परमाणु दायित्व में संशोधन हेतु समितियाँ गठित
- 03 Apr 2025
2 अप्रैल 2025 को, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री द्वारा लोकसभा में बताया कि परमाणु ऊर्जा विभाग, परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड, NITI आयोग, और कानून मंत्रालय के सदस्यों के साथ समितियाँ गठित की गई हैं , ताकि परमाणु ऊर्जा अधिनियम और सिविल लायबिलिटी फॉर न्यूक्लियर डैमेज एक्ट(CLNDA) में संशोधन किया जा सके।
मुख्य बिंदु
- संशोधन का उद्देश्य: इन संशोधनों का मुख्य उद्देश्य निजी कंपनियों को भविष्य के परमाणु रिएक्टरों के निर्माण और कमीशनिंग में भाग लेने की अनुमति देना है।
- पूर्ववर्ती प्रयास: भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के बावजूद, पश्चिमी कंपनियों के साथ परमाणु व्यापार नहीं बढ़ पाया है, क्योंकि CLNDA के प्रावधानों ने आपूर्तिकर्ताओं पर उच्च दायित्व को अनिवार्य किया है, जो अंतर्राष्ट्रीय मानकों के विपरीत है।
- अंतर्राष्ट्रीय मानकों के साथ संरेखण: संशोधनों का उद्देश्य CLNDA को अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन फॉर सप्लीमेंट्री कंपेंसेशन फॉर न्यूक्लियर डैमेज (CSC) के साथ संरेखित करना है, जो मुख्य रूप से ऑपरेटरों को दायित्व देता है।
- वित्तीय और तकनीकी चुनौतियाँ: परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए उच्च लागत और तकनीकी हस्तांतरण संबंधी चुनौतियाँ भी हैं, जिन्हें संबोधित करने की आवश्यकता है।
- न्यूक्लियर क्षमता लक्ष्य: भारत का लक्ष्य 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करना है, जिसके लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी और विदेशी निवेश की आवश्यकता है।
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