए और भारत में चिकुनगुनिया की उपस्थिति पर चर्चा कीजिए
(2010)
Answer : किसी संक्रामक बीमारी या बीमारी से समानता रखने वाली घटना किसी क्षेत्र विशेष से उत्पन्न होकर, वहां से बाहर की ओर तेजी से फैलती है तथा कम समय में बहुत से लोगों को प्रभावित करती है, उसे जानपदिक रोग कहते हैं, जैसे- मलेरिया, डेंगु, भूखमरी आदि। उल्लेखनीय है कि जानपदिक रोग सामान्य बीमारी से अलग है, क्योंकि बीमारी असंक्रामक भी होती हैं। जानपदिक रोग जब अपना स्वरूप किसी क्षेत्र विशेष से फैलाकर पृथ्वी के ज्यादातर ....
Question : रेखाचित्रित मानचित्र की सहायता से चिकुनगुनिया के द्वारा प्रभावित प्रदेशों की पहचान कीजिए और इसके प्रादेशिक प्रतिरूप पर प्रकाश डालिए
(2010)
Answer : भारत में सर्वप्रथम चिकुनगुनिया की पहचान दक्षिण भारत में 1952 की गई थी। चिकुनगुनिया आर्द्र, उष्ण जलवायु में फैलने वाली महामारी है, अतः दक्षिण भारत की जलवायु इसके काफी अनुकूल है। तमिलनाडु, पाण्डिचेरी, सर्वाधिक ग्रस्त क्षेत्र में चेन्नई, रामनाथपुर, जैसे तटीय क्षेत्रें में 1965 के बाद लगभग 7 साल की चक्रीय समय पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराती है। केरल का कोट्यम्, अल्हापुजा तथा मल्लापुर क्षेत्र से 2007 में सर्वाधिक 7000 मामले प्रकाश में आये और ....
Question : भारत के औद्योगिक क्षेत्रें में पर्यावरण निम्नीकरण के कारण और उसके परिणाम क्या-क्या हैं विशिष्ट उदाहरण प्रस्तुत कीजिए
(2009)
Answer : औद्योगिक विकास ने मानव समाज को आर्थिक समृद्धि प्रदान की है, सामाजिक, आर्थिक संरचना को नया आयाम दिया है तथा लोगों को भौतिक सुख प्रदान किया है। परंतु इसने कई प्रकार की समस्याओं को भी जन्म दिया है।
औद्योगिकरण के दो प्रमुख संघटकों अर्थात्, प्राकृतिक संसाधनों का तीव्र गति से विदोहन तथा औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि का पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। कारखानों में कच्चे पदार्थों के उपयोग के लिए प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक विदोहन ....
Question : भारत के उद्योग और कृषि क्षेत्रकों पर वैश्वीकरण के प्रभाव पर चर्चा कीजिए
(2009)
Answer : वैश्वीकरण एक नवीन अवधारणा है, जिसके अंतर्गत किसी देश की अर्थव्यवस्था को विश्व के अन्य देशों के लिए पूर्णतया खोल दिया जाता है, जिसमें व्यापार, निवेश, तकनीकी प्रवाह, श्रम प्रवाह सभी शामिल हैं।
भारत में वैश्वीकरण की धारणा को मुख्यतया 1991 में लाया गया। तभी से इसने भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं जैसे कृषि क्षेत्र, औद्योगिक क्षेत्र एवं सेवा क्षेत्र को सकारात्मक एवं नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है।
भारतीय कृषि पर वैश्वीकरण के सकारात्मक प्रभाव निम्नलिखित ....
Question : धारणीय विकास की संकल्पना को स्पष्ट और उसकी प्रासंगिकता का परीक्षण कीजिए
(2008)
Answer : धरातलीय विकास के अंतगर्त उन कार्यक्रमों को सम्मलित किया जाता है, जो पर्यावरण के आधारभूत गुणों को बिना विचलित किए हुए विकास कार्यक्रमों द्वारा अधिवासीय जनसंख्या को अनुकूलतम संतुष्टि प्रदान करे। अनुकूलतम संतुष्टि का तात्पर्य संतुष्टीकरण के उस स्तर से है जिसके आगे अधिकतम संतुष्टीकरण की अवधारणा विकसित होती है और अधिकतम संतुष्टीकरण के एवज में पर्यावरण का अवनयन प्रारंभ होने लगता है। अतः धारणीय विकास वह संदर्भ बिन्दु है जिसके आगे तकनीकी, पूंजी, कुशल ....
Question : भारत के द्रुत आर्थिक विकास और जनसंख्या वृद्धि के संदर्भ में, भारत की पर्यावरणीय समस्याओं पर चर्चा कीजिए।
(2007)
Answer : मानव सभ्यता के विकास की कहानी वास्तव में उसके प्रकृति अथवा पर्यावरण उपयोग की कहानी है, क्योंकि आदिम अवस्था से आज तक हम पर्यावरण का उपयोग कर प्रगति के पथ पर अग्रसर हो रहे हैं और भविष्य की प्रगति भी इसी पर निर्भर है। विकास के प्रारंभिक दौर में मानव का पर्यावरण से सामंजस्य था, अतः वह निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर होता रहा। यद्यपि इसके कारण सीमित जनसंख्या,सीमित आवश्यकताएं एवं तकनीकी ज्ञान की ....
Question : भारत की औद्योगिक अर्थव्यवस्था/पैर्टन पर बहुराष्ट्रीय कम्पनियों एवं उदारीकरण के प्रभाव पर प्रकाश डालिए।
(2007)
Answer : नई औद्योगिक नीति की घोषणा सन् 1991 में की गई थी। इस नीति के द्वारा बहुत बड़े स्तर पर औद्योगिक अर्थव्यवस्था पर से अनेक प्रकार के नियंत्रण हटा दिए गए हैं। नई औद्योगिक नीति के प्रमुख उद्देश्य हैं:
Question : कावेरी नदी विवाद पर एक समालोचनात्मक टिप्पणी लिखिए।
(2007)
Answer : न्यायमूर्ति एन. पी. सिंह की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय कावेरी जल-विवाद न्यायाधिकरण ने दशकों पुराने और राजनैतिक दृष्टिकोण से अतिसंवेदनशील कावेरी नदी विवाद में फरवरी 2007 को अंतिम फैसला सुनाया। कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल व पुडुचेरी के बीच कावेरी जल बंटवारे के इस मामले में अंतिम फैसला सुनाने में कावेरी जल-विवाद पंचाट ने 16 वर्ष से भी अधिक का समय लिया। पंचाट के अंतिम फैसले के तहत कावेरी बेसिन में एक जल वर्ष (जून-मई) में पानी ....
Question : धारणीय संवृद्धि एवं विकास की संकल्पना को सुस्पष्ट कीजिए।
(2005)
Answer : धारणीय संवृद्धि एवं विकास का सामान्य अर्थ है दीर्घकालीन विकास अथवा बिना विनाश किए विकास। कुछ विद्वान इसे संधृत विकास (Sustainable Develepment) भी कहते हैं, किन्तु वास्तव में सतत् विकास संविकास का एक पक्ष है। इसमें निम्नांकित तत्व सम्मिलित हैं-
(1) समेकित विकासः यह विकास आर्थिक-सामाजिक- सांस्कृतिक तथा पारितंत्रों की समग्रता को ध्यान में रखकर किया जाता है। पर्यावरण संकट, विकास का संकट, ऊर्जा संकट आदि समस्याएं एक दूसरे से अलग नहीं, वरन अन्योन्याश्रित हैं।
(2) संतुलित ....
Question : धारणीय संवृद्धि एवं विकास की संकल्पना का मूल्यांकन कीजिए।
(2004)
Answer : धारणीय संवृद्धि एवं विकास से तात्पर्य है- विकास की वैसी प्रक्रिया से जो हमेशा के लिए सतत् रह सके तथा जिसका फायदा हरेक वर्ग एवं व्यक्ति को प्राप्त हो सके। यह संकल्पना काफी व्यापक है तथा अलग-अलग प्रदेशों में वहां की सांस्कृतिक-राजनीतिक एवं आर्थिक स्थितियों के अनुसार इसके अलग-अलग तत्व गिनाये जाते हैं। फिर भी कुछ मुख्य मुद्दों पर सभी एकमत हैं:
Question : भूकंप विनाश के कारणों, प्रभावों एवं बचाव के उपयोग की व्याख्या करें।
(2002)
Answer : भूकंप का मूल कारण पृथ्वी की संतुलन अवस्था में अव्यवस्था का होना है। यदि विश्व के भूकंप क्षेत्रों पर दृष्टिपात किया जाय तो स्पष्ट हो जाता है कि भूकंप प्रायः कमजोर एवं अव्यवस्थित भूपटल के सहारे पाये जाते हैं। अब तक यह माना जाता रहा है कि संतुलित तथा प्राचीन व्यवस्थित भागों में भूकंप नहीं आते हैं। परंतु 1967 ई. के कोयना भूकंप ने इस विचारधारा पर जमकर कुठाराघात किया है। विभिन्न भूकंप क्षेत्रों के ....