फ्रीबीज़ पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता व्यक्त की
12 फरवरी, 2025 को सर्वोच्च न्यायालय ने एक मामले पर सुनवाई करते समय यह प्रश्न उठाया कि क्या गरीबों को बिना रोक-टोक दी जाने वाली मुफ्त सुविधाएं (Freebies) उन्हें परजीवी जीवन जीने के लिए विवश कर रही हैं, जिससे वे काम खोजने, मुख्यधारा में शामिल होने और राष्ट्रीय विकास में योगदान देने के किसी भी प्रयास से वंचित हो रहे हैं।
- शीर्ष अदालत द्वारा यह मुद्दा राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शहरी बेघरों के लिए पर्याप्त संख्या में रैन बसेरों की कमी से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करते समय उठाया गया।
मुफ्त उपहार (Freebies) क्या हैं?
- 'मुफ्त सौगात' या 'फ्रीबीज़' लोक कल्याणकारी ....
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