इच्छा मृत्यु: जीवन का अधिकार बनाम मृत्यु का अधिकार
जनवरी 2022 में कोलंबिया में एक व्यक्ति को लाइलाज बीमारी से पीडि़त होने के बिना भी इच्छा मृत्यु (Euthanasia) प्राप्त करने का अधिकार प्रदान किया गया। इसके बाद, वैश्विक स्तर पर जीवन के अधिकार बनाम मृत्यु के अधिकार पर तीव्र बहस आरंभ हो गई।
- इच्छा मृत्यु को मर्सी किलिंग के रूप में भी जाना जाता रहा है। इसके अंतर्गत किसी भी व्यक्ति को दर्द रहित मौत प्रदान करने के लिए चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार उसकी चिकित्सा सुविधाओं को हटाना शामिल किया जाता है।
इच्छा मृत्यु के संदर्भ में कानूनी प्रावधान
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 जीवन के अधिकार से संबंधित ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा कवरेज हेतु समितियों का गठन
- 2 विज्ञान में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने हेतु यूनेस्को का अभियान
- 3 भारत और आईएलओ महानिदेशक के बीच द्विपक्षीय बैठक
- 4 वृद्धावस्था स्वास्थ्य सेवा और नशामुक्ति हेतु साझेदारी
- 5 अनौपचारिक क्षेत्र में श्रमिकों का औपचारिकीकरण और सामाजिक सुरक्षा
- 6 अनुसूचित जनजाति की महिला प्रतिनिधियों की राष्ट्रपति से मुलाकात
- 7 पीएम जनमन योजना पर जिलाधिकारियों का सम्मेलन
- 8 तीसरा राष्ट्रीय बधिर-नेत्रहीन सम्मेलन
- 9 राष्ट्रीय जनजातीय स्वास्थ्य कॉन्क्लेव 2025
- 10 धर्मांतरण तथा सामाजिक परिवर्तन

- 1 हाथ से मैला ढोने की प्रथा को समाप्त करना
- 2 पदोन्नति में आरक्षण
- 3 हेट स्पीचः अर्थ तथा कानूनी प्रावधान
- 4 अति संवेदनशील वर्गों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव
- 5 चकमा और हाजोंग समुदायों के समक्ष मानवाधिाकार संबंधी चुनौतियां
- 6 परियोजना निरामयः राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन
- 7 प्रौद्योगिकी हेतु राष्ट्रीय शैक्षिक गठबंधान (NEAT) 3-0