सुभेद्य वर्गों की औपचारिक वित्त तक पहुंच : आर्थिक सशक्तीकरण हेतु वित्तीय समावेशन आवश्यक
वित्तीय समावेशन से जहां एक ओर समाज के सुभेद्य वर्ग बैंकिंग, बीमा एवं पेंशन जैसी सेवाओं के माध्यम से अपनी भविष्य की आवश्यकताओं हेतु बचत करने को प्रेरित होते हैं; तो वहीं दूसरी तरफ, इससे देश में पूंजी निर्माण की दर में वृद्धि होती है। वित्तीय समावेशन के व्यापक परिणामों में रोजगार सृजन, तीव्र आर्थिक विकास तथा वित्तीय सेवाओं का गुणवत्तापूर्ण वितरण शामिल है। समाज के वंचित एवं सुभेद्य वर्गों तक वित्तीय सेवाओं की उपलब्धता को आसान बनाने के लिए बैंक शाखाओं की संख्या में वृद्धि की जानी चाहिए। साथ ही, सूक्ष्म वित्तीय संस्थाओं, स्वयं सहायता समूहों तथा डिजिटल बैंकिंग ....
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