तटीय नियमन क्षेत्र अधिसूचना, 2018

दिसंबर, 2018 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तटीय नियमन क्षेत्र (Cosatal Regulation Zone - CRZ) अधिसूचना, 2018 को मंजूरी दे दी है, जिसकी पिछली समीक्षा वर्ष 2011 में की गई थी और फिर उसी वर्ष इसे जारी भी किया गया था।

उद्देश्यः तटीय नियमन क्षेत्र अधिसूचना, 2011 के समुद्री एवं तटीय पारिस्थितिकी के प्रबंधन एवं संरक्षण, तटीय क्षेत्रों के विकास, पारिस्थितिकी पर्यटन, तटीय समुदायों की आजीविका से जुड़े विकल्प एवं सतत विकास इत्यादि से संबंधित प्रावधानों की व्यापक समीक्षा करना।

  • पर्यावरण मंत्रालय द्वारा शैलेश नायक (पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में सचिव) की अध्यक्षता में जून 2014 में एक समिति गठित की गई थी जिसे CRZ अधिसूचना, 2011 में उपयुक्त बदलावों की सिफारिश करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। शैलेश नायक समिति ने वर्ष 2015 में अपनी सिफारिशें पेश की थी।

विशेषताएं: नई अधिसूचना के अनुसार केवल ऐसी परियोजनाएं, जो CRZ-I (पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र) और CRZ-IV (निम्न ज्वार रेखा (Low Tide Line) और 12 समुद्री मील के बीच के क्षेत्र को कवर करती हैं) में स्थित हैं, को पर्यावरण मंत्रालय से आवश्यक मंजूरी की आवश्यकता होगी।

  • CRZ- II (वे क्षेत्र जो तटरेखा तक या उसके नजदीक विकसित किए गए हैं) और CRZ-III (वे क्षेत्र जो अपेक्षाकृत बाधारहित हैं) के संबंध में मंजूरी के लिए शक्तियां राज्य स्तर पर प्रदान की गई हैं।
  • CRZ-IIIA ये वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार प्रति वर्ग किलोमीटर 2161 के जनसंख्या घनत्व के साथ घनी आबादी वाले ग्रामीण क्षेत्र हैं। इस तरह के क्षेत्रों में उच्च ज्वार रेखा (High Tide Line - HTL) से 50 मीटर का ‘नो डेवेलपमेंट जोन’ (No Development Zone - NDZ) होगा, जबकि CRZ अधिसूचना, 2011 में उच्च ज्वार रेखा से 200 मीटर का NDZ इसके लिए निर्दिष्ट किया गया था। मुख्य भूमि के समीप के द्वीपों के लिए और मुख्य भूमि के सभी अप्रवाही जल द्वीपों (Backwater Islands) के लिए, 20 मीटर का नो डेवेलपमेंट जोन निर्धारित किया गया है।