भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली : एक राष्ट्रीय निधि -(सतीश कुमार कर्ण)
पारंपरिक ज्ञान (Traditional knowledge) विश्व भर के देशज और स्थानीय समुदायों के ज्ञान, जानकारी, नवाचारों और परंपराओं को संदर्भित करता है। यह सदियों के अनुभव एवं स्थानीय संस्कृति और पर्यावरण के अनुकूलन के आधार पर पीढ़ी दर पीढ़ी मौखिक रूप से संचालित होता है। लोक कथाएं, मूल्य, विश्वास, अनुष्ठान, सामुदायिक नियम और कृषि तकनीक, जिसमें पौधों की प्रजातियों और पशुओं की नस्लों का विकास शामिल है, सामूहिक स्वामित्व वाले ज्ञान के उदाहरण हैं। इसे कभी-कभी मौखिक परंपरा भी कहा जाता है। सामाजिक और आर्थिक सुधार के लिए पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों का अध्ययन, संरक्षण और इनको पुनर्जीवित करना समय की मांग ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 भारत में उच्च शिक्षा सुधार रोज़गार क्षमता और अनुसंधान मानकों में वृद्धि आवश्यक - डॉ. अमरजीत भार्गव
- 2 भारत में कौशल अंतराल
- 3 अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम विनियामक निगरानी : भारत में डिजिटल मीडिया का विनियमन - आलोक सिंह
- 4 असंगठित क्षेत्र में अदृश्य कार्यबल के रूप में महिलाएं - आलोक सिंह
- 5 जलवायु परिवर्तन एवं वैश्विक दक्षिण समतापूर्ण एवं न्यायसंगत वैश्विक प्रतिक्रिया की आवश्यकता - डॉ. अमरजीत भार्गव
- 6 ग्लोबल स्टार्टअप हब के रूप में भारत का उदय विकास के कारक एवं चुनौतियां - डॉ. अमरजीत कुमार
- 7 निवारक स्वास्थ्य देखभाल स्वास्थ्य एवं कल्याण सुनिश्चित करने के लिए भारत की राष्ट्रीय प्राथमिकता - डॉ. अमरजीत कुमार
- 8 भारत-कुवैत रणनीतिक साझेदारी खाड़ी देशों तक भारत की पहुंच में एक महत्वपूर्ण पड़ाव - आलोक सिंह
- 9 शहरी अपशिष्ट जल प्रबंधन भारत का दृष्टिकोण, चुनौतियां तथा आगे की राह - डॉ. अमरजीत भार्गव
- 10 वैश्विक शासन सुधारित बहुपक्षवाद की आवश्यकता एवं महत्वपूर्ण मुद्दे - आलोक सिंह

- 1 परिवर्तनशील भू-राजनीतिक एवं भू-आर्थिक स्थिति : वैश्विक व्यवस्था एवं भारत
- 2 कॉरपोरेट गवर्नेंस : पारदर्शिता तथा नैतिकता आधारित व्यावसायिक शासन - (महेन्द्र चिलकोटी)
- 3 सिंथेटिक बायोलॉजी : अनुप्रयोग एवं चुनौतियां- (शक्ति कुमार दुबे)
- 4 जलवायु परिवर्तन : प्रभाव, अनुकूलन एवं भेद्यता
- 5 भारत के लिए एक व्यापक रक्षा एवं सामरिक नीति की आवश्यकता- (डॉ. अमरजीत भार्गव)