Question : ‘‘वैश्वीकरण में वि-भूभागीकरण शामिल है।’’ राष्ट्र-राज्य का उल्लेख करते हुए इसका परीक्षण कीजिए।
(2015)
Answer : वैश्वीकरण की प्रक्रिया ने विश्व को एक वैश्विक गांव में बदल दिया है। जहां सम्पूर्ण विश्व एक समुदाय सा बन गया है। राष्ट्र-राज्य की आदर्श परिभाषा के अनुकूल इसमें सीमांकन और सीमाई क्षेत्रीयता कमजोर पड़ता प्रतीत हो रहा है। इसका सीधा असर विश्व की वि-भूभागीकरण के रूप में दिख रहा है। एक राष्ट्र-राज्य की अपनी भौगोलिक सीमा होती है। इसके अन्दर उस राष्ट्र की संप्रभुता लागू होती है। एक राष्ट्र-राज्य की अपनी पहचान वैश्विक स्तर ....
Question : प्रतीत होता है कि जातीय विचारधारा ने लोकतंत्र को सुदृढ़ किया है। टिप्पणी कीजिए।
(2015)
Answer : लोकतांत्रिक व्यवस्था में जातीय विचारधारा राजनीतिक दलों द्वारा मतदाताओं को लामबंद करते हुए आधार का काम करती है। आज चुनावी समीकरण में जाति के पक्ष को ध्यान में रखा जाता है। विभिन्न जातियां अपने हितों को देखते हुए संगठनों का निर्माण करती हैं और अपने सदस्यों को किसी विशेष पार्टी को मत देने के लिए प्रेरित करती हैं। जातीय विचारधारा के अन्तर्गत जातियों की राजनीतिक भागीदारी प्राप्त करने के इस तरीके ने जातीय चेतना को ....
Question : उन परिस्थितियों की व्याख्या कीजिए जिनमें सामूहिक कार्रवाई एक सामाजिक आंदोलन में परिवर्तित हो जाती है।
(2015)
Answer : सामाजिक आंदोलन, सामूहिक प्रयासों का एक प्रकार है। ये प्रयास सामाजिक रूप से साझी मांग का प्रतिनिधित्व करते हैं जो समाज में परिवर्तन को प्रोत्साहित भी कर सकते हैं या हतोत्साहित भी।
हर प्रकार की सामूहिक कार्रवाई, सामाजिक आंदोलन नहीं मानी जा सकती जैसे सड़क पर टक्कर लगने से भीड़ द्वारा ड्राइवर को पीटा जाना। यहां पर भीड़ द्वारा ड्राइवर को पीटना मात्र एक सामूहिक क्रिया है न कि सामाजिक आंदोलन क्योंकि सामाजिक आंदोलन की विशेषता ....
Question : ‘‘लोकतंत्र में सामाजिक रूपांतरण (सोशल ट्रांसफॉर्मेशन) के लिए विचारधारा निर्णायक होती है।’’ विवेचना कीजिए।
(2015)
Answer : लोकतंत्र में विचारधारा, सामाजिक स्थानांतरण के लिए अत्यंत निर्णायक होती है क्योंकि वह विचारधारा ही होती है जो किसी भी लोकतांत्रिक समाज में सामाजिक रूपांतरण के लिए जनता को लामबंद करती है। लोकतांत्रिक समाज में ही विचारधाराएं जन्म लेती हैं तथा समाज के व्याप्त सामाजिक बुराईयों के प्रति सचेत कर समाजिक रूपांतरण के लिए प्रोत्साहित करती हैं। इस कथन का समर्थन करने के लिए गांधी जी का नाम सबसे महत्वपूर्ण है जिन्होंने अपनी विचारधारा से ....
Question : सामाजिक आंदोलन से आप क्या समझते हैं? अनुसूचित जातियों द्वारा लामबंदी ने उनको एक नई पहचान बनाने में किस प्रकार सहायता की है?
(2014)
Answer : समाज की प्रकृति परिवर्तनशील होती है। इसमें संघटन एवं विघटन की स्थिति आती रहती है। इनके परिणामस्वरूप उत्पन्न दशाओं के उन्मूलन हेतु जब समाज के सदस्य मुख्यतः परिवर्तन लाने या कभी-कभी परिवर्तनों को रोकने हेतु सामूहिक प्रयास करते हैं तो इसे सामाजिक आंदोलन कहते हैं। सी-डब्ल्यू- किंग, एम.एस.ए. राव आदि ने इसे जहां सामाजिक परिवर्तन लाने वाली प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया है, वहीं टर्नर ने इसमें परिवर्तन को रोकने हेतु किए गए प्रयासों ....
Question : ‘‘शक्ति, शून्य-योग खेल (जीरो-सम गेम) नहीं है’’ वेबर और पारसन्स के विचारों के संदर्भ में विवेचना कीजिए।
(2014)
Answer : शक्ति के प्रकार्यवादी सिद्धान्त के प्रमुख प्रवर्तक रालकॉट पारसन्स रहे हैं जिन्होंने मैक्स वेबर के ‘अचर योग के विचार’ (अर्थात जो शक्ति सम्पन्न होते हैं, वे दूसरों की कीमत के आधार पर शक्ति संपन्न होते हैं) को अस्वीकार करते हुए कहा कि शक्ति किसी व्यक्ति या समूह के पास नहीं बल्कि पूरे समाज के पास होती है। यह सामाजिक शक्ति समाज की शक्ति क्षमता पर आधारित होती है, जिससे समाज के लक्ष्यों की प्राप्ति संभव ....
Question : राजनैतिक दलों तथा दबाव समूहों में विभेद कीजिए।
(2014)
Answer : उदारवादी लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दल एवं दबाव समूह दोनों ऐसे संगठित समूह हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के संचालन एवं सुदृढ़ीकरण में महत्वपूर्ण होते हैं। अवधारणात्मक स्तर पर राजनीतिक दल एवं दबाव समूह में निम्न भेद किए जा सकते हैं-
Question : नागरिकता पर टी.एच. मार्शल के विचारों की विवेचना कीजिए।
(2014)
Answer : नागरिकता का तात्पर्य उस स्थिति से है जिसमें व्यक्ति किसी राजनीतिक समुदाय का पूर्ण और उत्तरदायी सदस्य होता है और सार्वजनिक जीवन में भाग लेता है। नागरिक एक ऐसा व्यक्ति है जो राज्य के बारे में तथा राज्य के प्रति निष्ठा रखता है और उसे राज्य का संरक्षण प्राप्त होता है। किसी राष्ट्र-राज्य के अंतर्गत अपने पूर्ण सदस्यों को जो नागरिक राजनीतिक और सामाजिक अधिकार प्राप्त होते हैं, वे नागरिकता की परिभाषा में आते हैं। ....
Question : संसदीय प्रजातंत्र में दबाव-गुटों की भूमिका की परीक्षा कीजिए।
(2013)
Answer : किसी विचारधारा विशेष या लक्ष्य विशेष की प्रेरणा से गठित व्यक्तियों का समूह, जो सत्ता को प्राप्त कर अथवा सत्ता को प्रभावित कर अपनी विचारधारा या उद्देश्यों को क्रियान्वित करना चाहता है, राजनीतिक दल कहा जाता है जब यह राजनीतिक दल चुनाव के माध्यम से या समर्थन के माध्यम से पर्याप्त सदस्य संख्या सरकार बनाने के लिए नहीं प्राप्त करता है तो यह विपक्ष में बैठता है तथा दबाब समूह के रूप में कार्य करता ....
Question : सामाजिक आंदोलन को परिभाषित कीजिए। सामाजिक परिवर्तन में सुधारवादी आंदोलनों की भूमिका का विशद विवेचन कीजिए।
(2013)
Answer : सामाजिक आंदोलनों में वैचारिकी का एक विस्तृत संग्रह होता है। जिसका उद्देश्य सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक व्यवस्थाओं का पुनर्निर्माण करना होता है।
इस उद्देश्य पर सामाजिक आंदोलनों के कार्यक्रम निर्धारित होते हैं। सामाजिक आंदोलनों की परिभाषा के लिए कहा जा सकता है, कि कुछ संस्थापित सामाजिक संबंधों को रूपांतर करने का प्रयत्न है।
दो बातें आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण होती हैं
एक संगठन द्वारा कुछ उद्देश्यों ....
Question : ‘‘विज्ञान के पास तार्किक लक्ष्यों के लिए आनुभविक साधन हैं और धर्म के पास तार्किक लक्ष्यों के लिए गैर-आनुभविक साधन हैं।’’ टिप्पणी कीजिए।
(2013)
Answer : विज्ञान, धर्म तथा सामाजिक पृष्ठभूमि पर विचार करते हुए जुआर्ट और मैक्स वेबर ने अर्थ प्रणाली से संबंधित तर्कों को प्रयोग किया है। पश्चिमी यूरोप तथा उत्तरी अमेरिका में जहां प्रोटैस्टेट अथवा यहूदी धर्म को मानने वाले लोग हैं वहां विज्ञान और प्रौद्योगिकी का विकास एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका की तुलना में काफी पहले और तीव्रता से हुआ।
जिन देशों में धार्मिक कट्टरता अधिक रही है और जहां पर धर्म तथा राज्यों में परस्पर गठजोड़ ....
Question : नागरिक समाज और प्रजातंत्र एक-दूसरे को परस्पर किस प्रकार सशक्त करते हैं। मूल्यांकन कीजिए।
(2013)
Answer : किसी भी देश में लोकतंत्र की सफलता या असफलता को निम्नांकित बिन्दुओं के आधार पर समझा जा सकता है-
Question : प्रजातंत्र में नागरिक समाज की भूमिका की समीक्षात्मक परीक्षा कीजिए।
(2013)
Answer : शाब्दिक रूप से जनता द्वारा निर्मित तंत्र को प्रजातंत्र कहते हैं। तंत्र में जन प्रतिनिधियों द्वारा निर्मित सरकार तथा जनप्रिय सरकार द्वारा नियंत्रित व संचालित प्रशासन सम्मिलित होता है। अब्राहम लिंकन के अनुसार, ‘‘जनता की सरकार, जनता के द्वारा, जनता के लिए ही लोकतंत्र है।’’
लोकतंत्र के प्रमुख लक्षण निम्न प्रकार हैंः-
Question : “शक्ति और सत्ता साथ-साथ चलती है।“ परीक्षण कीजिए। सत्ता के विभिन्न प्रकारों की व्याख्या भी कीजिए।
(2012)
Answer : शक्ति किसी व्यक्ति या समूह की वह क्षमता या योग्यता है, जिसके आधार पर वह अन्यों से उनकी इच्छा के विरूद्ध भी अपनी इच्छाओं का पालन करवाने में सक्षम होता है, अर्थात् सामाजिक संबंधों में जब कोई व्यक्ति ऐसी स्थिति में हो कि दूसरे के प्रतिरोध के बाद भी वह अपनी इच्छा को पूरा करवा लेता है, तो यह शक्ति है और जब इसी शक्ति को समाज द्वारा संस्थागत रूप से वैधता दे दी जाती ....
Question : नागरिकता एवं नागरीय समाज
(2012)
Answer : नागरिकता का तात्पर्य उस स्थिति से है, जिसमें व्यक्ति किसी राजनीतिक समुदाय का पूर्ण और उत्तरदायी सदस्य बनते हुए सार्वजनिक जीवन में भाग लेता है। नागरिक एक ऐसा व्यक्ति है, जो राज्य के प्रति निष्ठा रखता है और उसे राज्य के द्वारा राजनैतिक, विधिक व सामाजिक अधिकार प्रदान किए जाने हैं। प्राचीन काल से ही नागरिकता को एक राजनीतिक समुदाय की वैध सदस्यता के रूप में परिभाषित किया गया है।
राजनीतिक एवं कानूनी सिद्धांतों के अनुसार ....
Question : सहस्राब्दिक आंदोलन
(2012)
Answer : सामाजिक आंदोलन का एक प्रकार सहस्राब्दिक आंदोलन है। समाजशास्त्रियों एवं मानवशास्त्रियों ने सहस्राब्दिक आंदोलन को एक सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन के रूप में वर्गीकृत किया है, वहीं धर्मशास्त्रियों इसे धार्मिक विश्वास या मान्यता के रूप में मानते हैं।
सहस्राब्दिक आंदोलन अपने अनुयायियों को चमत्कारिक शक्तियों द्वारा एक पूर्ण सामाजिक परिवर्तन की बात करता है। यह आंदोलन एक भविष्य के समाज की स्थापना का विचार कोरी कल्पना के आधार पर प्रस्तुत करता है, जैसे-धरती पर एक नया स्वर्ग, एक ....
Question : क्या सामाजिक आन्दोलन सदैव विचारधाराओं से प्रभावित होते हैं? विवेचना कीजिए।
(2012)
Answer : सामाजिक आन्दोलन लोगों के वृहत समूह द्वारा की गयी वह सामाजिक क्रिया है, जो कि समाज में कुछ मूल्यों, प्रतिमानों एवं सामाजिक संबंधों को बदलने के उद्देश्य से की जाती है, परन्तु इस क्रिया में निरन्तरता व अनायासता होती है।
कोई भी सामाजिक आन्दोलन एक ऐसा सामूहिक प्रयास है, जो कि न केवल परिवर्तन को प्रोत्साहित करता है, अपितु परिवर्तन का विरोध भी करता है। सामाजिक आन्दोलन के उदभव एवं निरंतर संचालन में योगदान वाले प्रमुख ....
Question : राष्ट्र से आप क्या समझते हैं? क्या राष्ट्र राज्य के समरूप है? विवेचना कीजिए।
(2012)
Answer : राष्ट्र प्रायः एक ही राजनैतिक व्यवस्था के अन्तर्गत स्वेच्छा से रहने वाले लोगों का एक ऐसा सांस्कृतिक समुदाय है, जो समान नैतिक भावनाओं के शक्तिशाली सूत्रें द्वारा आबद्ध होता है। राष्ट्रीयता प्रायः लोगों के समूह को कहा जाता है, जो एक ही प्रजाति, भाषा, धर्म, संस्कृति, भौगोलिक क्षेत्र इत्यादि के कारण निकट से जुड़े होते हैं और एक जैसी ऐतिहासिक विरासत के कारण की भावना से प्रेरित होते हैं। जहां तक राष्ट्र तथा राज्य के ....
Question : शक्ति अभिजन
(2011)
Answer : सी. डब्ल्यू. मिल्स ने 1950 के दशक में अमेरिका शक्ति संरचना का अध्ययन किया था तथा अपनी पुस्तक ‘द पावर एलीट’ में अपने सिद्धांत का प्रतिपादन किया। इनके अनुसार लोकतांत्रिक समझे जाने वाले अमेरिका में भी अभिजनों का शासन है, जो प्रमुख पदों पर अपना प्रभुत्व बनाए रखते हैं। इनके अनुसार अमेरिका शक्ति संरचना में मुख्यतः तीन अभिजन वर्ग हैं:
यही राष्ट्रीय स्तर के सभी निर्णय लेते हैं, जिनका ....
Question : सांस्कृतिक बहुलवाद
(2011)
Answer : प्रत्येक संस्कृति में एक एकीकरण सिद्धांत और एक जीवन दर्शन होता है, जो संस्कृति के प्रत्येक पहलू में व्याप्त होता है। किसी संस्कृति विशेष के सांस्कृतिक आदर्श में सामान्य रूप से दो अथवा उससे अधिक इकाइयां होती हैं। जहां तक बहुसंस्कृति की बात है, यह वास्तव में कई संस्कृतियों का समूह होता है। इस प्रकार के समाज में सभी समूहों को अपनी अपनी संस्कृति का संचालन करने का पूर्ण अधिकार होता है। ये एक-दूसरे की ....
Question : सामाजिक आंदोलन की पूर्वापेक्षाओं को दर्शाइए। सामाजिक आंदोलनों एवं क्रांति में विभेद कीजिए।
(2011)
Answer : सामाजिक आंदोलन अकारण घटित नहीं होते, बल्कि सामाजिक बेचैनी सामाजिक आंदोलनों को जन्म देती है। इस प्रकार सामाजिक आंदोलनों की पूर्वापेक्षाओं के बारे में निम्नलिखित कारण है-
सामूहिकतावादी व्यवहार का एक रूप जिसमें अधिसंख्य व्यक्ति न्यूनाधिक रूप में किन्हीं निश्चित सामाजिक उद्देश्यों (परिवर्तन लाने या परिवर्तन रोकने) की प्राप्ति हेतु एक कार्यक्रम बनाकर मिली-जुली कार्यवाही या संगठित प्रयास करते हैं, यह सामाजिक आंदोलन कहलाता है। इस प्रकार के प्रयास निरंतर एवं लंबे समय तक चलते रहते ....
Question : ‘राजनीति की सामूहिक क्रिया समाज में एकीकरण तथा घटना ला सकती है’। समीक्षा कीजिये।
(2011)
Answer : लोकतन्त्र का अर्थ स्वतन्त्रता, समानता तथा सामाजिक न्याय पर आधारित एक ऐसी प्रणाली से है, जिसमें जनता प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपने प्रतिनिधियों को चुनती है। भारत में लोकतन्त्र पिछले 64 वर्षों से निवार्द्ध गति से चल रहा है, इसका कारण जनता की बढ़ती भागीदारी तथा राष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय विचार धाराओं को शासन में प्रतिनिधित्व मिलना है। ये शासन तथा जनता के मध्य कड़ी का काम करते हैं। जनता अपनी सामूहिक क्रिया द्वारा इन ....
Question : सहभागिका प्रजातंत्र की अवधारणा की विवेचना कीजिए। सहभागिता में कौन सी दशाएं सहायक मानी जाती हैं?
(2011)
Answer : सहभागिता या साझा समझौता प्रजातंत्र से तात्पर्य प्रत्यक्ष प्रजातंत्र से है, जिसमें सभी महत्वपूर्ण निर्णयों में सभी नागरिकगणों की सक्रिय रूप में हिस्सेदारी होती है। वे किसी न किसी रूप में इन निर्णयों से जुड़े होते हैं। यह व्यक्तियों की सरकार के पुरातन यूनानी आदर्श का बीसवीं सदी का अवतार है।
सन् 1960 के दशक के यूरोप और अमेरिका के युवा एवं विद्यार्थी आंदोलन ने प्रत्यक्ष प्रजातंत्र की जड़ों को मजबूत करने में अहम् भूमिका अदा ....
Question : पहचान की राजनीति
(2010)
Answer : पहचान की राजनीति का संबंध ऐसे राजनीति से है, जिसका केन्द्र बिन्दु स्व स्वार्थ एवं स्व चिन्हित सामाजिक समूह होता है। इस प्रकार के राजनीति का आधार प्रजाति, वर्ग, धर्म, लिंग भेद एवं परंपरागत प्रभुत्व होता है। परंतु यह आवश्यक नहीं है कि किसी समूह के सारे लोग पहचान की राजनीति से जुड़े हों।
किसी समूह विशेष के लोग जो पहचान की राजनीति करते हैं, सामान्यतः समाज से दरकिनार किए गये होते हैं। परन्तु कभी-कभी मुख्य ....
Question : पहचान की राजनीति
(2010)
Answer : पहचान की राजनीति का संबंध ऐसे राजनीति से है, जिसका केन्द्र बिन्दु स्व स्वार्थ एवं स्व चिन्हित सामाजिक समूह होता है। इस प्रकार के राजनीति का आधार प्रजाति, वर्ग, धर्म, लिंग भेद एवं परंपरागत प्रभुत्व होता है। परंतु यह आवश्यक नहीं है कि किसी समूह के सारे लोग पहचान की राजनीति से जुड़े हों।
किसी समूह विशेष के लोग जो पहचान की राजनीति करते हैं, सामान्यतः समाज से दरकिनार किए गये होते हैं। परन्तु कभी-कभी मुख्य ....
Question : शक्ति के स्त्रेतों की सूची बनाइये और उन विभिन्न संकेतकों को स्पष्ट कीजिए जिनके आधार पर शक्ति का मापन किया जा सकता है।
(2010)
Answer : वेबर के अनुसार शक्ति एक व्यक्ति या किसी समूह की वह क्षमता है जिसका प्रयोग वह अपनी इच्छा से दूसरों के ऊपर करता है, चाहे दूसरा व्यक्ति या समूह इसका विरोध ही क्यों न कर रहा हो। वेबर का मत है कि सामाजिक संबंधों का ही एक ही पहलू है एवं एक व्यक्ति या समूह इसका संरक्षण समाज से अलग हो कर नहीं कर सकता, अर्थात् इसका संबंध सामूहिक व्यवहार से है।
परंतु वेबर के शक्ति ....
Question : सी.डब्ल्यू मिल्स के शक्ति संभ्रांत।
(2009)
Answer : अमेरिकी समाजशास्त्री सी- राइट मिल्स ने अपनी पुस्तक “The Power Elite में अपने शक्ति के सिद्धांत को प्रस्तुत किया है और शासक वर्ग शब्द की जगह ‘शक्तिशाली अभिजन वर्ग’ (सभ्रांत) शब्द का प्रयोग किया है। मिल्स ने शक्तिशाली अभिजन वर्ग की परिभाषा आदेश देने वाले पदों पर आसीन व्यक्ति के रूप में की है। इनके शब्दों में, शक्तिशाली अभिजन की रचना उन व्यक्तियों द्वारा होती है, जो अपने पदों के कारण सामान्य व्यक्तियों से ऊपर ....
Question : विरोध की अभिव्यक्ति के रूप में सामाजिक आंदोलन।
(2008)
Answer : समाज में सदैव संगठन ही नहीं होता है, बल्कि तीव्र सामाजिक परिवर्तन या अन्य कारण से विघटन की दिशा उत्पन्न होता है, जिनसे उत्पन्न समस्याओं के सदंर्भ में जब समाज के सदस्य मुख्यतः परिवर्तन लाने हेतु या कभी-कभी परिवर्तन को रोकने के लिए भी सामूहिक प्रयास करते हैं: तो इसे समाजिक आंदोलन कहा जाता है। यद्यपि ये आंदोलन समाज में अचानक ही निर्मित नहीं होता है, बल्कि उसका धीरे-धीरे कई स्तरों में विकास होता है।
सर्वप्रथम ....
Question : राजनैतिक सहभागिता का अर्थ एवं स्वरूप समझाइये। भारत में लोगों की राजनीतिक सहभागिता में कौन-कौन से कारक बाधक हैं।
(2007)
Answer : राजनैतिक सहभागिता सभी राजनीतिक व्यवस्थाओं के लिए अनिवार्य तत्व है। लोकतान्त्रिक शासन प्रणाली का तो बुनियादी आधार ही ‘सहभागिता’ है क्योंकि इसका संचालन जनता द्वारा किया जाता है। व्यक्तियों द्वारा राजनीतिक व्यवस्था के विभिन्न स्तरों पर भाग लेने को राजनीतिक सहभागिता कहते हैं। सामान्य तौर से, नागरिकों के वह कार्य जो सरकार की निर्णयकारी प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं, राजनीतिक सहभागिता कहलाती है। मैक्गलोस्की के अनुसार राजनीतिक सहभागिता लोकतान्त्रिक व्यवस्था में सहमति देने अथवा वापस ....
Question : एक सामाजिक आंदोलन में कौन-कौन से रचनात्मक तत्व होते हैं? एक सामाजिक आंदोलन का अंत किस तरह आता है। अपने उत्तर की सोदाहरण पुष्टि कीजिए।
(2007)
Answer : भारत में सामाजिक आन्दोलन केवल विरोध और असहमति प्रकट करने वाले आन्दोलन ही नहीं रहे हैं, बल्कि सुधारात्मक, प्रतिक्रियात्मक के साथ-साथ सामाजिक-धार्मिक और स्वतंत्रता आन्दोलन भी रहे हैं। ये आन्दोलन जिन्हें ‘परिवर्तन को प्रोत्साहित/विरोध करने के सामूहिक प्रयत्न’ कहा गया है। बौद्धिक विकास, सामाजिक संरचनाओं, वैचारिक वरीयताओं और सत्य के ज्ञान आदि से अस्तित्व में आये। यह सर्वविदित सत्य है कि समाज की विशेषताएं ही आन्दोलनों के प्रारूप तैयार करती है। अतः सामाजिक संरचना के ....
Question : भूमिका संघर्ष एवं इसका समाधान।
(2007)
Answer : जब दो या दो से अधिक भूमिकाओं का एक साथ निभाना इतना कठिन हो जाता कि हम किसी भी भूमिका को ठीक से निभाने में समर्थ नहीं रह पाते हैं, तो भूमिका द्वंद्व की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। कामकाजी महिलाओं के लिए कभी-कभी यह समस्या हो जाती है। वह अपने बच्चों या परिवार के लिए कैसे समुचित समय निकाले। पेशे की भूमिका एवं मां या पत्नी के रूप में उनकी भूमिका के बीच अक्सर ....
Question : एक सामाजिक आंदोलन का ढांचा।
(2006)
Answer : सामाजिक आंदोलन एक सामूहिक प्रयास है, जिसका उद्देश्य समाज एवं संस्कृति में कोई आंशिक अथवा पूर्ण परिवर्तन लाना या परिवर्तन का विरोध करना है। किसी भी समाज में सामाजिक आन्दोलन तब प्रारंभ होता है जब वहां के लोग वर्तमान स्थिति से असंतुष्ट हों और उनमें परिवर्तन लाना चाहते हों। कई बार सामाजिक आंदोलन परिवर्तन का विरोध करने के लिए भी किए जाते हैं। सामाजिक आन्दोलन के पीछे कोई विचारधारा अवश्य होती है। किसी भी आन्दोलन ....
Question : सामाजिक विकास में सामाजिक नीति का महत्व समझाइये। किन परिस्थितियों में एक सामाजिक नीति की कामगिरी की प्रभावकता असपफ़ल होती है।
(2006)
Answer : राष्ट्र निर्माण का कार्य सामाजिक नीति और विकास से जुड़ा है। पिछड़े देशों में जब से योजनाबद्ध परिवर्तन प्रारम्भ हुये, राष्ट्र निर्माण के कार्य को सरकार ने अपने हाथों में ले लिया। सरकार योजनाओं को हाथ में लेने से पहले उसके पीछे जो नीति होनी चाहिए, उसका निर्धारण करती है। सामाजिक नीति के अनुरूप विकास के लक्ष्य निर्धारित किये जाते हैं। उदाहरण के लिए, स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जब हमने पहली पंचवर्षीय योजना बनायी, जब ....
Question : भारत में राजनीतिक सहभागिता और मतदान व्यवहार के दंगों पर चर्चा कीजिए।
(2005)
Answer : राजनीतिक सहभागिता और मतदान व्यवहार एक दूसरे से संबंधित हैं, परंतु राजनीतिक सहभागिता का क्षेत्र मतदान व्यवहार से बहुत ज्यादा है। राजनीतिक सहभागिता में विविध प्रकार की क्रियाएं सम्मिलित की जाती हैं। मैक्गलोस्की के अनुसार इसमे मतदान, जानकारी प्राप्त करना, वाद-विवाद एवं धर्मान्तरण सभाओं में उपस्थित रहना, चन्दा देना, प्रतिनिधियों के साथ सम्पर्क रखना आदि विशिष्ट क्रियाएं तथा दल की औपचारिक सदस्यता ग्रहण करना, चुनाव अभियान में भाग लेना, राजनीतिक भाषण देना या लिखना तथा ....
Question : भारत में सामाजिक आंदोलनों के फलस्वरूप वैचारिक परिवर्तनों का वर्णन कीजिए जिन्होंने आधुनिक समाज को प्रविष्ट किया।
(2005)
Answer : किसी भी समाज में सामाजिक आन्दोलन तब प्रारम्भ होता है जब वहां के लोग वर्तमान स्थिति से असन्तुष्ट हों और उसमें परिवर्तन लाना चाहते हों। कई बार सामाजिक आंदोलन किसी परिवर्तन का विरोध करने के लिए भी किए जाते हैं। सामाजिक आंदोलनों के पीछे कोई विचारधारा अवश्य होती है। किसी भी आन्दोलन का प्रभाव पहले असंगठित रूप में होता है और धीरे-धीरे उसमें व्यवस्था व संगठन पैदा हो जाता है। सामाजिक आन्दोलन एक सामूहिक व्यवहार ....
Question : सामाजिक संरचना और राजनैतिक सहभगिता।
(2003)
Answer : सामाजिक संरचना एवं राजनैतिक सहभागिता एक-दूसरे से संबंधित है। सामाजिक संरचना के आधार पर ही किसी सामाज या देश या राज्य की राजनैतिक सहभागिता निर्धारित होती है। सामाजिक संरचना वास्तव में एक अंतःक्रियात्मक अवधारण है, जिसके अंतर्गत समाज के विभिन्न पहलू अंतःसंबंधित होते हैं, जबकि राजनैतिक सहभागिता निश्चित पर से प्रकार्यात्मक प्रक्रिया को स्पष्ट करती है।
अतः सामाजिक में संरचना में समाज के विभिन्न प्रक्रियाओं, जैसे-आर्थिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक का समायोजन होता है और यही संरचनात्मक ....
Question : बोगर्डस की सामाजिक दूरी मापनी तथा लिकर्ट मापनी के क्या उपयोग हैं? विवेचना कीजिए।
(2002)
Answer : बोगर्डस ने सामाजिक दूरी के माप के लिए कुछ शर्तों के आधार पर सही एवं स्पष्ट ज्ञान प्राप्त करने की कोशिश की। इसके लिए बोगर्डस ने एक सौ व्यक्तियों को दिये गये सात वर्गों की श्रेणी की सामाजिक दूरी का पैमाना निर्धारित किया। बोगर्डस ने सात दिये गये वर्गों की श्रेणी के लिए दूरी के आधार पर संबंधों को मापने का प्रयास किया था। इसके लिए बोगर्डस ने मुख्यतः विवाह की स्वीकार्यता, क्लब में मित्रता ....
Question : सामुदायिक शक्ति।
(2002)
Answer : समाजशास्त्र की भाषा में सामुदायिक शक्ति का अर्थ एक समूह के द्वारा पारस्परिक सहयोग द्वारा एक संगठन के रूप में उभरकर एक उद्देश्य के प्रति समर्पण की भावना से कार्य को एक निश्चित समय में पूरा करना है। वास्तव में, सामुदायिक शक्ति में ‘हम की भावना’ एवं कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करने का सम्बन्ध होता है। इसमें सभी लोग किसी उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए एकजुट होकर काम करते हैं। ऐसा देखा गया ....
Question : ‘सामाजिक नीति’ की व्याख्या कीजिए। विकासशील समाजों के आधुनिकीकरण में सामाजिक नीति के कार्यनिष्पादन का मूल्यांकन कीजिए।
(2001)
Answer : सामाजिक नीति सरकार के उस दृष्टिकोण को दर्शाती है जिसे वह किसी विशेष परिस्थिति के प्रति रखती है तथा उसका किस प्रकार मुकाबला करती है। भारत में शिक्षा, महिला, पर्यावरण, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति नगरीकरण तथा मादक द्रव्य व्यसन से संबंधित सामाजिक नीति है। सामाजिक आंदोलन सामाजिक समस्याओं और सामाजिक नीति का आपस में प्रगाढ़ संबंध होता है।
सामाजिक आंदोलन सरकार पर यह दबाव रखते हैं कि वह सामाजिक समस्याओं के नियंत्रण के लिए सुधारवादी ....
Question : किन सामाजिक परिस्थितियों में किसी सामाजिक आंदोलन का जन्म होता है? एक सामाजिक आंदोलन की जीवन रेखा को उदाहरण सहित समझाइए।
(2001)
Answer : कोई भी सामाजिक आंदोलन बहुत सारे लोगों द्वारा सामान्य समस्या अथवा समस्याओं को सामूहिक रूप से सुलझाने का एक प्रयास होता है। एम.एस. राव ने सामाजिक आंदोलनपर गहन शोध किया और उन्होंने तीन सामाजिक परिस्थितियों का उल्लेख किया जो सामाजिक आंदोलन को जन्म देता है। ये परिस्थितियां है- सापेक्षिक वंचन, संरचनात्मक तनाव एवं पुनर्जीविकरण।
(1) सापेक्षिक वंचन: सर्वप्रथम कारक सापेक्षिक वंचन है। परंतु सामाजिक आंदोलन प्रायः इसलिए प्रारंभ होता है, क्योंकि लोग कुछ बातों के बारे ....
Question : नौकरशाही की अनौपचारिक संरचना।
(2001)
Answer : ‘ब्यूरोक्रेसी’ शब्द का प्रयोग प्रशासकीय अधिकारियों द्वारा सम्पादित किये जाने वाले प्रशासन के कार्य-कलापों तथा कार्य पद्धति दोनों को इंगित करने के लिए एक सामूहिक शब्द के रूप में किया जाता है। बहुधा जब कभी इस शब्द का प्रयोग अधिकारी तंत्र की अक्षमता तथा उनके द्वारा शक्ति के दुरुपयोग के अर्थ में किया जाता है, तब इस शब्द का मूल अर्थ भ्रष्ट हो जाता है।
इस शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग संभवतः अर्थशास्त्री विंसेट द गौरने द्वारा ....
Question : क्या विचारधारा किसी सामाजिक आंदोलन का एक अत्यावश्यक अवयव होती है? कुछ समकालीन सामाजिक आंदोलन से उपयुक्त उदाहरणों को प्रस्तुत करते हुए, अपने उत्तर को स्पष्ट कीजिए।
(2000)
Answer : किसी भी सामाजिक आंदोलन की प्रकृति को निर्धारित करने में नेतृत्व एवं विचारधारा की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण है। विचारधारा लोगों के समूहों द्वारा माने जाने वालों विश्वासों की एक व्यवस्था है। यह स्थिति को समझने में मदद करती है। इसके अतिरिक्त यह लोगों के द्वारा अपनाई गई क्रियाओं को वैधता प्रदान करती है। इस प्रकार जैसे किसी आंदोलन के मार्ग दर्शन हेतु नेतृत्व आवश्यक होता है। उसी प्रकार विचारधारा भी आवश्यक होती है, क्योंकि यह ....
Question : प्रजातंत्र में दबाव समूह की भूमिका।
(2000)
Answer : किसी एक विशिष्ट वर्ग (सरकार, जनसमूह या हित समूह) के समूह के हितों का प्रतिनिधित्व करने हेतु आपस में मिलकर व्यक्तियों, मालिकों या अन्य संगठनों के समूहों को दबाव गुट कहा जाता है। दबाव गुट, हित समूह, समर्थन समूह, अन्य प्रकार के सामाजिक समूहों और क्लबों से इस बात में भिन्न होते हैं कि इन समूहों का व्यक्त प्रयोजन अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए जनमत जुटाना और निर्णय लेने वाली संस्थाओं को अपनी मांगों ....
Question : सामाजिक आंदोलन और क्रांति के बीच समान बातों को उजागर कीजिए। क्या आप इस विचार से सहमत होंगे कि प्रत्येक क्रांति से पहले सामाजिक आंदोलन हुआ करता है। कारण प्रस्तुत कीजिए।
(1999)
Answer : सामाजिक आंदोलन और क्रांति दोनों ही सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम है। सामाजिक आंदोलन व्यक्तियों का ऐसा सामूहिक प्रयास है जिसका एक सामान्य उद्देश्य होता है और उद्देश्य की पूर्ति के लिए संस्थागत सामाजिक नियमों का सहारा न लेकर लोग अपने ढंग से व्यवस्थित होकर किसी परम्परागत व्यवस्था को बदलने का प्रयास करते हैं। जबकि क्रांति सामाजिक आंदोलन से भी ज्यादा सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम हैं।
गिडेन्स ने सामाजिक आंदोलन को निम्नांकित शब्दो में परिभाषित ....
Question : लोकतांत्रिक राजनीतिक तंत्र का पारंपरिक सामाजिक संरचना पर प्रभाव
(1999)
Answer : लोकतांत्रिक राजनीतिक तंत्र में शासन जनता द्वारा सभी वयस्क मताधिकारियों की स्वतंत्र तथा समान सहभागिता पर आधारित होता है। जन-प्रतिनिधियों का चुनाव बहुसंख्यक जनता के मतों द्वारा होता है। लोकतांत्रिक चुनाव पद्धति की निम्नलिखित विशेषताएं हैं-
लोकतंत्र मे लिंग, आयु, जाति, प्रजाति, धर्म, सम्पदा, ....
Question : सामाजिक नियंत्रण जोर-जबरदस्ती के मुकाबले दृढ़ विश्वास का मामला अधिक है। टिप्पणी कीजिए। सामाजिक नियंत्रण में विचारधारा की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
(1999)
Answer : ‘सामाजिक नियंत्रण’ का संबंध मौटे तौर पर समाज में व्यवस्था और स्थिरता बनाए रखने से है। सीमित तौर पर इसका इस्तेमाल नियमों, अदालतों, पुलिस जैसे व्यवस्था बनाए रखने के विशेष प्रकार के साधनों को निर्दिष्ट करने में किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल सामाजिक संस्थानों और उसके अंतःसंबंधों को श्रेणीबद्ध करने में भी किया जाता है क्योंकि इससे सामाजिक स्थिरता में सहायता मिलती है, उदाहरण् के लिए कानूनी, धार्मिक, राजनीतिक संस्थान आदि। सामाजिक नियंत्रण समाजशास्त्रीय ....
Question : शक्ति की संकल्पना को स्पष्ट कीजिए। शक्ति और प्राधिकार के बीच विभेदन कीजिए।
(1998)
Answer : मानव पर प्रभुत्व करने, उन्हें भयभीत करने और नियंत्रित करने, आज्ञा-पालन करने, उनकी स्वतंत्रताओं में हस्तक्षेप करने तथा उनके व्यवहार को एक विशिष्ट दिशा में मोड़ने के लिए बाध्य करने की योग्यता अथवा सत्ता को शक्ति कहते हैं। संक्षेप में यह व्यक्तियों के व्यवहार को नियमित, व्यवस्थित, नियंत्रित अथवा निर्देशित करने की क्षमता को इंगित करती है। शक्ति व्यक्तिगत करिश्मा या पंरपरा या तार्किक स्वीकृति की निष्पति हो सकती है या संपदा अथवा सैनिक शक्ति ....
Question : किन संरचनात्मक दशाओं के अधीन आंदोलन उभरा करते हैं? सामाजिक आंदोलन के अधीन के किसी एक सिद्धांत का हवाला देते हुए इस पर चर्चा कीजिए।
(1998)
Answer : सामाजिक आंदोलन वैसे ही जन्म नहीं लेते। वे वहीं जन्म लेते हैं जहां सामाजिक परिस्थितियां इनके अनूकूल होती है। ये परिस्थितियां ही आंदोलन को प्रेरित करती हैं एवं आंदोलन के लिए लोगों की इच्छा जागृत करती है। हॉर्टन एवं हण्ट ने सामाजिक आंदोलन के लिए संरचनात्मक दशाओं एवं परिस्थितियों का उल्लेख किया है, जो इस प्रकार है-
Question : ‘क्रांतिकारी परिवर्तन के कुछ विशिष्ट लक्षण होते हैं।’’ उदाहरण सहित विवेचना कीजिए।
Answer : सामाजिक संबंधों के स्थापित स्वरूपों, सामाजिक मूल्यों, संरचनाओं अथवा उप-व्यवस्थाओं में परिवर्तन ही सामाजिक परिवर्तन कहलाता है। इन्हीं सामाजिक परिवर्तन के प्रमुख प्रकारों में से क्रांतिकारी परिवर्तन एक प्रमुख प्रकार है। क्रांतिकारी परिवर्तन किसी समाज की सामाजिक संरचना अथवा उसके महत्वपूर्ण पक्ष सामाजिक, आर्थिक अथवा राजनीतिक पक्षों में द्रुतगति से होने वाले आकस्मिक एवं वृहद् आधारभूत परिवर्तन को प्रदर्शित करना है। इस प्रकार के परिवर्तन द्वारा समाज का मूलभूत ढ़ांचा ही बदल जाता है या ....
Question : मूल्यांकन कीजिए कि नागरिक समाज और लोकतंत्र एक दूसरे को किस प्रकार से परस्पर प्रबलित करते हैं।
Answer : नागरिक समाज की प्रसिद्धि का कारण लैटिन अमेरिका, अफ्रीका एवं साम्यवादी देशों में अत्याचार के विरुद्ध कुछ समूहों द्वारा संघर्ष है। इन क्षेत्रें में नागरिक समाज ने बहुत से तानाशाही सत्ता के अंत करने में एवं जनतांत्रिक संक्रमण के काम में भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। आज का नागरिक समाज विभिन्न देशों अनेकों जन कल्याण का कार्य संपादित कर रहे हैं। साथ ही ये संस्थायें अपने आपको वास्तविक रूप से एक जनशक्ति के ....