भारत-अमेरिका का संयुक्त परमाणु रिएक्टर निर्माण
- 01 Apr 2025
31 मार्च 2025 को, भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से रुके हुए नागरिक परमाणु समझौते के तहत अमेरिकी ऊर्जा विभाग (DoE) ने भारत में परमाणु रिएक्टरों के डिजाइन और निर्माण की अनुमति दी।
महत्वपूर्ण तथ्य
- समझौते का इतिहास: यह समझौता, जिसे '123 सिविल न्यूक्लियर एग्रीमेंट' कहा जाता है, 2007 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश द्वारा हस्ताक्षरित किया गया था। इसे लागू होने में लगभग 20 साल लगे।
- SMR तकनीक का हस्तांतरण: DoE ने होल्टेक इंटरनेशनल को भारत में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) तकनीक स्थानांतरित करने की अनुमति दी है। होल्टेक तीन भारतीय कंपनियों—लार्सन एंड टुब्रो, टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स, और होल्टेक एशिया—के साथ मिलकर SMRs का निर्माण करेगा।
- प्रमुख शर्तें: संयुक्त रूप से विकसित परमाणु संयंत्रों को किसी अन्य भारतीय इकाई या तीसरे देश को बिना अमेरिकी सरकार की लिखित सहमति के हस्तांतरित नहीं किया जा सकता।
- भारत की परमाणु क्षमता: वर्तमान में भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता 8,180 मेगावाट है, जिसे 2031-32 तक 22,480 मेगावाट और 2047 तक 100 गीगावाट तक बढ़ाने की योजना है।
- रणनीतिक महत्व: यह समझौता चीन के बढ़ते SMR कार्यक्रमों का मुकाबला करने और वैश्विक दक्षिण में किफायती परमाणु तकनीक के लिए नेतृत्व स्थापित करने में भारत की भूमिका को मजबूत करेगा।
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