खाद्य सुरक्षा के लिए प्रकृति आधारित समाधान
संयुत्तफ़ राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के मुताबिक गैर-शाकाहारी खाद्यान्न की बढ़ती खपत से ओजोन परत, वन, मिट्टी और समुद्री जल को नुकसान पहुंचाया है। कृषि एवं खाद्य संगठन के अनुसार ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में 14.5 फीसदी हिस्सेदारी पशु आधारित खाद्यान्न उत्पादन की है। दुनिया के कुल चारागाह भूमि का 15 फीसदी मवेशियों द्वारा उपयोग में लाया जाता है। इससे जैव विविधता के सामने नया संकट पैदा हो रहा है।
- वनस्पति आधारित खाद्यान्न और उसकी उपलब्धता हजारों सालों से मानव के लिए उपलब्ध है। आज यह प्रकृति-आधारित समाधान की शक्ल में घरेलू खाद्यान्न सुरक्षा के साथ पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली के ....
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पत्रिका सार
- 1 संवहनीय मैन्युफैक्चरिंग की ओर संक्रमण
- 2 भारतीय अर्थव्यवस्था: ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य और आगे की राह
- 3 देश को एकजुट रखने में भारतीय खेलों की भूमिका
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